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शनिवार, 21 मई 2016

रामसेतू बनाने की क्या जरूरत पड़ी..??

रावण बिना किसी पुल के लंका से पंचवटी के जंगल जाकर सिता का हरण करके लंका ले गया,
जबकि राम को वहा से लंका जाने के लिए पुल बनाना पड़ा..
जब रावण को पुल की जरुरत नही पड़ी तो राम को क्यू .??
जबकी राम तो भगवान था भगवान तो कुछ भी कर सकता हे खैर..
अब अंधभक्त लोग कहेंगे की, रावण के पास पुष्पक विमान था,
तो फिर राम के पास भी तो उड़ने वाला हेलिकॉफ्टर बंदर (हनुमान) था, जो पहाड़ लेकर उड़ सकता था वो पहाड़ पर वानर सेना ओर भालू सेना को लेकर भी तो उड़ सकता था, फिर रामसेतू बनाने की क्या जरूरत पड़ी..??
मेंन्टोस की गोली खाओ दिमाग की बत्ती जलाओ.. अंधविश्वास भगाओ

रविवार, 8 मई 2016

जिसका कोई वैज्ञानिक आधार न हो वह अंधविश्वास कहलाता है।

क्या. आप अंधविश्वासी है? नही न, हर व्यक्ति अपने आप को अंधविश्वासी नही मानता है। सिर्फ झाड फूक करवाना, टोना टुटका की प्रथा ही अंधविश्वानस नही कहलाता है। हर वह विश्वास जो आंख बंद करके किया जाय। जिसका कोई वैज्ञानिक आधार न हो वह अंधविश्वास कहलाता है। गौर करे रोजमर्रा के इन खास अंधविश्वासों पर और अवगत कराये अपने सभी करीबी दोस्तो‍ और रिश्तेदारों को।
1. किसी को बांये हाथ से पैसे देना  अशुभ
2. किसी व्रत-त्यौहार के खिलाफ बोलना आशुभ
3. किसी के घर में बीमार पड़ जाने पे,लाल मिर्च को आग पे जला के घर में धुवां करना
4. घर दुकान दरवाजे पे/नयी कार आदि पे निम्बू हरी मिर्च टांगना
5. भभूत खाना/खिलाना
6. बच्चों/सयानो के गले/बाजू में ताबीज पहनना
7. बिल्ली रास्ता  काटने पर अशुभ
8. चप्पल उल्टी होने पर अशुभ
9. बाहर जाते समय टोकना अशुभ
10. किसी त्योहार के दिन काले कपडे पहनना अशुभ
11. घर के निर्माण के समय उसकी नीव में ताम्बे/स्वर्ण मुद्रा डालना शुभ
12. किसी कार्य के प्रारम्भ में छींकना अशुभ
13. गुरूवार शनिवार और मंगलवार को दाड़ी/बाल कटवाना अशुभ
14. शनिवार को तेल या तेल में सिक्के का दान करना शुभ
15. बच्चों को नजर लगना
16. चोरी करके घर में बोतल में मनी प्लांट उगना अशुभ
17. पीछे से किसी को नमस्ते आदि करना अशुभ
18. पड़ोस में खाने की वस्तु किसी बर्तन में देने पर खाली बर्तन वापस करना अशुभ
19. विधवा स्त्री का किसी शुभ कार्य में शामिल होना अशुभ
20. कौवें का छत पर बैठ कर बोलना अशुभ
21. रात में कुत्ते का रोना/ अलग प्रकार से भोंकना अशुभ
22. लड़की से वंश न चलना।
23. बच्चों को परीक्षा के लिए दही शक्कर खिलाकर भेजना शुभ
24. गले या बाजु में काला धागा बाँधना।
25. बच्चे को काला टीका लगाना।
26. नदी में सिक्के फेंकना।
27. किसी दिन विशेष किसी खास दिशा की यात्रा न करना।
28. अख़बारों में राशिफल देखना उसके अनुसार कार्यक्रम बनाना।
29. रात में किसी को पैसे उधार देने या लौटाने से परहेज करना।
30. शनिवार को लोहा न खरीदना।
31. विशेष संख्या जैसे 13 को अशुभ मानना।
32. उल्लू पक्षी का दिखना अशुभ
33. छिपकली का ऊपर गिर जाना अशुभ
34. सवप्न फल को भविष्‍वाणी की तरह विश्वास करना
35. किसी ओबीसी जैसे तेली जाति के व्यक्ति का सुबह सुबह मुह न देखना अशुभ मानना
36. एससी जाति के व्यक्ति को ग्रहण में बासी खाना दान करना
37. कुछ कहते समय बिजली बंद हो जाय तो झूठ बोल रहा है
38. कुछ कहते समय बिजली आ जाय तो सच बोल रहा है
39. धनतेरस के दिन यह सोच कर खरीददारी करना की आज धनतेरस है।
40. भविष्य  वाणी पर भरोसा करना कुण्डनली ज्यो तिष आदि
41. वास्तु  को मानना एवं उसके अनुसार टोटके या तोड फोड करना
42. दान कर्म से मेरा भला होगा यह सोच कर दान देना
43. मृत पूर्वज को पानी पिलाना खाना खिलाना या श्राद्ध कर्म करना
44. विवाह के लिए शुभमुहूर्त निकलवाना
45. जिसके साथ बुरा हुआ है इसका मतलब उसने पूर्व जनम में इस जन्म् में बुरा किया होगा ये मानना
46. किन्नरों की दुआ बद्दुआ पर विश्वास करना।
यदि आप को ये समझ मे नही आ रहा है तो ये समझिये आप जानवर है जानवर मानसिक गुलाम होता है यदि समझ मे आ रहा है तो आप बुद्धजीवी है फिर भी वुद्धजिवी का प्रतिशत कम है नही  तो आप की व्यवस्था होती यानी आप शासक होते।

