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शुक्रवार, 13 मई 2016

डराया जाता हैँ

एंटीना धारी जवाब दे वरना
पढ़े एवम् विचार करें! यदि न कर सकें तो शांत बैठे।
1) 33कोटी देवताओं में से किसी एक का सम्पूर्ण नाम बतावें।
2) सभी देवताओं ने भारत में ही जन्म क्यों लिया, अन्य किसी देश में क्यों नही?
3) देवताओं के पुष्पक विमान अब कहा गए?जिसमे बैठकर वे हमेशा पृथ्वी पर आते थे,अब क्यों नही?
4) विमान का शोध राईट भाईयो ने किया तो देवताओ ने पेटर्न चोरने का इल्जाम क्यों नही लगाया?
5) काफी देवताओं को पत्नियां भी थी,उसमें से कुछेक को ही बच्चे हुवे!बाकी को क्यों नही?
6) सुनते आये हैँ कि, पुरातन काल से ही देवी-देवता थे! उस वक़्त भारत की लोकसंख्या 10या 20 कोटि होगी,अब लोकसंख्या 120 कोटी पर पहुँच चुकि, देवताओं की संख्या क्यों नही बढ़ि? उन्होंने उस वक्त क्या इस्तेमाल (बच्चे न होने के लिए) किया?या नसबंदी की थी?
7) खंडोबा यदि देवता हैँ और कुत्ता खंडोबा का अवतार हैं, तो कुत्ता काटनेपर लोग इंजेक्शन क्यों लगवाते है, उल्टा लोग देवता ने काटा करके पढ़े क्यों नहीं बांटते?
8) कोई भी देवता या देवी किसी भी इन्सान की पार्श्व भूमि या सत्यता जाने बगैर डायरेक्ट आंग में क्यों आती/याआता हैं?
9) अपने दर्शनो के लिए आने वाले भक्तो की सुरक्षा देवता क्यों नही करते?
10) यदि मुहूर्त, नक्षत्र, या जाती देखकर 36 गुण आदि देखकर शादी करवाते है,तो पति -पत्नी में झगडे तलाक क्यों होते हैं?
11) स्वर्ग या नर्क किसीने देखा हैं क्या? फिर ये हूबहू किताबों में कैसे लिखा है?
12) विदेशो में लोग गणपति आदि देवी देवताओं के चित्र अपने चप्पल ,अंडरवियर इत्यादि जगह पर इस्तमाल करते, उन्हें ये तथाकथित देवी देवता भस्म क्यों नही करते?
12) शंकर ने देव होते हुवे गणपति का सिर कलम किया, परंतु वहीँ सिर उस स्थान पर नहीं बैठा सका? उसके लिए उसने हाथी की बलि क्यों दी ?अच्छा फिर हाथी का सिर इन्सान को कैसे फिट बैठा?
13) पार्वती के मैल से गणपति की रचना हुयी थी,तो क्या पार्वती में प्रजनन क्षमता नही थीं क्या?पार्वती ने कितने दिनों से स्नान नहीं किया था जो उसका इतना मेल निकला?
15) कपड़ो का शोध इन्सान ने लगाया उससे पहले वह घास फुश खाकर उदर निर्वाह करता था, तो फिर मानवो के भी पहले इन देवताओं के पास इतने भारी जरी के कपडे, गहने, मिठाईयां कैसे?
16) उस समय जब चाहें जमीन पर आने वाले देवता किसी को भी शाप देकर भस्म करते थे,अब ऐसा कुछ नही करते,तो क्या उनका पॉवर ख़तम हुवा या रिमोट ख़राब हुवा?
17) अपने देश में आतंकवादी आकर बॉम ब्लॉस्ट करके जाते हैं, देवता उन्हें क्यों नहीं रोकते? उल्टा मंदिर में ही बॉम रखकर जाते वो कैसे?
18) 33कोटि देवताओं की पूजा अर्चना विधि करने वाले सीधे सर्व सामान्य इंसानों को ही फाशी लगाकर आत्म हत्या करनी क्यों पढ़ती?
19) पंडित मंत्र बोलकर हमसे दान दक्षिणा ऐठ लेते हैं, लेकिन उस मन्त्रो का अर्थ समझाकर क्यों नहीं बतातें?
20) अमुक देशस्थान जागृत हैं ऐसा कहा जाता हैं, फिर। पुलिस स्वरक्षण क्यों?
21) देवी देवता अपने सामने या पीछे कुछ नही खाते, फिर भी उसे नैवेद्य ,हार ,पेठे, नारियल,आदि अर्पण किया जाता क्यों?
22) सर्व सामान्य लोगोँ को देवी देवता कोपते हैँ ऐसा कहकर ,डराया जाता हैँ फ़िर, देवता पर चढ़ाये नारियल हार पेठे,पीछे के रास्ते पुनः दुकानों मेँ ले जाने वाले देवताओ को दिखायीं नहीं देता क्या? ये सब क्या है।

