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मंगलवार, 3 मई 2016

देश को गुलाम बनाते रहे हैं ?

ताज महल = मुसलमानों ने बनाया!
लाल किला= मुसलमानों ने बनाया!
कुतुबमीनार = मुसलमानों ने बनाई!
चार मीनार = मुसलमानों ने बनाई!
गोल गूम्बज = मुसलमानों ने बनाया!
लाल दरवाजे = मुसलमानों ने बनाये!
मिसाईल= मुस्लिम ने बनाई (डा.कलाम)
इंडिया गेट = अंग्रेजो ने बनाया!
गेटवे ऑफ इंडिया = अंग्रेजो ने बनाया!
हावड़ा ब्रिज= अंग्रेजो  ने बनाया!
पार्लियामेंट हाउस =अंग्रेजों ने बनाया!
राष्ट्रपति भवन =अंग्रेजों ने बनाया!
नॉर्थ-साऊथ ब्लॉक= अंग्रेजों ने बनाये!
कनॉट प्लेस =अंग्रेजों ने बनाया!
संविधान= बुद्ध ने बनाया (डॉ. अम्बेडकर)
परमाणू शस्त्र= मुस्लिम ने बनाये (डॉ. कलाम)!

तो ये ब्राह्मन भारत में करते क्या रहे है?
(a) देश को गुलाम बनाते रहे हैं ?
(b) देश,धर्म,संस्कृति, सभ्यता और समाज को कमजोर करते रहे हैं?
(c) देशमें जाति-धर्म के नाम पर दंगा कराते रहे हैं ?
(d) देश को तोड़ते रहे हैं?
(e) देश का धन, 'भय और धर्म' के नाम पर मंदिरों में इकट्ठा करते रहे हैं.

आप दिमाग से पैदल हैं

आपकी मूर्खता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि हम 15 - 20 साल पढ़ाई में ख़त्म करने के बाद एक पाँचवी फेल पंडित से सलाह लेते हैं कि हमको क्या करना चाहिए या क्या नही करना चाहिए । मतलब आप इंजिनियर वकील डॉक्टर बनकर भी इस लायक नही हुए कि अपना निर्णय खुद ले सको । आपमें इतनी क्षमता विकसित नही हुई जितनी एक पांचवी फेल पंडित में । आप पंद्रह बीस साल खर्च करके भी ये किसी पंडित से पूछते हैं कि घर कब बनाना है । आप दिमाग से पैदल हैं जो अपने घर का निर्माण करने का निर्णय भी खुद नही कर सकते ? पूछा पंडित से घर कब बनेगा और जब घर बनवाने की बारी आई, तब भी शुरुआत करने वो पाँचवी फेल पंडित ही आएगा ।  बच्चा आपने पैदा कर लिया लेकिन पंद्रह वीस साल खर्च करने के बाद भी आप इतना नही सीख पाए कि अपने बच्चों का नाम भी खुद रख पायें । बच्चा आपका है या पांचवी फेल पंडित का ? अब बात शादी की आई तो ये भी तय आप नही कर सकते कि आप शादी कब करोगे ? आपको शादी कब करनी है ये भी एक पांचवी फेल पंडत बताएगा । आपको लड़की / लड़का पसंद है, आपके परिवार वालों को भी पसंद है लेकिन एक पांचवी फेल पंडित ने कह दिया कि इससे शादी करना अच्छा नही होगा तो आप पंद्रह बीस साल खर्च करके भी उस पांचवी फेल पंडित से तुच्छ ही साबित हुए । आप जीवन भर पाँचवी फेल पंडित के आगे झुकते रहे लेकिन जब मरोगे तब भी ये ही पांचवी फेल पंडत तय करेगा कि आपको मरना कैसे है गीता सुनकर, रामायण सुनकर या सत्यनारायण की कथा सुनकर । अब इससे ज्यादा आपकी मूर्खता के प्रमाण और क्या दूं ।
सौ  -  Ravi kumar jatav

पानी का ठेकेदार तथाकथित इंद्र कहाँ गया

निरर्थक भगवानों का बहिस्कार कीजिये...