गुरुवार, 5 मई 2016

बस यूही चल रहा है मेरा भारत महान Incredible India

किसी मज़ार पर एक फकीर रहते थे।
सैकड़ों भक्त उस मज़ार पर आकर दान-दक्षिणा चढ़ाते थे।

उन भक्तों में एक बंजारा भी था।

वह बहुत गरीब था,

फिर भी, नियमानुसार आकर माथा टेकता,

फकीर की सेवा करता,
और
फिर अपने काम पर जाता,
उसका कपड़े का व्यवसाय था,
कपड़ों की भारी पोटली कंधों पर लिए सुबह से लेकर शाम तक गलियों में फेरी लगाता,
कपड़े बेचता।

एक दिन उस फकीर को उस
पर दया आ गई,
उसने अपना गधा उसे भेंट कर दिया।

अब तो बंजारे की आधी समस्याएं हल हो गईं।
वह सारे कपड़े गधे पर लादता और जब थक जाता
तो
खुद भी गधे पर बैठ जाता।

यूं ही कुछ महीने बीत गए,,

एक दिन गधे की मृत्यु हो गई।

बंजारा बहुत दुखी हुआ,
उसने उसे उचित स्थान पर दफनाया,
उसकी कब्र बनाई
और
फूट-फूट कर रोने लगा।

समीप से जा रहे किसी व्यक्ति ने
जब यह दृश्य देखा,
तो सोचा
जरूर किसी संत की मज़ार होगी।
तभी यह
बंजारा यहां बैठकर अपना दुख रो रहा है।
यह सोचकर उस व्यक्ति ने कब्र पर
माथा टेका और अपनी मन्नत हेतु वहां प्रार्थना की कुछ पैसे चढ़ाकर वहां से चला गया।

कुछ दिनों के उपरांत ही उस
व्यक्ति की कामना पूर्ण हो गई। उसने
खुशी के मारे सारे गांव में
डंका बजाया कि अमुक स्थान पर एक पूर्ण फकीर की मज़ार है।
वहां जाकर जो अरदास करो वह पूर्ण होती है।
मनचाही मुरादे बख्शी जाती हैं वहां।

उस दिन से उस कब्र पर
भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया।

दूर-दराज से भक्त अपनी मुरादे बख्शाने वहां आने लगे।
बंजारे की तो चांदी हो गई,

बैठे-बैठे उसे कमाई
का साधन मिल गया था।

एक दिन वही फकीर
जिन्होंने बंजारे
को अपना गधा भेंट स्वरूप
दिया था वहां से गुजर रहे थे।

उन्हें देखते ही बंजारे ने उनके चरण पकड़ लिए और बोला-
"आपके गधे ने
तो मेरी जिंदगी बना दी। जब तक जीवित था
तब तक मेरे रोजगार में मेरी मदद करता था
और
मरने के बाद
मेरी जीविका का साधन बन
गया है।"

फकीर हंसते हुए बोले,
"बच्चा!
जिस मज़ार
पर तू नित्य माथा टेकने आता था,

वह मज़ार इस गधे की मां की थी।"
.