मंगलवार, 3 मई 2016

आप दिमाग से पैदल हैं

आपकी मूर्खता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि हम 15 - 20 साल पढ़ाई में ख़त्म करने के बाद एक पाँचवी फेल पंडित से सलाह लेते हैं कि हमको क्या करना चाहिए या क्या नही करना चाहिए । मतलब आप इंजिनियर वकील डॉक्टर बनकर भी इस लायक नही हुए कि अपना निर्णय खुद ले सको । आपमें इतनी क्षमता विकसित नही हुई जितनी एक पांचवी फेल पंडित में । आप पंद्रह बीस साल खर्च करके भी ये किसी पंडित से पूछते हैं कि घर कब बनाना है । आप दिमाग से पैदल हैं जो अपने घर का निर्माण करने का निर्णय भी खुद नही कर सकते ? पूछा पंडित से घर कब बनेगा और जब घर बनवाने की बारी आई, तब भी शुरुआत करने वो पाँचवी फेल पंडित ही आएगा ।  बच्चा आपने पैदा कर लिया लेकिन पंद्रह वीस साल खर्च करने के बाद भी आप इतना नही सीख पाए कि अपने बच्चों का नाम भी खुद रख पायें । बच्चा आपका है या पांचवी फेल पंडित का ? अब बात शादी की आई तो ये भी तय आप नही कर सकते कि आप शादी कब करोगे ? आपको शादी कब करनी है ये भी एक पांचवी फेल पंडत बताएगा । आपको लड़की / लड़का पसंद है, आपके परिवार वालों को भी पसंद है लेकिन एक पांचवी फेल पंडित ने कह दिया कि इससे शादी करना अच्छा नही होगा तो आप पंद्रह बीस साल खर्च करके भी उस पांचवी फेल पंडित से तुच्छ ही साबित हुए । आप जीवन भर पाँचवी फेल पंडित के आगे झुकते रहे लेकिन जब मरोगे तब भी ये ही पांचवी फेल पंडत तय करेगा कि आपको मरना कैसे है गीता सुनकर, रामायण सुनकर या सत्यनारायण की कथा सुनकर । अब इससे ज्यादा आपकी मूर्खता के प्रमाण और क्या दूं ।
सौ  -  Ravi kumar jatav

पानी का ठेकेदार तथाकथित इंद्र कहाँ गया

निरर्थक भगवानों का बहिस्कार कीजिये...