आज देश सूखे की भयंकर त्रासदी से गुजर रहा है बिना पानी के इंसान भूखे प्यासे मरने के लिए बाध्य है पशु पक्षी और जानवरों का बहुत बुरा हाल है अन्नदाता किसान बिना पानी मरने और आत्महत्या करने पर मजबूर है मुझे लगता इस त्रासदी से भारत में आज भी कम से कम 33 करोड़ लोग ग्रसित होंगे फिर ब्राम्हणों के निर्दयी 33 करोड़ देवी देवता किधर गए कहाँ गया पानी का ठेकेदार तथाकथित इंद्र कहाँ गया तीनो लोको की रक्षा करने वाला विष्णु. देश की कम से कम तीन चौथाई आबादी चिलम वाले शंकर को पुज कर उसपर भरोषा करती है क्या सिर्फ इसलिए की लोग भूंखे प्यासे मरें .कहाँ गया पर्वत उठाने वाला कृष्ण कहाँ गया पालनहार राम कहाँ गया संकटमोचन हनुमान कहाँ गया सबकुछ देनेवाला गणेश क्या दुर्गा सरस्वती लक्ष्मी काली सभी के आँखों में पट्टी बंधी है कुछ दिखाई नही देता है कहा गया लोगो को मुर्ख बनाकर लूटने वाला साईं और शनि.और मजे की बात यह है कि इस भूख प्यास से मरने वाले वही निरीह निर्दोष लोग है जो रात दिन इन्ही 33 करोड़ धूर्तों के भजन गाते है पशु पक्षी जानवर भी इन्ही की देन है फिर इन्होंने क्या बिगाड़ा जो इन्हें प्यासा मारा जा रहा है सायद इसका जवाब न मूर्खों के पास है न धूर्तों के पास क्योंकि इसका जवाब कुछ हो ही नही सकता है.
लेकिन एक बात तो सच है की ये देश खुद के कुछ करने से चलता है और चलता है बाबा भीम के संविधान से जिन्होंने कहा था उठो जागो और खुद के लिए कुछ करो अन्यथा भूंखे नंगे और प्यासे मरो .तुम जिस पत्थर को पूजकर अपना सत्यानास करते हो अगर उसी पत्थर को सीढ़ी बनाकर अगला कदम बढ़ाओगे तो तुम्हे तुम्हारी सफलतम मंजिल जरूर मिल जायेगी.
अन्यथा आज ऐसे भगवान् का क्या प्रयोजन जो तुम्हे पानी भी नही दे सकता उलटे प्यासा मार रहा है ये वक़्त है खुद के सोचने का और मूर्खता पाखण्ड देवी देवता और भगवानो से बाहर निकलने का अन्यथा भूख प्यास का सिलसिला झूठे मक्कार देवी देवताओं और भगवानो के दम पर सायद कभी खतम नही होगा

सौ- भीम पुत्र अजय अम्बेडकर
      जौनपुर उत्तर प्रदेश

आरक्षित वर्ग की एक पोस्ट के इंटरव्यू का एक दृश्य

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अधिकारी -     यह नौकरी मैं सामान्य वर्ग को क्यों न दूं

अभ्यर्थी  -    संविधान के आरक्षण के तहत ये जगह मुझे ही मिलनी चाहिए

अघिकारी -  कौनसे संविधान की बात करते हो आप, मनुस्मृति या बाबा साहब का संविधान

अभ्यर्थी - बाबा साहब का भारतीय संविधान

अधिकारी - मान लो ये नौकरी आपको दी, तो ये बताओ, इस खुशी में आप घर जाकर क्या करोगे

अभ्यर्थी - घर जाकर परिवार के साथ मंदिर  देवी देवताओं की पूजा करने जाऊगा, और पहली तनख्याह से देवी मइया का चोला चढ़ाऊँगा

अधिकारी - अच्छा !! नौकरी तो बाबा साहब के संविधान से चाहिए, और अहसान मनु प्रदत्त देवताओं को चुकाओगे

अधिकारी - वाह ! पाखन्डी, चल हट,,, चलो अगले को बुलाओ

कभी हल न होने वाली पहेली???