सोमवार, 2 मई 2016

अंधविश्वास की कोई सीमा नही हैं

क्योकि इससे बढ़ावा देने वाले लोगो की कमी नही हैंl
इस अंधविश्वास के कारण ही उनकी रोजी रोटी चलती हैं।
और इसी कारण ये इसे बढावा देने के लिए
विज्ञापनों का सहारा भी लेते हैं। इन विज्ञापनों के प्रचार – प्रसार के लिए बीते दिनों के मशहूर
हस्तियों को चुना जाता है ।
आजकल बीते जमाने के हिंदी फिल्म स्टार
गोविंदा बड़े ही जोर – शोर से शुभ धन
वर्षा यंत्र को बेच रहे हैं और इसमें दर्शक
दीर्धा में भी कुछ पुराने जमाने के टेलिविजन कलाकार बैठे होते हैं और गोविंदा की हाँ में
हाँ मिलाते रहते हैं
और यह बताने का प्रयास करते हैं
कि धन वर्षा यंत्र के घर में स्थापित करने
के बाद उनके जीवन में उल्लेखनीय प्रगति आई
है और उनके जीवन के तमाम कष्ट दूर हो गए
हैं
तथा अब वह अपना जीवन पूर्ण आनन्द से
व्यतीत कर रहें हैं । गोविंदा जी दर्शक दीर्धा से
एक व्यक्ति को बुलाते हैं और उससे उसका नाम
पता पूछते हैं तो वो जबाव देता है
कि उसका नाम रामखेलावन है
और वह छपरा, बिहार के एक छोटे से गाँव मे रहता है तथा किसान है ।
आगे वह
बताता है कि धन वर्षा यंत्र स्थापना से पहले
उसकी हालत बहुत खराब थी और खेती ठीक
नहीं होती थी ।
वह इतना गरीब था कि अपने
बच्चों को स्कूल तक नहीं भेज पाता था
परंतु यंत्र स्थापना के बाद उसकी खेत में
इतनी पैदावार होती है कि घर धन से भर गया है तथा अब उसके बच्चे शहर के स्कूल में पढते हैं । इन महाशय के
बारे में मैं बताना चाहूँगा कि ये कोई
किसान नहीं है
वरन टेलिविजन के छोटे स्तर के
कलाकार हैं
जिन्हे मैनें अक्सर सोनी चैनल पर आने वाले कार्यक्रम अदालत में देखा है ( आप भी देख सकते हैं ) ।
इन कार्यक्रमों में जितने भी कलाकार बैठे होते है अगर आप गौर से देखें
तो सभी उम्र के पचास पड़ाव पार कर चुके
हैं
और पहले की तुलना में अब उनके पास काम
नहीं है और अगर है भी तो बहुत ही कम
जिसके
कारण वो यह विज्ञापन कर रहें हैं।
अजीब बात ये हैं की सरकार क्यों इस पाखंड
को बढ़ावा दे रही हैं ।
क्या उसे सच में लगता हैं कि इन चीजो से कुछ लाभ हो सकता हैं तो फिर क्यों न फिर सरकार
गरीब लोगो को सस्ता अनाज वितरित
करने की बजाय शुभ धन वर्षा बाटे,
लोगो की गरीबी कम हो जाएगी
और देश की जो आज आर्थिक व्यवस्था गिर चुकी हैं
वो भी सुधर जाएगी..
क्यों आखे होकर अंधे बने हुवे हो भाईओ अब तो आंखे खोलो..
यदी फिर भी कोई मेरे खिलाफ बोलना चाहता है तो ऊसे मेरा एक सवाल
(1) चलो भाई हिंदु धर्म के हिसाब से चलते है. हिंदु धर्म मे बताया जाता है की ईनसान की तकदीर मे जो लिखा है वो बदला नही जाता, ईश्वर के बदौलत कोई पत्ता भी नही हिलता तो भाई क्यों मै ईतना हिल डुल रहा हु क्यों मै अंधविश्वास कि पोल खोले जा रहा हु तकदीर तो ऊसने मेरी भी लिखी होगी?
क्या ऊसने मेरी तकदीर मे ये लिखा है कि जाओ भाई निचे जाकर मेरे खिलाफ इंटरनेट पे मेरी पोल खोल दो?
और क्या शुभ धन वर्षा घर मे रखने से तकदीर मे लिखे गयी यंत्रना बदलने वाली है क्या?