आज देश सूखे की भयंकर त्रासदी से गुजर रहा है बिना पानी के इंसान भूखे प्यासे मरने के लिए बाध्य है पशु पक्षी और जानवरों का बहुत बुरा हाल है अन्नदाता किसान बिना पानी मरने और आत्महत्या करने पर मजबूर है मुझे लगता इस त्रासदी से भारत में आज भी कम से कम 33 करोड़ लोग ग्रसित होंगे फिर ब्राम्हणों के निर्दयी 33 करोड़ देवी देवता किधर गए कहाँ गया पानी का ठेकेदार तथाकथित इंद्र कहाँ गया तीनो लोको की रक्षा करने वाला विष्णु. देश की कम से कम तीन चौथाई आबादी चिलम वाले शंकर को पुज कर उसपर भरोषा करती है क्या सिर्फ इसलिए की लोग भूंखे प्यासे मरें .कहाँ गया पर्वत उठाने वाला कृष्ण कहाँ गया पालनहार राम कहाँ गया संकटमोचन हनुमान कहाँ गया सबकुछ देनेवाला गणेश क्या दुर्गा सरस्वती लक्ष्मी काली सभी के आँखों में पट्टी बंधी है कुछ दिखाई नही देता है कहा गया लोगो को मुर्ख बनाकर लूटने वाला साईं और शनि.और मजे की बात यह है कि इस भूख प्यास से मरने वाले वही निरीह निर्दोष लोग है जो रात दिन इन्ही 33 करोड़ धूर्तों के भजन गाते है पशु पक्षी जानवर भी इन्ही की देन है फिर इन्होंने क्या बिगाड़ा जो इन्हें प्यासा मारा जा रहा है सायद इसका जवाब न मूर्खों के पास है न धूर्तों के पास क्योंकि इसका जवाब कुछ हो ही नही सकता है.
लेकिन एक बात तो सच है की ये देश खुद के कुछ करने से चलता है और चलता है बाबा भीम के संविधान से जिन्होंने कहा था उठो जागो और खुद के लिए कुछ करो अन्यथा भूंखे नंगे और प्यासे मरो .तुम जिस पत्थर को पूजकर अपना सत्यानास करते हो अगर उसी पत्थर को सीढ़ी बनाकर अगला कदम बढ़ाओगे तो तुम्हे तुम्हारी सफलतम मंजिल जरूर मिल जायेगी.
अन्यथा आज ऐसे भगवान् का क्या प्रयोजन जो तुम्हे पानी भी नही दे सकता उलटे प्यासा मार रहा है ये वक़्त है खुद के सोचने का और मूर्खता पाखण्ड देवी देवता और भगवानो से बाहर निकलने का अन्यथा भूख प्यास का सिलसिला झूठे मक्कार देवी देवताओं और भगवानो के दम पर सायद कभी खतम नही होगा

सौ- भीम पुत्र अजय अम्बेडकर
      जौनपुर उत्तर प्रदेश

आरक्षित वर्ग की एक पोस्ट के इंटरव्यू का एक दृश्य

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अधिकारी -     यह नौकरी मैं सामान्य वर्ग को क्यों न दूं

अभ्यर्थी  -    संविधान के आरक्षण के तहत ये जगह मुझे ही मिलनी चाहिए

अघिकारी -  कौनसे संविधान की बात करते हो आप, मनुस्मृति या बाबा साहब का संविधान

अभ्यर्थी - बाबा साहब का भारतीय संविधान

अधिकारी - मान लो ये नौकरी आपको दी, तो ये बताओ, इस खुशी में आप घर जाकर क्या करोगे

अभ्यर्थी - घर जाकर परिवार के साथ मंदिर  देवी देवताओं की पूजा करने जाऊगा, और पहली तनख्याह से देवी मइया का चोला चढ़ाऊँगा

अधिकारी - अच्छा !! नौकरी तो बाबा साहब के संविधान से चाहिए, और अहसान मनु प्रदत्त देवताओं को चुकाओगे

अधिकारी - वाह ! पाखन्डी, चल हट,,, चलो अगले को बुलाओ

सोमवार, 2 मई 2016

ખૂબ સરસ છે એટલે તમને મોકલું છું. ધર્મ અને વીજ્ઞાન

અંધશ્રદ્ધા છે આંધળી, વહેમને વંટોળે વહે;
અતીશ્રદ્ધા છે અવળચંડી, વેવલાપણાંનાં વાવેતર કરે.