एक बार तथागत बुद्ध से एक विद्वान पंडित ने पूछा पंडित- "आप सब लोगो को ये बताते है कि आत्मा नहीं, स्वर्ग नहीं, पुनर्जन्म नहीं। क्या यह सत्य है?
बुद्ध- "आपको ये किसने बताया के मैंने ऐसा कहा?
पंडित- "नहीं ऐसा किसी ने बताया नहीं।
बुद्ध - "फिर मैंने ऐसे कहा ये बताने वाले व्यक्ति को आप जानते हो??पंडित- "नहीं।
बुद्ध- "मुझे ऐसा कहते हुए आपने कभी सुना है?
पंडित- "नहीं तथागत, पर लोगो की चर्चा सुनके ऐसा लगा। अगर ऐसा नहीं है तो आप क्या कहते है?
बुद्ध- "मैं कहता हूँ  कि मनुष्य को वास्तविक सत्य स्वीकारना चाहिए।पंडित- "मैं समझा नहीं तथागत, कृपया सरलता में बताइये।
बुद्ध- "मनुष्य की पांच बाह्यज्ञानेंद्रिय है। जिसकी मदद से वह सत्य को समझ सकता है।
"1)आँखे- मनुष्य आँखों से देखता है।
2)कान- मनुष्य कानो से सुनता है।

3)नाक- मनुष्य नाक से श्वास लेता है।
4)जिव्हा- मनुष्य जिव्हा से स्वाद लेता है।
5)त्वचा- मनुष्य त्वचा से स्पर्श महसूस करता है।
इन पांच ज्ञानेन्द्रियों में से दो या तीन ज्ञानेन्द्रियों की मदद से मनुष्य सत्य जान सकता है।
पंडित- "कैसे तथागत?
बुद्ध- "आँखों से पानी देख सकते है, पर वह ठण्डा है या गर्म है ये जानने के लिए त्वचा की मदद लेनी पड़ती  है, वह मीठा है या नमकीन ये जानने के लिए जिव्हा की मदद लेनी पड़ती है।
पंडित- "फिर भगवान है या नहीं इस सत्य को कैसे जानेंगे तथागत?

