शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं हैं

जेएनयू की घटना को जिस तरह से टीवी चैनलों में कवर किया गया है उसे आप अपने अपने दल की पसंद की हिसाब से मत देखिये। उसे आप समाज और संतुलित समझ की प्रक्रिया के हिसाब से देखिये। क्या आप घर में इसी तरह से चिल्ला कर अपनी पत्नी से बात करते हैं। क्या आपके पिता इसी तरह से आपकी मां पर चीखते हैं। क्या आपने अपनी बहनों पर इसी तरह से चीखा है। ऐसा क्यों हैं कि एंकरों का चीखना बिल्कुल ऐसा ही लगता है। प्रवक्ता भी एंकरों की तरह धमका रहे हैं। सवाल कहीं छूट जाता है। जवाब की किसी को परवाह नहीं होती। मारो मारो, पकड़ो पकड़ो की आवाज़ आने लगती है। एक दो बार मैं भी गुस्साया हूं। चीखा हूं और चिल्लाया हूं। रात भर नींद नहीं आई। तनाव से आंखें तनी रही। अक्सर सोचता हूं कि हमारी बिरादरी के लोग कैसे चीख लेते हैं। चिल्ला लेते हैं। अगर चीखने चिल्लाने से जवाबदेही तय होती तो रोज़ प्रधानमंत्री को चीखना चाहिए। रोज़ सेनाध्यक्ष को टीवी पर आकर चीखना चाहिए। हर किसी को हर किसी पर चीखना चाहिए। क्या टीवी को हम इतनी छूट देंगे कि वो हमें बताने की जगह धमकाने लगे। हममें से कुछ को छांट कर भीड़ बनाने लगे और उस भीड़ को ललकारने लगे कि जाओ उसे खींच कर मार दो। वो गद्दार है। देशद्रोही है। एंकर क्या है। जो भीड़ को उकसाता हो, भीड़ बनाता हो वो क्या है। पूरी दुनिया में चीखने वाले एंकरों की पूछ बढ़ती जा रही है। आपको लगता है कि आपके बदले चीख कर वो ठीक कर रहा है। दरअसल वो ठीक नहीं कर रहा है।

कई प्रवक्ता गाली देते हैं। मार देने की बात करते हैं। गोली मार देने की बात करते हैं। ये इसलिए करते हैं कि आप डर जाएं। आप बिना सवाल किये उनसे सहमत हो जाएं। हमारा टीवी अब आए दिन करने लगा है। एंकर रोज़ भाषण झाड़ रहे हैं। जैसे मैं आज झाड़ रहा हूं। वो देशभक्ति के प्रवक्ता हो गए हैं। हर बात को देशभक्ति और गद्दारी के चश्मे से देखा जा रहा है। सैनिकों की शहादत का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है। उनके बलिदान के नाम पर किसी को भी गद्दार ठहराया जा रहा है। इसी देश में जंतर मंतर पर सैनिकों के कपड़े फाड़ दिये गए। उनके मेडल खींचे गए। उन सैनिकों में भी कोई युद्ध में घायल है। किसी ने अपने शरीर का हिस्सा गंवाया है। कौन जाता है उनके आंसू पोंछने।

शहादत सर्वोच्च है लेकिन क्या शहादत का राजनीतिक इस्तेमाल भी सर्वोच्च है। कश्मीर में रोज़ाना भारत विरोधी नारे लगते हैं। आज के इंडियन एक्सप्रेस में किसी पुलिस अधिकारी ने कहा है कि हम रोज़ गिरफ्तार करने लगें तो कितनों को गिरफ्तार करेंगे। बताना चाहिए कि कश्मीर में पिछले एक साल में पीडीपी बीजेपी सरकार ने क्या भारत विरोधी नारे लगाने वालों को गिरफ्तार किया है। हां तो उनकी संख्या क्या है। वहां तो आए दिन कोई पाकिस्तान के झंडे दिखा देता है, कोई आतंकवादी संगठन आईएस के भी।

