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सोमवार, 2 मई 2016

बच्चे पैदा करने के अजीबो गरीब तरीके

जानिए बच्चों को पैदा करवाने की अजीबोगरीब Technology,  जो संसार में किसी देश में नहीं पायी जाती

ब्रह्मा ने ब्राह्मण को अपने मुँह से पैदा किया
छत्रिय को भुजाओ से
वैश्य को जाँघो से और
शुद्र को अपने पैरों से

राम लक्षमण भरत शत्रुघ्न उनकी माताओ के द्वारा खीर खाने से पैदा हुए

राजा जनक का एक नग्न स्त्री को देखकर वीर्य टपक गया जो धरती में गिरा अगले दिन सीता एक बलीहारे के खेत में पायी गयी

हनुमान के पसीने से एक मादा मगरमच्छ pregnant हो गयी और उसने मगरध्वज को जनम दिया

हनुमान की को पवन ने हनुमान की माता अंजनी को गर्भवती किया हनुमान हवा में पैदा हो गए

कमल से ब्रह्मा पैदा हुए
फिर ब्रह्मा ने अपनी पार्शव ( पसलिया ) रगड़ी तो दाई पसलियों से विष्णु और बाई से शिव पैदा किया

इसी कड़ी में शिव ने अपने माथे का पसीना पोछकर जमीन की तरफ झटका तो विष्णु और अपनी जाँघ रगड़ी तो ब्रह्मा पैदा हुए

पार्वती ने मिट्टी से गणेश की निर्माण किया
विष्णु की नाक से सूअर का जन्म हुआ
पांडवो की माता जंगल में गयी तो पाँच पांडवो का जन्म हुआ

असुरों के अतिक्रमण की वजह से त्रिदेवों ब्रह्मा विष्णु महेश की भौहे तन गयी और तीनो देवों के मुख से एक तेज निकला जो एक हो गया और वैष्णवी (दुर्गा ) का जन्म हुआ ???

आखिर ये है क्या ? ये क्या संस्कृति है ?? ऐसी गप्प टल्लों को क्यों थोपा गया ??
मकसद साफ था केवल इन गप्पों को लिखने वाला श्रेष्ठ था बाकि सब मानसिक गुलाम।

लेकिन अब तो बाबा साहेब की ऐसी अनुकम्पा हुई है कि गप्पी बेकार है बाकि सभी आज़ाद हैं।

" "जागो बहुजन जागो" जिन पाखंडियों की पाखंडी व्यवस्था ने तुम्हें सदियों तक जानवर बना रखा,
धिक्कार है तुम पर अगर ऐसी गंदी व्यवस्था को आज भी मान रहे हो तो।पढ़े लिखे होने का परिचय दीजिये ।

रविवार, 3 जनवरी 2016

जानवरों के कुछ और मजेदार तथ्य

जानवरों के कुछ और मजेदार तथ्य
जानवरों की आदते अजीब होती हैं। कई बार तो हमें
जानवरों के बारे में ऐसे तथ्य मालूम पड़ते हैं, ‍जो हमें
चौंका देते हैं। जानवरों के बारे में ऐसी कुछ रोचक
जानकारियां हम आप तक लाए हैं।
* हाथी अपनी सूंड में 5 लीटर तक पानी रख
सकता है।
* अफ्रीकी हाथी के मुंह में केवल चार ही दांत
होते हैं।
* मधुमक्खी एक बार में 20 लाख फूलों का रस
पी सकती है। और उसके बाद मात्र 45
किलो ही शहद बनाती है।
* व्हेल मछली उलटी दिशा में नहीं तैर सकती।
* समुद्र मे गहरा गोता लगाने के लिए मगरमच्छ
कभी-कभी भारी पत्थर भी निगल लेता है।
* शेर को भले ही जंगल का राजा कहा जाता है,
लेकिन वह गेंडे और हाथी से
कभी भी लड़ना नहीं चाहता।
* टिड्डे का खून सफेद रंग का होता है।
* कुत्ते की श्रवणशक्ति यानी सुनने
की क्षमता मनुष्य से 9 गुना अधिक तेज होती है।
* हिपोपोटोमास (दरियाई घोडे़) उन बहुत कम
जानवरों में से एक है, जो पानी में बच्चों को जन्म देते
हैं।
* ब्लू व्हेल की हृदय एक मिनट में मात्र 9 बार
ही धड़कता है।
* घोडे खडे़-खडे़ ही नींद लेते हैं।
* बंदर हमेशा केला छीलकर खाते हैं।
किसी भी नस्ल का बंदर छिलके सहित
केला नहीं खाता।