યુરોપે અટપટાં યંત્રો શોધી ફીટ કર્યાં ફૅક્ટરીમાં;
આપણે સીદ્ધીયંત્રો બનાવી, ફીટ કર્યાં ફોટામાં.

પશ્ચીમે ઉપગ્રહ બનાવી, ગોઠવી દીધા અંતરીક્ષમાં;
આપણે ગ્રહોના નંગ બનાવી, મઢી દીધા અંગુઠીમાં.

જાપાન વીજાણુ યંત્રો થકી, સમૃદ્ધ બન્યું જગમાં;
આપણે વૈભવલક્ષ્મીનાં વ્રતો કરી, ગરીબી રાખી ઘરમાં.

અમેરીકા વૈજ્ઞાનીક અભીગમથી બળવાન બન્યો વીશ્વમાં;
આપણે ધાર્મીક કર્મકાંડો થકી, કંગાળ બન્યા દેશમાં.

પશ્ચીમે પરીશ્રમ થકી, સ્વર્ગ ઉતાર્યું આ લોકમાં;
આપણે પુજાપાઠ–ભક્તી કરી, સ્વર્ગ રાખ્યું પરલોકમાં.

ઍડવર્ડ જેનરે રસી શોધી, શીતળા નાબુદ કર્યા જગમાં;
આપણે શીતળાનાં મંદીર બાંધી, મુર્ખ ઠર્યા આખા જગમાં.

પર્યાવરણ–પ્રદુષણથી જયારે જગત આખું છે ચીંતામાં;
આપણે વૃક્ષો જંગલો કાપી, લાકડાં ખડક્યાં ચીતામાં..

વાસ્તુશાસ્ત્રનો દંભ ને વળગાડ, લોકોને પીડે આ દેશમાં;
ફાલતુશાસ્ત્ર છે એ, છેતરાશો નહીં, ઠગનારા ઘણા છે આ દેશમાં.

સાયંટીફીકલી બ્લડ ચૅક કરી, ઍંગેજમેન્ટ કરે પશ્ચીમમાં,
સંતાનોને ફસાવી જન્મકુંડળીમાં, લગ્નકુંડાળાં થાય આ દેશમાં.

લસણ–ડુંગળી–બટાકા ખાવાથી પાપ લાગે આ દેશમાં,
આખી ને આખી બેન્ક ખાવા છતાં પાપ ન લાગે આ દેશમાં.

Jay Bhim
Copyed@Whatsapp

क्यों जाते हो काम धन्धा करने ।

जो लोग यह मानते हैं कि ईश्वर की पूजा-पाठ करने से शान्ति मिलती है, धनदौलत मिलती है और बिगङे काम बन जाते हैं ।  मेरा उन अन्धभक्तों से निवेदन है कि जब उनके दस बीस मिनट की पूजा पाठ करने से ही सारे कार्य सफल होजाते है, शांति मिलती है तो पूजा के टाइम को दुगना , तिगुना क्यों नहीं कर देते, ताकि आपको दुगना तिगुना लाभ , धनदौलत व शान्ति मिल सके । मैं  तो सलाह दूंगा कि आप लोग अपना कामधन्धा व नौकरी छोङकर पूरे दिन कम से कम 8 घन्टे सुबह से शाम तक पूजा-पाठ कीजिये । ऐसा करने से भगवान जल्दी खुश होगा और आपको शान्ति,  तरक्की व धनदौलत घर बैठे ही मिल जायेगी ।   **** **** ****   भगवान से पंगा लेने वाले नास्तिकों को तो मेहनत करके ही खाना पङेगा । लेकिन आस्तिकों आप क्यों मूर्ख बन रहे हो । क्यों जाते हो नौकरी या मजदूरी करने इतनी ठन्ड में ।  **सभी आस्तिक  अपने घरों में  बैठ कर फुल टाइम पूजा-पाठ. करेंगें तो सर्दी भी कुछ हो जायेगी  ।  जय भीम जय मूल निवासी