बुद्ध- "आप वायु को देख सकते है?पंडित- "नहीं तथागत।
बुद्ध- "इसका मतलब वायु नहीं है ऐसा होता है क्या?
पंडित- "नहीं तथागत।
बुद्ध- "वायु दिखती नहीं फिर भी हम उसका अस्तित्व नकार नहीं सकते, क्योंकि हम वायु  को ही हम साँस के द्वारा अंदर लेते है और बाहर  निकालते है। जब वायु का झोंका आता है तब पेड़-पत्ते हिलते है, ये हम देखते है और महसूस करते है।अब आप बताओ भगवान हमें पांच ज्ञानेन्द्रियों से महसूस होता है?
पंडित- "नहीं तथागत।
बुद्ध- "आपके माता पिता ने देखा है, ऐसे उन्होंने आपको बताया है?
पंडित- "नहीं तथागत।
बुद्ध- "फिर परिवार के किसी पुर्वज ने देखा है, ऐसा आपने सुना है?
पंडित- "नहीं तथागत।
बुद्ध- "मैं यही कहता हूँ कि जिसे आजतक किसी ने देखा नहीं, जिसे हमारी ज्ञानेन्द्रियों से जान नहीं सकते, वह सत्य नहीं है इसलिए उसके बारे में सोचना व्यर्थ है।
पंडित- "वह ठीक है तथागत, पर हम जिन्दा है इसका मतलब हमारे अंदर आत्मा है, ये आप मानते है या नहीं?बुद्ध- "मुझे बताइये, मनुष्य मरता है, मतलब क्या होता है?
पंडित- "आत्मा शरीर के बाहर निकल जाती है, तब मनुष्य मर जाता है।
बुद्ध- "मतलब आत्मा नहीं मरती है?पंडित- "नहीं तथागत, आत्मा अमर है।
बुद्ध- "आप कहते है आत्मा कभी मरती नहीं, आत्मा अमर है। तो ये बताइये आत्मा शरीर छोड़ती है या शरीर आत्मा को??
पंडित- "आत्मा शरीर को छोड़ती है तथागत।
बुद्ध- "आत्मा शरीर क्यों छोड़ती है?पंडित- "जीवन ख़त्म होने के बाद छोड़ती है।
बुद्ध- "अगर ऐसा है तो मनुष्य कभी मरना नहीं चाहिए। दुर्घटना, बीमारी, घाव लगने के बाद भी बिना उपचार के जीना चाहिए। बिना आत्मा की मर्ज़ी के मनुष्य नहीं मर सकता।
पंडित- "आप सही कह रहे है तथागत। पर मनुष्य में प्राण है, उसे आप क्या कहेंगे?
बुद्ध- "आप दीपक जलाते है?
पंडित- "हाँ तथागत।
बुद्ध- "दीपक यानी एक छोटा दिया, उसमे तेल, तेल में बाती और उसे जलाने के लिए अग्नि चाहिए, बराबर?
पंडित- "हा तथागत।
बुद्ध- "फिर मुझे बताइये बाती कब बुझती है?
पंडित- "तेल ख़त्म होने के बाद दीपक बुझता है तथागत।
बुद्ध- "और?
पंडित- "तेल है पर बाती ख़त्म हो जाती है तब दीपक बुझता है तथागत।
बुद्ध- "इसके साथ तेज वायु के प्रवाह से, बाती पर पानी डालने से, या दिया टूट जाने पर भी दीपक बुझ सकता है। अब मनुष्य शरीर भी एक दीपक समझ लेते है, और प्राण मतलब अग्नि यानि ऊर्जा। सजीवों का देह चार तत्वों से बना है।
1) पृथ्वी- घनरूप पदार्थ यानि मिटटी
2) आप- द्रवरूप पदार्थ यानि पानी, स्निग्ध और तेल
3) वायु- अनेक प्रकार की हवा का मिश्रण
4) तेज- ऊर्जा, ताप, उष्णता         इसमें से एक पदार्थ अलग कर देंगे,  ऊर्जा और ताप का निर्माण होना रुक जायेगा, मनुष्य निष्क्रिय हो जायेगा। इसे ही मनुष्य की मृत्यु कहा जाता है।         इसलिये आत्मा भी भगवान की तरह अस्तित्वहीन है।यह सब चर्चा व्यर्थ है। इससे धम्म का समय व्यर्थ हो जाता है।
पंडित- "जी तथागत, फिर धम्म क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
बुद्ध- "धम्म का मतलब अँधेरे से प्रकाश की और ले जाने वाला मार्ग है। धम्म मनुष्यो का उद्देश्य मनुष्य के जन्म के बाद मृत्यु तक कैसे जीवन जीना है इसका मार्गदर्शन करना है। कोनसे कार्य करने से कोनसे परिणाम होंगे, और मानव जीवन किस तरह से सुखमय और दुःखमुक्त हो सकता है इसका मार्गदर्शन धम्म मनुष्य करते है।
पंडित- "धन्यवाद् तथागत।
बुद्ध- "भवतु सब्ब मंगलम्"

सोमवार, 2 मई 2016

क्यों जाते हो काम धन्धा करने ।

जो लोग यह मानते हैं कि ईश्वर की पूजा-पाठ करने से शान्ति मिलती है, धनदौलत मिलती है और बिगङे काम बन जाते हैं ।  मेरा उन अन्धभक्तों से निवेदन है कि जब उनके दस बीस मिनट की पूजा पाठ करने से ही सारे कार्य सफल होजाते है, शांति मिलती है तो पूजा के टाइम को दुगना , तिगुना क्यों नहीं कर देते, ताकि आपको दुगना तिगुना लाभ , धनदौलत व शान्ति मिल सके । मैं  तो सलाह दूंगा कि आप लोग अपना कामधन्धा व नौकरी छोङकर पूरे दिन कम से कम 8 घन्टे सुबह से शाम तक पूजा-पाठ कीजिये । ऐसा करने से भगवान जल्दी खुश होगा और आपको शान्ति,  तरक्की व धनदौलत घर बैठे ही मिल जायेगी ।   **** **** ****   भगवान से पंगा लेने वाले नास्तिकों को तो मेहनत करके ही खाना पङेगा । लेकिन आस्तिकों आप क्यों मूर्ख बन रहे हो । क्यों जाते हो नौकरी या मजदूरी करने इतनी ठन्ड में ।  **सभी आस्तिक  अपने घरों में  बैठ कर फुल टाइम पूजा-पाठ. करेंगें तो सर्दी भी कुछ हो जायेगी  ।  जय भीम जय मूल निवासी