लेह-लद्दाख का मैग्नेटिक हिल

लेह-लद्दाख के क्षेत्र में स्थित इस जगह को 'ग्रैविटी हिल' भी कहा जाता है। लेह-कारगिल, श्रीनगर नेशनल हाईवे पर स्थित यह जगह लेह से 50 किमी दूर है
और समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
मैग्नेटिक हिल लेह आने वाले पर्यटकों के बीच
काफी मशहूर है।
इस पहाड़ी की खासियत है कि यहां से गुजरने वाली हर कार खुद-ब-खुद रास्ते पर जमी रहती है।
सामान्य भाषा में कहें, तो आमतौर पर पहाड़ी रास्तों में हम गाड़ी गियर में खड़ी करते है,
लेकिन यहां अगर आप अपनी गाड़ी न्यूट्रल में भी खड़ा कर दें, तो भी गाड़ी घाटी से नीचे नहीं
फिसलेगी।
हालांकि यह लोगों का भ्रम है कि पहाड़ी के ऊपर गाड़ियां घूमने लगती हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसके पीछे जो कारण छिपा है, उसके मुताबिक, यह विशुद्ध रूप से 'ऑप्टिकल इफेक्ट' के चलते होता है,
जो पहाड़ी की वास्तविक और विशिष्ट बनावट के चलते उत्पन्न होता है।

आँखों में है X-Ray विज़न

Natasha - एक रसियन लड़की, जिसकी आँखों में है X-Ray विज़न
Natasha Demkina, 17 साल कि एक रसियन लड़की है इसकी खासियत यह है कि इसकी आँखों में X-Ray विज़न है।
यह अपनी आँखों से किसी के भी शरीर के अंदर देख सकती है और बिमारियों को पहचान सकती है।
Natasha अब तक लंदन, न्यूयॉर्क और जापान के डाकटरों और वैज्ञानिकों के सामने अपनी आँखों का कमाल दिखा चुकी है और तीनों ही जगह उसके इस अदभुत गुण को सहमति मिली है
Natasha Demkina का कहना है कि वो जो देखती है उसे समझने में उसे कुछ टाइम लगता है पर वो एकदम सही बीमारी पहचानती है
यहाँ तक कि कभी कभी तो वो बहुत ही शुरूआती अवस्था में बिमारी को पहचान लेती है जब कि डाक्टर्स उसे नहीं पहचान पाते है।
जापनी डाक्टर्स के सामने उसने एक मरीज़ के कृत्रिम घुटने को पहचाना, एक मरीज़ कि रीढ़ कि हड्डी कि विकृति को पहचाना, एक और मरीज़ के शारीर में कृत्रिम अंगों को पहचाना, एक औरत कि प्रेग्नेंसी कि प्रारंभिक अवस्था को पहचाना, एक कुत्ते के पैर में लगे उपकरण को पहचाना।
लेकिन डाक्टर्स को हैरानी तब हुई जब उसने कहा कि वो केवल फ़ोटो देखकर भी बीमारी पहचान सकती है।
जब डाक्टर्स ने उसके सामने एक पेशेंट कि फ़ोटो रखी तो उसने कहा कि इसे लीवर केंसर है जो कि उसे था।
Natasha Demkina का कहना है कि उसमे X-Ray विज़न बचपन से नहीं है।
उसके अनुसार 10 साल तक तो वो एक सामान्य बच्ची ही थी ,पर उसके बाद जब वह एक दिन अपनी माँ को देख रही थी तो उसे माँ के शरीरके अंदर के सारे अंग दिखाई देने लगे। अपनी इस X-Ray विज़न को वो मेडिकल विज़न कहती है और उसके अनुसार समय के साथ साथ उसकी यह मेडिकल विज़न और तेज़ हो रही है।
सौ : www.ajabgjab.com