तो फिर दिन भर घर में बैठकर ॐॐॐॐॐ का जाप करते रहिये, क्यों जाते हो काम धन्धा करने ।

बच्चे पैदा करने के अजीबो गरीब तरीके

जानिए बच्चों को पैदा करवाने की अजीबोगरीब Technology,  जो संसार में किसी देश में नहीं पायी जाती

ब्रह्मा ने ब्राह्मण को अपने मुँह से पैदा किया
छत्रिय को भुजाओ से
वैश्य को जाँघो से और
शुद्र को अपने पैरों से

राम लक्षमण भरत शत्रुघ्न उनकी माताओ के द्वारा खीर खाने से पैदा हुए

राजा जनक का एक नग्न स्त्री को देखकर वीर्य टपक गया जो धरती में गिरा अगले दिन सीता एक बलीहारे के खेत में पायी गयी

हनुमान के पसीने से एक मादा मगरमच्छ pregnant हो गयी और उसने मगरध्वज को जनम दिया

हनुमान की को पवन ने हनुमान की माता अंजनी को गर्भवती किया हनुमान हवा में पैदा हो गए

कमल से ब्रह्मा पैदा हुए
फिर ब्रह्मा ने अपनी पार्शव ( पसलिया ) रगड़ी तो दाई पसलियों से विष्णु और बाई से शिव पैदा किया

इसी कड़ी में शिव ने अपने माथे का पसीना पोछकर जमीन की तरफ झटका तो विष्णु और अपनी जाँघ रगड़ी तो ब्रह्मा पैदा हुए

पार्वती ने मिट्टी से गणेश की निर्माण किया
विष्णु की नाक से सूअर का जन्म हुआ
पांडवो की माता जंगल में गयी तो पाँच पांडवो का जन्म हुआ

असुरों के अतिक्रमण की वजह से त्रिदेवों ब्रह्मा विष्णु महेश की भौहे तन गयी और तीनो देवों के मुख से एक तेज निकला जो एक हो गया और वैष्णवी (दुर्गा ) का जन्म हुआ ???

आखिर ये है क्या ? ये क्या संस्कृति है ?? ऐसी गप्प टल्लों को क्यों थोपा गया ??
मकसद साफ था केवल इन गप्पों को लिखने वाला श्रेष्ठ था बाकि सब मानसिक गुलाम।

लेकिन अब तो बाबा साहेब की ऐसी अनुकम्पा हुई है कि गप्पी बेकार है बाकि सभी आज़ाद हैं।

" "जागो बहुजन जागो" जिन पाखंडियों की पाखंडी व्यवस्था ने तुम्हें सदियों तक जानवर बना रखा,
धिक्कार है तुम पर अगर ऐसी गंदी व्यवस्था को आज भी मान रहे हो तो।पढ़े लिखे होने का परिचय दीजिये ।