तो फिर दिन भर घर में बैठकर ॐॐॐॐॐ का जाप करते रहिये, क्यों जाते हो काम धन्धा करने ।

बच्चे पैदा करने के अजीबो गरीब तरीके

जानिए बच्चों को पैदा करवाने की अजीबोगरीब Technology,  जो संसार में किसी देश में नहीं पायी जाती

ब्रह्मा ने ब्राह्मण को अपने मुँह से पैदा किया
छत्रिय को भुजाओ से
वैश्य को जाँघो से और
शुद्र को अपने पैरों से

राम लक्षमण भरत शत्रुघ्न उनकी माताओ के द्वारा खीर खाने से पैदा हुए

राजा जनक का एक नग्न स्त्री को देखकर वीर्य टपक गया जो धरती में गिरा अगले दिन सीता एक बलीहारे के खेत में पायी गयी

हनुमान के पसीने से एक मादा मगरमच्छ pregnant हो गयी और उसने मगरध्वज को जनम दिया

हनुमान की को पवन ने हनुमान की माता अंजनी को गर्भवती किया हनुमान हवा में पैदा हो गए

कमल से ब्रह्मा पैदा हुए
फिर ब्रह्मा ने अपनी पार्शव ( पसलिया ) रगड़ी तो दाई पसलियों से विष्णु और बाई से शिव पैदा किया

इसी कड़ी में शिव ने अपने माथे का पसीना पोछकर जमीन की तरफ झटका तो विष्णु और अपनी जाँघ रगड़ी तो ब्रह्मा पैदा हुए

पार्वती ने मिट्टी से गणेश की निर्माण किया
विष्णु की नाक से सूअर का जन्म हुआ
पांडवो की माता जंगल में गयी तो पाँच पांडवो का जन्म हुआ

असुरों के अतिक्रमण की वजह से त्रिदेवों ब्रह्मा विष्णु महेश की भौहे तन गयी और तीनो देवों के मुख से एक तेज निकला जो एक हो गया और वैष्णवी (दुर्गा ) का जन्म हुआ ???

आखिर ये है क्या ? ये क्या संस्कृति है ?? ऐसी गप्प टल्लों को क्यों थोपा गया ??
मकसद साफ था केवल इन गप्पों को लिखने वाला श्रेष्ठ था बाकि सब मानसिक गुलाम।

लेकिन अब तो बाबा साहेब की ऐसी अनुकम्पा हुई है कि गप्पी बेकार है बाकि सभी आज़ाद हैं।

" "जागो बहुजन जागो" जिन पाखंडियों की पाखंडी व्यवस्था ने तुम्हें सदियों तक जानवर बना रखा,
धिक्कार है तुम पर अगर ऐसी गंदी व्यवस्था को आज भी मान रहे हो तो।पढ़े लिखे होने का परिचय दीजिये ।

गर्व से कहेते की हम हिंदू हैं, क्योंकि??