सौ- अँधविश्वास मीटाओ समाज बचाओ

मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

कितना बेबस है भगवान (भगवान सिर्फ अंधविश्वास है)

लोग कहते हैं कि कण कण मे भगवान है, अगर कण कण मे भगवान है तो कण कण मे भ्रष्टाचार क्यों है ?
अगर कण मे कण भगवान है तो लोग जगह जगह अपना मल , मूत्र त्याग कर क्या भगवान को अपवित्र नही बना रहे ?
अगर जर्रे जर्रे मे भगवान है तो क्या लोग टट्टी, पेसाब, भगवान की खोपडी पर कर रहे हैं ?
लोग कहते हैं कि बगैर भगवान की मर्जी के पत्ता भी नही हिलता,
तो क्या भगवान चोरी भी करवाता है?
जब सब कुछ भगवान की मर्जी से होता है तो भगवान बलात्कार भी करवाता होगा ?
डकैती भी डलवाता होगा?
अगर यह सब भगवान ही करवाता है तो कितना निर्दयी है भगवान !
लोग कहते हैं कि भगवान गरीबो, मजलूमों, असहायों की रक्षा करता है ।
तो हिन्दुस्तान की आधे से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने के लिए मजबूर क्यों है ?
भगवान क्यों नही इन्हें अमीर बना देता ?
दुनिया मे हर कहीं असहाय, मजलूम ही प्रताडित हो रहा है , भगवान क्यों नही इनकी मदद करता ?
लोग कहते है कि भगवान दुष्ट, चोर,गुण्डो को सजा देता है।
तो फिर जगह जगह चोरी डकैती, गुण्डागर्दी क्यों हो रही है ?
अगर भगवान इनको रोकने मे सक्षम है तो पुलिस ,सेना, कोर्ट कचहरी क्यों है ?
सच यह है कि भगवान कुछ नही कर सकता ।
आज तो भगवान की खुद शामत आ गयी है ।
आंतकवादी मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च देखकर ब्लास्ट कर रहा है, भगवान अपनी बचत नही कर पा रहा है ।
भगवान की अष्टधातु मूर्तियों को चोर चुरा कर अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे बेंच कर करोडो कमा रहा है,
भगवान अपनी रक्षा नही कर पा रहा है ।
कितना बेबस है भगवान !
लोग कहते है कि भगवान दूसरो को पवित्र बनाता है, अपने दर्शन से ।
लेकिन यह भगवान दलितों के छूने से ही छुईमुई के पौधे की तरह खुद सिकुड जाता है ।
दलित के छूने से अपवित्र हो जाता है ।
और फिर गाय, भैंस, बकरी की पाखाना, पिसाब से पवित्र हो जाता है ।
कैसा भगवान है ?
भगवान जब सबसे ताकतवर है तो उसकी सिक्युरिटी मे पुलिस ,, कमाण्डों , सेना क्यों लगायी जाती है ?
किसी भी धार्मिक स्थल पर जाइए, वहां गेट पर सबसे ज्यादा लूले,लंगडे,अपाहिज ,कोढी,लाइन लगाये रहते है,
अंधे को आंख देत ,कोढिन को काया वाला भगवान कहां रहता है, क्यों नही इनकी समस्या दूर कर देता है ?
किसी ने कहा है कि _"इंसान को बनाकर भगवान ने सबसे बडी गल्ती की', या भगवान को बनाकर इंसान ने ।"
उत्तर साफ है कि "भगवान को बनाकर इंसान ने सबसे बडी गल्ती की।"
अगर इंसान ने भगवान की कल्पना नही की होती तो इसके नाम पर इतना ज्यादा लुटता, पिटता नही ।
भगवान सिर्फ अंधविश्वास है ।

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