रविवार, 3 जनवरी 2016

पठानकोट हमला

पठानकोट हमले में सबसे दु:खद है सरकार का अपने ऐक्शन पर खुद का पीठ थपथपाना। जबकि सरकार के लिए डूब मरने वाली बड़ी विफलता है।

जरा पठानकोट आतंकी हमले की कहानी को देसी स्टाइल में शार्ट में समझें और जानें कि पंजाब से लेकर दिल्ली तक सरकार का सिस्टम ध्वस्त हो गया।

24 घंटे का टाइम देकर आतंकवादी कह कर घुसे। पांच आतंकवादी पंजाब आते हैं। घूमते हुए एसपी की लालबत्ती वाली गाड़ी को अगवा करते हैं। कुछ घंटे उन्हें घुमाते हैं। और फिर आतंकी उन्हें गाड़ी से फेंक निकल जाते हैं।

एसपी थाने जाता है। कहानी बताता है। साफ बताता है कि आतंकवादी घुस आए हैं और वे कोई हमला करने की योजना में है। पंजाब से लेकर दिल्ली तक यह सूचना 48 घंटे पहले आ जाती है।

उधर आतंकी एसपी की गाड़ी पर उसी इलाके में आराम से घूमते हैं। टहलते हैं। एयरफोर्स स्टेशन की रेकी करते हैं। और पूरे 50 घंटे तक वह पूरे देश की सुरक्षा एजेंसी को खुल्ला चैलेंज करते हैं- कैच मी इफ यू कैन। वह उसी इलाके में रहते हैं। पूरे देश को यह जानकारी होती है कि 5 खूंखार आतंकवादी पठानकोट इलाके में हैं। लेकिन पंजाब पुलिस और दिल्ली की सुरक्षा एजेंसी उन्हें खोज नहीं पाती है।

और फिर वे एयरफोर्स स्टेशन घुसते हैं,11 जवानों को मारते हैं। इतने ही गंभीर रूप से घायल करते हैं, सेना के जवान मर रहे हैं। किसी को कुछ पता नहीं है कि क्या हो रहा है, कितना नुकसान होगा।

लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में पूरी सरकार खुद को पीठ थपथपाने में जुट चुकी है। इस घटना को वे प्रॉम्प्ट ऐक्शन कहते हैं। और सरकार से भी अधिक उनके सपोर्टर को देखने की हैरानी होती है जो यह मानने को तैयार भी हो जाते हैं कि हां यह प्रॉम्प्ट ऐक्शन था।

कम से कम शांत हो जाते तो भी इतना बुरा नहीं दिखते जितने लग रहे हैं। ऐसा ही दूसरे मोर्चे पर भी रहा है।

मोदी सरकार को अगर आज कोई सबसे अधिक नुकसान कर रहे हैं तो वह उनके समर्थक हैं जो गलती को ठीक करने के बजाय, उसे प्रोत्साहित करते हैं।

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