कश्मीर की समस्या का भारत के अन्य हिस्सों में रह रहे मुसलमानों से क्या लेना देना है। कोई लेना देना नहीं है। कश्मीर की समस्या इस्लाम की समस्या नहीं है। कश्मीर की समस्या की अपनी जटिलता है। उसे सरकारों पर छोड़ देना चाहिए। पीडीपी अफज़ल गुरु को शहीद मानती है। पीडीपी ने अभी तक नहीं कहा कि अफज़ल गुरु वही है जो बीजेपी कहती है यानी आतंकवादी है। इसके बाद भी बीजेपी पीडीपी को अपनी सरकार का मुखिया चुनती है। यह भी दुखद है कि इस बेहतरीन राजनीतिक प्रयोग को जेएनयू में कुछ छात्रों को आतंकवादी बताने के नाम पर कमतर बताया जा रहा है। बीजेपी ने कश्मीर में जो किया वो एक शानदार राजनीतिक प्रयोग है। इतिहास प्रधानमंत्री मोदी को इसके लिए अच्छी जगह देगा। हां उसके लिए बीजेपी ने अपने राजनीतिक सिद्धांतों को कुछ समय के लिए छोड़ा उसे लेकर सवाल होते रहेंगे। अफज़ल गुरु अगर जेएनयू में आतंकवादी है तो श्रीनगर में क्या है। इन सब जटिल मसलों को हम हां या ना कि शक्ल में बहस करेंगे तो तर्कशील समाज नहीं रह जाएंगे। एक भीड़ बन कर रह जाएंगे। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

શું તમે આ ચોર વિશે વાચ્યું? ? ?

રોકડ રકમ રાખી લીધી પણ ઓળખકાર્ડ મોકલી આપ્યું
મોંઘવારી વધી ગઈ હોવાથી પૈસા અને મેટ્રોકાર્ડ રાખી લીધાની કબૂલાત
ન્યૂયોર્ક, તા. 18ન્યૂયોર્કના એક માણસનું વોલેટ બ્રૂકલીનના એક કાર્યક્રમ દરમિયાન ક્યાંક પડી ગયું
હશે કે પછી ચોરે ખીસ્સું કાપી લીધું હતું. આ ઘટનાથી જેનું વોલેટ ખોવાઈ ગયું
હતું એ માણસ પરેશાન થઈ ગયો. તેમાં તેના ઓળખકાર્ડ સહિતના ડોક્યુમેન્ટ્સ અને ક્રેડિટ-ડેબિટ કાર્ટ અને મેટ્રોમાંં
મુસાફરીનું મેટ્રોકાર્ડ પણ હતું. આ બધા જ કાર્ડ ફરીથી બનાવવા તેના માટે મુશ્કેલ હતું. એમાં
ઘણા દિવસ લાગે તેમ હતા. ક્રેડિટ અને ડેબિટ કાર્ટ તો જાણે કે બેંક એકાદ સપ્તાહમાં આપી દે, પણ
ઓળખકાર્ડમાં ઘણા દિવસો લાગે અને બીજા કેટલાક સોંગધનામા સહિતના ડોક્યુમેન્ટ્સ આપવાના થાય તેમ હતા.એ
બધી પ્રોસેસમાં પડ્યો જ હતો કે ત્યાં બીજા દિવસે તેના ઘરે એક કવર આવ્યું. તેમાં એક પત્ર હતો.
એ પત્ર પેલા ચોરનો હતો, જેણે વોલેટ તફડાવ્યું હતું. ચોરે પત્રમાં લખ્યું હતું કે આજકાલ મોંઘવારી ખુબ
વધી ગઈ છે એટલે પૈસા તો પાછા નથી મોકલતો પણ તેનું ઓળખકાર્ડ, ક્રેડિટ-ડેબિટ કાર્ડ પાછા મોકલું
છું. આ કાર્ડ કઢાવતા ઘણી મહેનત પડે છે અને તેનો મારે કોઈ ઉપયોગ પણ નથી એમ તેણે લખ્યું
હતું.તેણે ઉમેર્યું હતું કે પૈસા રાખી લીધા અને વોલેટ ગમી ગયું છે એટલે એ પણ
મોકલવાની ઈચ્છા થતી નથી. મેટ્રોકાર્ડની પણ તેને જરૃર હતી એટલે મેટ્રોના
પ્રવાસ માટે એ કાર્ડ પણ તે રાખી લે છે. ચોરી કરવા છતાં ચોરની આ
સમજદારીની પેલા માણસે સોશ્યલ મીડિયામાં શેર કરી હતી. તેની એ પોસ્ટને
અસંખ્ય લોકોએ શેર કરી હતી અને કમેન્ટ્સમાં ચોરની આ દિલદારી અંગે બધાએ તેને
બિરદાવ્યો હતો!

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