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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

बड़ा खुलासा: कन्हैया ने नहीं लगाए देश विरोधी नारे!

नई दिल्ली: जेएनयू में देश विरोधी नारे को लेकर देश में हंगामा मचा है लेकिन अब इस मामले में एक नया मोड़ आता दिख रहा है जो पूरे विवाद का रूख पलट सकता है. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि ऐसा हो सकता है कि कन्हैया ने न देश विरोधी नारे लगाए और न ही अफजल की बरसी पर हुए कार्यक्रम में कोई भड़काऊ भाषण ही दिया.

पीटीआई सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि गृह मंत्रालय के अफसर ये मानते हैं कि कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह का केस अति उत्साह में लिया गया कदम हो सकता है. खुफिया एजेंसियों ने भी गृह मंत्रालय को रिपोर्ट दी है कि हालांकि कन्हैया संसद हमले के दोषी अफजल की बरसी के कार्यक्रम में मौजूद था लेकिन उसने न भारत विरोधी नारे लगाए और न ही उसने ऐसा कुछ कहा जिससे उसपर देशद्रोह का केस बनता है.

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

देशद्रोही अगर कन्हैया कुमार है तो आप देशद्रोही कैसे नहीं

मैंने एक बार नहीं कई बार, बार बार JNU छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के स्पीच का पूरा विडिओ देखा सोचा कुछ तो मिले जो देश-विरोधी हो, पर यकीन मानिये एक शब्द भी हमें देश-विरोधी नहीं मिला,
हाँ हमें स्पीच में मिला,
- कन्हैया कुमार संविधान की बात करता है,
- कन्हैया कुमार अधिकार की बात करता है,
- कन्हैया कुमार शांति की बात करता है,
- कन्हैया कुमार मुसलमानों की हक़ की बात करता है,
- कन्हैया कुमार दलितों की हक की बात करता है,
- कन्हैया कुमार किसानो की हक़ की बात करता है,
- कन्हैया कुमार बाबा साहेब आंबेडकर की बात करता है
- कन्हैया कुमार संघ की असलियत बताता है
- कन्हैया कुमार बताता है कि संघियों ने तिरंगा को पैरों तले कुचला था,
- कन्हैया कुमार बताता है कि देश में संविधान का राज नहीं चल रहा सब कुछ नागपुर से कण्ट्रोल हो रहा है,
- कन्हैया कुमार बताता है कि कसी संविधान की जगह मनुस्मृति को कानून बनाने का षड्यंत्र चल रहा है
- कन्हैया कुमार बताता है कि कैसे दलितों-मलेच्छों को वर्षों पैर की धूल समझता रहे हैं ये मनुवादी,
- कन्हैया कुमार मनुवाद का विरोध करता है
- कन्हैया कुमार मांग करता है कि दलितों को संविधान के अनुसार निजी संस्थानों में आरक्षण दो
- कन्हैया कुमार बताता है कि उसकी माँ एक आंगनवाड़ी सेविका है और उस माँ को भद्दी भद्दी गाली दे रहे हैं संघी
- कन्हैया कुमार बताता है कि जो किसी की माँ की इज्जत नहीं करते वो देश क्या इज्जत करेंगें.
- कन्हैया कुमार बताता है कि संविधान के अनुसार भारत एक देश है न की माँ
- कन्हैया कुमार बताता है कि ये संघी चाहते हैं कि देश में फिर से मनुस्मृति लागु हो और दलितों-मलेच्छों के माँ बहनों को दासी बना कर रखा जाये यही इनका इंसाफ है और हम ऐसे इंसाफ को नहीं मानते, ये अन्याय है अन्याय.
अगर उपरोक्त बाते कहना ‪#‎देश्द्रोहिता‬ है तो काका समेत देश की लगभग 80-90% जनता यही सोचती है, कितनो को घोषित कर रहे हैं देशद्रोही साहेब....??
अगर आपको यकीन न आये तो आप खुद देखिये कन्हैया कुमार की वो स्पीच और आप खुद तय करें देशद्रोही अगर कन्हैया कुमार है तो आप देशद्रोही कैसे नहीं... ....???????????????????????????????

शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

JNU की घटना RSS के माइंड की उपज है।

हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला के मामले में ABVP की जो फजीहत हुयी है, एवं RSS के राष्ट्रवाद ( जो राजतंत्र को मजबूत व लोकतन्त्र को नष्ट करने के उद्देश्य से लाया गया है) को धक्का लगा है। इन दोनो को मजबूत करने व दलित  पिछड़े एकता को नष्ट करने के उद्देश्य से JNU कार्यक्रम लाया गया लगता है। बहुत कुटिल नीति के तहत इस कार्यक्रम को आयोजित कराया गया।जरा सोचो जब JNU ने इस कार्यक्रम की अनुमति नही थी तो हो कैसे गया। इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजन की तैयारी की गयी होगी। तैयारी के समय इसका विरोध या पुलिस कार्यवाही क्यो नही हुयी। मुद्दा जो तैयार करना था । इस कार्यक्रम से राष्ट्रवादियो ने कई निशाने साधे।
१- हैदराबाद के रोहित मामले में भाजपा, व ABVP की हुयी फजीहत को दबाना ।
२- रोहित मामले से उपजी दलित पिछड़े मुस्लिम एकता को नष्ट करना।
३-  RSS व उसके आनुसॉगिक संगठनों को राष्ट्र हितैषी सिद्ध करना, ताकि RSS का लोकतन्त्र को नष्टकर राजतंत्र को मजबूत करने का दूरगामी आन्दोलन की पोल न खुले।
४- देश में ब्राम्हणों के प्रति उभर रही नफरत को दबाना।
५- भाजपा को पिछले चुनावो में मिली करारी हार के बदले देश को हिन्दू मुस्लिम लड़ाई में बदलने की तैयारी।
    भाइयो लोकतन्त्र के लिये इतना खतरनाक JNU का कार्यक्रम नही जितना खतरनाक RSS व उसके आनुसॉगिक संगठनों का राष्ट्रवाद का कार्यक्रम व दलितो पिछड़े व मुस्लिमों की अभिव्यक्ति को दबाना है। राष्ट्रवाद लोकतन्त्र के लिये सबसे बड़ा खतरा है। हमारे लोग इसे समझे।इसका जवाब इसप्रकार निकाले कि बिना विरोध के राष्ट्रवाद की विचारधारा को नष्ट किया जा सके, अन्यथा लोकतन्त्र का नष्ट होना तय है। अगर किसी भाई को राष्ट्रवाद देश व जनहित में लग रहा हो तो एक बार राष्ट्रवाद के उत्पत्ति का इतिहास पढ ले और यह जानने का प्रयास करे कि राष्ट्रवाद व देशभक्ति की संकल्पना क्यो गढी गयी।

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