यह जंगल नही एक पेड़ हैं

यह जंगल नहीं एक पेड़ है
दुनिया का सबसे चोडा पेड़ 144400 वर्ग मीटर में फेला है।
कोलकाता के पास The Acharya Jagadish Chandra Bose Botanical Garden में लगा ये पेड़ 250 साल से अधिक समय में इतना विशाल हो पाया है।
दूर से देखने में ये पेड़ एक जंगल की तरह नज़र आता है।
दरअसल, बरगद के पेड़ की शाखाओ से जटाए पानी की तलाश में निचे जमीन की और बढती है। वे बाद में जड़ के रूप में पेड़ को पानी और सहारा देने लगती है। ये सिलसिला चलता जाता है।
Photograph by: BiswarupGangulyajabgjab.com

शनिवार, 2 जनवरी 2016

Amazing Lake

एक झील जिसमे जो गया वो बन गया पत्थर
Amazing Lake
आपने राजा मिडास की कहानी तो जरुर सुनी
होगी जो जिस चीज़ को भी छुता है वो सोने की
बन जाती है लेकिन क्या आपने ऐसी झील के बारे में
सुना है जिसके पानी को जो भी छुता है वो पत्थर
बन जाता है ? आज हम आपको एक ऐसी ही झील के
बारे में बता रहे है यह है यह है उत्तरी तंजानिया की
नेट्रान लेक।
फोटोग्राफर निक ब्रांड्ट जब उत्तरी तंजानिया की
नेट्रान लेक की तटरेखा पर पहुंचे तो वहां के दृश्य ने
उन्हें चौंका दिया। झील के किनारे जगह-जगह पशु-
पक्षियों के स्टैच्यू नजर आए। वे स्टैच्यू असली मृत
पक्षियों के थे। दरअसल झील के पानी में जाने वाले
जानवर और पशु-पक्षी कुछ ही देर में कैल्सिफाइड
होकर पत्थर बन जाते हैं।
एक झील जिसमे दबा है अरबो का खजाना
Brandt अपनी नई फोटो बुक 'Across the Ravaged
Land' में लिखते है की "कोई भी निश्चित रूप से नहीं
जानता है की ये कैसे मरे पर लगता है की लेक की
अत्यधिक रिफ्लेक्टिव नेचर ने उन्हें दिग्भ्रमित किया
फलस्वरूप वे सब पानी में गिर गए। " वो आगे लिखते है
की " पानी में नमक और सोडा की मात्रा बहुत ही
जयादा है, इतनी जयादा की इसने मेरी कोडक
फिल्म बॉक्स की स्याही को कुछ ही सेकंड में जमा
दिया। पानी में सोडा और नमक की ज्यादा
मात्रा इन पक्षियों के मृत शरीर को सुरक्षित रखती
है।"
Son Doong- विशव की सबसे बड़ी गुफा
इन पक्षियों के फोटो का संकलन ब्रांड्ट ने अपनी नई
किताब 'Across the Ravaged Land' में किया है।
यह किताब उस फोटोग्राफी डाक्यूमेंट का तीसरा
वॉल्यूम है, जिसे निक ने पूर्वी अफ्रीका में जानवरों
के गायब होने पर लिखा है।
पानी में अल्कलाइन का स्तर पीएच9 से पीएच 10.5
है, यानी अमोनिया जितना अल्कलाइन। लेक का
तापमान भी 60 डिग्री तक पहुंच जाता है। पानी में
वह तत्व भी पाया गया जो ज्वालामुखी की राख
में होता है। इस तत्व का प्रयोग मिस्रवासी ममियों
को सुरक्षित करने के लिए रखते थे।
The Maeklong Food Market- रेलवे ट्रैक पर बसा
मार्केट
वो अपनी किताब में आगे लिखते है " सारे प्राणी
calcification के कारण चट्टान की तरह मजबूत हो चुके
थे इसलिए बेहतर फोटो लेने के लिए हम उनमे किसी
भी तरह का बदलाव नहीं कर सकते थे इसलिए फोटो
लेने के लिए हमने उन्हें वैसी ही अवस्था में पेड़ो और
चट्टानों पर रख दिया।"