1- सती प्रथा सिर्फ़ हमारे यहाँ होती थी, बच्चे चाहे भीख माँगे ये कोठे पर पलें, पर पत्नी को पति के साथ ही जलना होता था I
2- जन्म से छोटा बड़ा सिर्फ़ हिंदू धर्म मे तय होता है I
3- आप पढ़ेंगे या नाली साफ करेंगे, ये भी जन्म से तय होता आया I
4- आप इज़्ज़तदार हैं या बीज़्ज़ती बर्दाश्त करने की मशीन, ये भी जन्म से हिंदू तय करता है I
5- आप क्या करेंगे, ये भी हिंदू धर्म जन्म से तय कर देता है I
6- अगर आप पुजारी हैं तो मज़े ही मज़े, दलितों की कन्याओं को पसंद करके उन्हे मंदिर मे देवदासी के नाम पर रखकर उनका यौन शोषण हिंदू के अलावा कौन कर सकता है?
7- दहेज जैसा महान कार्य हमारे धर्म मे बड़ी सादगी से होता है I
8- हम महिला की पत्थर की मूर्ति पूजते हैं, पर किस देश मे 10 साल मे 5 करोड़ कन्याओं की भ्रूण हत्या हो सकती है? जी हाँ, हिंदुत्व मे!!
9- जातिप्रथा हमारी सबसे बड़ी खोज है I
10- बाल विवाह तो हमारी शान हैं I
11- अमीरी-ग़रीबी भी हमारे यहाँ जाति से ही होती है भाई साहब!!
12- ज़मींदार भी यहाँ जाति के आधार पर होते थे I
13- हमने बहुत सी खोज की, पर उनका कोई उपयोग समाज के लिए नहीं किया I
14- हमने जैसे लोगों को वेद पढ़ने से रोका, वैसा कोई कर सकता है? इसलिए हिंदू महान हैं?
15- हम तो बलात्कार भी करते हैं और शिकायत करने वाले को उल्टा टंगवा देते हैं, सिर्फ़ तालिबान ही हमारी टक्कर का हो सकता है...
16- हमने दलितों को स्कूलों मे नहीं घुसने दिया, क्या कोई धर्म हमारी बराबरी कर सकता हैं?
बहुत कुछ है मेरे पास तुम्हारी धज्जिया उड़ाने को, बस अभी इतना हीI हिंदू धर्म महान है, क्योंकि यहाँ:
-बच्चा हो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ I
–नाम रखो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ I
–गृह प्रवेश करो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ I
–पाठ करवाओ तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ I
–कथा करवाओ तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ I
–मंदिर जाओ तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ I
–शादी हो तो ब्राह्मण को पैसे खिलाओ I
–कोई मर गया हो तो भी ब्राह्मण को पैसे खिलाओ!! ब्राह्मण क्या तेरे घर आता है पैसे माँगने? नहीं भाई, घर आना पड़ा तो लूट काए की, उन्होने तो ऐसा समाज रचा है की अगर उसे ना बुलाओ तो तुम्हारे काम ही समाज मे अवैध हैं!!
हिंदू धर्म महान है क्योंकि यहाँ धर्म के नाम पर लूटने की-
-निर्मल बाबा को छूट है I
-असाराम बापू को छूट है I
–सुधांशु महाराज को छूट है I
–दाति महाराज को छूट है I
–इच्छधारी बाबा को छूट है I
और कितने ही बाबा धर्म के नाम पर दुकान खोल लो, सबको छूट है... हिंदू धर्म महान है क्योंकि इसकी संस्था संघ, अँधा है, वो सिर्फ़ धर्मांतरण पर बोलता है.. हिंदू होते हुए आप जो मर्ज़ी अधर्म करो, सबकी छूट है I आप भी उसी धर्म की नैया मे सवार हो, लूटो तुम भी बाबा बन जाओ

आयूर्वेद के नाम पर लोगो को ठग रहे है ।

ब्राह्मण द्वारा लोगो को बेवकूफ बनाने एक और नया तरीका......।।।।
दोस्तो आल कल आप सभी लोगो ने टि.वी. पर देखा होगा की कैसे ये ब्राह्मण आयूर्वेद के नाम पर लोगो को ठग रहे है ।।।
आपने देखा होगा कि टिवी पर रोजाना फालतु उत्पादो का प्रचार किया जाता है जिसमे वेदो और हिमालय की दुर्लभ जड़ी बुटीयो का हवाला दिया जाता है, और उसके प्रचार लिये किसी माडल या फिल्मी सितारे के साथ एक लम्बी दाढी वाले पण्डीत रुपी वैद को भी दिखाय जाता है....

दोस्तो ये उत्पाद निम्न बिमारीयो के लिये होते है जिनका वास्तव मे कोई उपचार नही होता है. जैसे की...

- जोडो का दर्द जिससे सारी दुनीया परेशान है..

- बालो का झड़ना :- अगर इस बिमारी का इलाज होता तो अरबपती मशहूर क्रिकेटर विरेन्दर सेहवाग आज गंजा ना होता

- हाईट (कद्) बड़ाना :- अगर किसी दवाई से कद बड़ सकता तो चाईना के लोगो की हाईट इतनी कम ना होती.. ।।।।

- त्वचा का काला पन :- अगर किसी दवाई से गोरापन प्राप्त किया जा सकता तो पुरा मद्रास कशमीर मे बदल जाता, और अफ्रीका के लोग इतने काले ना होते...।।।

- मोटापा :- अगर किसी दवाइ के सेवन से वजन घटाया ज सकता तो दुनीया मे कोई भी मोटा नही होता और सारे जिम बंद हो जाते..।।।।।।

- नशामुक्ती :- आजकल नशामुक्ती के नाम पर अनुप सोनी और आलोक नाथ ये दोनो खुब लोगो को उल्लू बना सये है, अरे भाइ शराब तो भोलेनाथ का प्रशाद है, अगर नशामुक्ती के लिये कोइ दवाइ होती तो शंकर भगवान खुद भी नशेड़ी नही होते.. ।।।

दोस्तो और भी कई बिमारीयो के लिये एसे बहुत सरे व्यर्थ उत्पाद है, इनमे से कइ बिमारीयो एसी है जो उम्र के साथ प्राक्रतीक रुप से आती है, और कुछ का ईलाज मनुष्य के दर्डसंकल्प और इच्छा शक्ति से हि संभव है, ।।।।।।।।

तो मेरा आप सभी से निवेदन है कि इन लोगो की फालतु बातो और छलावो मे आकर अपना समय और पैसा बर्बाद ना करे...।।।।।।।।

सौ - संजीव बौद्ध

राजनैतिक लुच्चों-लफंगों से देश को छुटकारा कब मिलेगा?

ओशो से किसी ने पूछा,
"राजनैतिक लुच्चों-लफंगों से देश को छुटकारा कब मिलेगा?" 
ओशो ने जवाब दिया, "बहुत कठिन है..
क्योंकि प्रश्न राजनेताओं से  छुटकारे का नही है,  प्रश्न तो तुम्हारे अज्ञान के मिटने का है.  
तुम जब तक अज्ञानी हो,
कोई न कोई तुम्हारा शोषण करता रहेगा.
कोई न कोई तुम्हें चूसेगा.
पंडित चूसेंगे, पुरोहित चूसेंगे,
राजनेता चूसेंगे.
तुम जब तक जाग्रत नही होगे,
तब तक लुटोगे ही. फिर किसने लूटा,
क्या फर्क पड़ता है ? 
लुटेरों के नाम बदलते रहेंगे और तुम लुटते रहोगे.  
यह मत पूछो कि राजनीतिक लुच्चों-लफंगों से देश को छुटकारा कब मिलेगा.
यह प्रश्न अर्थहीन है. 
यह पूछो कि मै कब इतना जाग सकूँगा कि झूठ को झूठ की तरह पहचान सकूँ
और जब तक सारी मनुष्य जाति झूठ को झूठ की भाँति नही पहचानती,
तब तक छुटकारे का कोई उपाय नही है.।