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

दिल्ली का लौह स्तम्भ

विश्वप्रसिद्ध दिल्ली का 'लौह स्तम्भ'-
हमारा भारत कितना अद्भुत है!
कितना ज्ञान बिखरा हुआ है यहाँ प्राचीन धरोहरों के
रूप में ,जिसे हमें समय रहते संभालना है.
दुनिया की प्राचीनतम और
जीवंत सभ्यताओं में से एक है हमारे देश
की सभ्यता.
हमारी प्राचीन धरोहरें बताती
हैं कि हमारा देश अर्थव्यवस्था,स्वास्थ्य
प्रणाली,शिक्षा प्रणाली, कृषि
तकनीकी,खगोल शास्त्र ,विज्ञान , औषधि
और शल्य चिकित्सा आदि सभी क्षेत्रों में बेहद
उन्नत था.
मैगस्थनीज से लेकर फाह्यान, ह्वेनसांग तक
सभी विदेशियों ने भारत की भौतिक समृध्दि
का बखान किया है.
प्राचीन काल में उन्नत तकनीक और विराट
ज्ञान संपदा का एक उदाहरण है अभी तक
'जंगविहिन' दिल्ली का लौह स्तंभ'.इसका सालों से
'जंग विहीन होना ' दुनिया के अब तक के अनसुलझे
रहस्यों मे माना जाता है.
सन २००२ में कानपुर के वैज्ञानिक बालासुब्रमानियम ने अपने
अनुसन्धान में कुछ निष्कर्ष निकाले थे.जैसे कि इस पर
जमी Misawit की परत इसे जंग लगने
से बचाती है .वे इस पर लगातार शोध कर रहे हैं.
माना जाता है कि भारतवासी ईसा से ६०० साल पूर्व से
ही लोहे को गलाने की
तकनीक जानते थे.पश्चिमी देश इस ज्ञान
में १००० से भी अधिक वर्ष पीछे रहे.
इंग्लैण्ड में लोहे की ढलाई का पहला कारखाना सन्
११६१ में खुला था.
बारहवीं शताब्दी के अरबी
विद्वान इदरिसी ने भी लिखा है कि
भारतीय सदा ही लोहे के निर्माण में
सर्वोत्कृष्ट रहे और उनके द्वारा स्थापित मानकों की
बराबरी कर पाना असंभव सा है.विश्वप्रसिद्ध
दिल्ली का 'लौह स्तम्भ'-
स्थान- दिल्ली के महरोली में
कुतुबमीनार परिसर में स्थित है.यह ३५
फीट ऊँचा और ६ हज़ार किलोग्राम है.
किसने और कब बनवाया-
गुप्तकाल (तीसरी शताब्दी से
छठी शताब्दी के मध्य) को भारत का
स्वर्णयुग माना जाता है .
लौह स्तम्भ में लिखे लेख के अनुसार इसे किसी राजा
चन्द्र ने बनवाया था.बनवाने के समय विक्रम सम्वत् का आरम्भ
काल था। इस का यह अर्थ निकला कि उस समय समुद्रगुप्त
की मृत्यु के उपरान्त चन्द्रगुप्त (विक्रम) का
राज्यकाल था.तो बनवाने वाले चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य
द्वितीय ही थे और इस का निर्माण 325
ईसा पूर्व का है.
कैसे यह लोहे का स्तम्भ बनाया गया होगा इसके बारे में अधिक
विवरण आई.आई.टी.प्रोफ.बालासुब्रमनियम से इस
वीडियो में देख सुन सकते हैं.
Click Here
http://youtu.be/MR0dVQcdl5s
कहते हैं कि इस स्तम्भ
को पीछे की ओर दोनों हाथों से छूने पर
मुरादें पूरी हो जाती हैं.परन्तु अब आप
ऐसा प्रयास नहीं कर पाएंगे क्योंकि अब इसके चारों
तरफ लोहे की सुरक्षा जाली है.
चलते चलते एक और बात बताती चलूँ कि बिहार के
जहानाबाद जिले में एक गोलाकार स्तंभ है जिसकी
लम्बाई ५३.५ फीट और व्यास ३.५ फीट
है जो उतर से दक्षिण की ओर आधा
जमीन में तथा आधा जमीन की
सतह पर है.
कुछ पुरातत्वविद इसे ही दिल्ली के लौह
स्तम्भ का सांचा मानते है.

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