गुरुवार, 10 मार्च 2016

बाबा साहब के संदेश

""राजनीति में हिस्सा नहीं लेने से अयोग्य व्यक्ति शासक बन कर आप पर शासन करेंगा""
   ~बाबा साहब
""अपने वोट की कीमत समझो, हमें बिकने वाला समाज नहीं बनाना है""
   ~बाबा साहब
""मैनें रानी के पेट की नसबन्धी तुम्हे वोट का अधिकार दिलवा कर कर दी है अब आप खुद अपने वोट से राजा बन सकते हो या बना सकते हो""
      ~बाबा साहब
""मूलनिवासीओ  ! लिख दो अपनी दीवारों पर कि हमें इस देश की शासक जमात बनना है""क्योंकि शासन करने वाले अधिकार मांगने वाले नहीं देने वाले होते हैं।
     ~बाबा साहब
""मेरे समाज के बहादुर सिपाहियो में ये कारवां यहां तक बड़ी कठिनाइयों से लाया हुं जहां आज ये दिख रहा है ये निरन्तर आगे ही बढता रहना चाहिये अगर आगे नहीं बढा सको तो किसी भी सुरत में पीछे की ओर नहीं मुड़ना चाहिये"""
      ~बाबा साहब
""शिक्षा उस शेरनी का दूध है जो पियेगा वो दहाड़ेगा इसीलिए मैं तुम्हे सफल बनने का मुलमंत्र देता हुं:-""शिक्षत बनों" "संगठित रहों" "संघर्ष करों""
        ~बाबा साहब
मेरे समाज के लोगों तुम सिर्फ धार्मिक पाखण्ड को ढो रहे हो इसे छोड़ दो व भारतीय संसद में जाओ तुम्हे शासक वर्ग बनाना मेरे जीवन का अंतिम उद्देश्य है ये सपना आपको साकार करना होगा""
     ~बाबा साहब
""मैंने तुम्हें आजाद करवाने के लिये मेरा सारा जीवन समर्पित कर दिया है और अपने परिवार को भी कुर्बान कर दिया मेरी इस कुर्बानी को व्यर्थ मत जाने देना आपको आपसी मतभेद भुलाकर संगठित होना है और अपने अधिकारों के लिये संघर्ष करना होगा""
           ~बाबा साहब~

पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यों???

मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया -

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1. चूहा अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(गणेश की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है।

2.सांप अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शंकर का कंठहार मानकर)

लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता  है और जबतक मार न दे, चैन नही लेता।

3.बैल अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शंकर की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है ।

4.कुत्ता अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(शनिदेव  की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है।

5. शेर अगर पत्थर का तो उसको पूजता है।(दुर्गा  की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग   खड़ा होता है।

हे मानव!

पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यों?????

ये कैसा दोहरा मापदंड है तेरा?????

मंगलवार, 8 मार्च 2016

तोते की आजादी! ☘

लोगो के जुलूसो द्वारा लगाये  गये नारो को पिंजरे मे बन्द तोता अक्सर सुनता रहता था  लगातार सुन सुन कर वह तोता भी इन्कलाबी नारे लगाने  लगा  वह अक्सर ही इन नारों का उच्चारण करता रहता था

इन्कलाब जिन्दाबाद

लेकर रहेगे आजादी

आजादी आजादी

आजादी आजादी

अब यह उसका दैनिक क्रम हो चुका  था

उस तोते की करूणा भरी पुकार को सुनकर किसी भले व्यक्ति  ने उस तोते  को आजाद करने के लिए पिन्जरे का दरवाजा  खोल दिया
परन्तु आश्चर्य वह तोता बाहर नही निकला
जब उस व्यक्ति ने जबर्दस्ती उसको बाहर निकालने की कोशिश की तो उसने उस व्यक्ति को चौंच से चोट पहुचा दी

उस व्यक्ति ने परवाह ना करते हुए उस तोते को पिन्जरे से बाहर खीच कर खुले आकाश मे छोड दिया
पर. आश्चर्यजनक स्थिति तब देखी गई।

जब अगले दिन वह तोता पुन: पिन्जरे मे आ बैठा और आजादी आजादी की रट. जारी थी

यही स्थिति हिन्दू धर्म मे दलित. समाज की है

जो इस धर्म से मनुवाद ब्राह्मण वाद से आजादी की रट तो लगाये हुए है

परन्तु बाहर का रास्ता खुला होने के बाद भी मुक्त नही हो पा रहा है
और जिन्होने मुक्त होने की ठान ली वो मुक्त हो गये 

वे मुक्ति की बात ज्यादा करते नही है जो करना था वह कर दिया ।

जब संविधान बनकर तैयार हुआ.

तब बाबा साहब ने कहा कि अब तुम्हें राधा कृष्ण,राम सीता,शंकर महादेव और देवी देवता की जरुरत नहीं पड़ेगी.

तुम्हारी मुक्ति .... तरक्की के दरवाजे जो 5000 साल तक बंद थे  वो कोई देवी देवता भगवान खोलने नहीँ आया
मैँ उन तरक्की के दरवाजों को खोलकर उन गुलामी की बेडिओं को"" संविधान""से काट देता हूँ .✒

तुम उसका सही उपयोग करके अच्छी शिक्षा प्राप्त करना और बुलंदियोँ को छूना.

-डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर

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