अंधविश्वास की कोई सीमा नही हैं

क्योकि इससे बढ़ावा देने वाले लोगो की कमी नही हैंl
इस अंधविश्वास के कारण ही उनकी रोजी रोटी चलती हैं।
और इसी कारण ये इसे बढावा देने के लिए
विज्ञापनों का सहारा भी लेते हैं। इन विज्ञापनों के प्रचार – प्रसार के लिए बीते दिनों के मशहूर
हस्तियों को चुना जाता है ।
आजकल बीते जमाने के हिंदी फिल्म स्टार
गोविंदा बड़े ही जोर – शोर से शुभ धन
वर्षा यंत्र को बेच रहे हैं और इसमें दर्शक
दीर्धा में भी कुछ पुराने जमाने के टेलिविजन कलाकार बैठे होते हैं और गोविंदा की हाँ में
हाँ मिलाते रहते हैं
और यह बताने का प्रयास करते हैं
कि धन वर्षा यंत्र के घर में स्थापित करने
के बाद उनके जीवन में उल्लेखनीय प्रगति आई
है और उनके जीवन के तमाम कष्ट दूर हो गए
हैं
तथा अब वह अपना जीवन पूर्ण आनन्द से
व्यतीत कर रहें हैं । गोविंदा जी दर्शक दीर्धा से
एक व्यक्ति को बुलाते हैं और उससे उसका नाम
पता पूछते हैं तो वो जबाव देता है
कि उसका नाम रामखेलावन है
और वह छपरा, बिहार के एक छोटे से गाँव मे रहता है तथा किसान है ।
आगे वह
बताता है कि धन वर्षा यंत्र स्थापना से पहले
उसकी हालत बहुत खराब थी और खेती ठीक
नहीं होती थी ।
वह इतना गरीब था कि अपने
बच्चों को स्कूल तक नहीं भेज पाता था
परंतु यंत्र स्थापना के बाद उसकी खेत में
इतनी पैदावार होती है कि घर धन से भर गया है तथा अब उसके बच्चे शहर के स्कूल में पढते हैं । इन महाशय के
बारे में मैं बताना चाहूँगा कि ये कोई
किसान नहीं है
वरन टेलिविजन के छोटे स्तर के
कलाकार हैं
जिन्हे मैनें अक्सर सोनी चैनल पर आने वाले कार्यक्रम अदालत में देखा है ( आप भी देख सकते हैं ) ।
इन कार्यक्रमों में जितने भी कलाकार बैठे होते है अगर आप गौर से देखें
तो सभी उम्र के पचास पड़ाव पार कर चुके
हैं
और पहले की तुलना में अब उनके पास काम
नहीं है और अगर है भी तो बहुत ही कम
जिसके
कारण वो यह विज्ञापन कर रहें हैं।
अजीब बात ये हैं की सरकार क्यों इस पाखंड
को बढ़ावा दे रही हैं ।
क्या उसे सच में लगता हैं कि इन चीजो से कुछ लाभ हो सकता हैं तो फिर क्यों न फिर सरकार
गरीब लोगो को सस्ता अनाज वितरित
करने की बजाय शुभ धन वर्षा बाटे,
लोगो की गरीबी कम हो जाएगी
और देश की जो आज आर्थिक व्यवस्था गिर चुकी हैं
वो भी सुधर जाएगी..
क्यों आखे होकर अंधे बने हुवे हो भाईओ अब तो आंखे खोलो..
यदी फिर भी कोई मेरे खिलाफ बोलना चाहता है तो ऊसे मेरा एक सवाल
(1) चलो भाई हिंदु धर्म के हिसाब से चलते है. हिंदु धर्म मे बताया जाता है की ईनसान की तकदीर मे जो लिखा है वो बदला नही जाता, ईश्वर के बदौलत कोई पत्ता भी नही हिलता तो भाई क्यों मै ईतना हिल डुल रहा हु क्यों मै अंधविश्वास कि पोल खोले जा रहा हु तकदीर तो ऊसने मेरी भी लिखी होगी?
क्या ऊसने मेरी तकदीर मे ये लिखा है कि जाओ भाई निचे जाकर मेरे खिलाफ इंटरनेट पे मेरी पोल खोल दो?
और क्या शुभ धन वर्षा घर मे रखने से तकदीर मे लिखे गयी यंत्रना बदलने वाली है क्या?

सौ- अँधविश्वास मीटाओ समाज बचाओ

अहींसा, समानता की बाते करना मानसीक गुलामी है

पयगंबर के हाथ मे हथियार नही
ईसा (ईशु) के हाथ मे हथीयार नही
गुरु नानक के हाथ मे हथीयार नही
महावीर के हाथ मे हथियार नही
तथागत बुद्ध के हाथ मे हथियार नही
⚔मगर हीन्दु के 33 करोड देवी देवता 4 - 4 हाथ और वो भी हथीयार से भरे।
निषकर्स :
जो घर्म ने शांति, अहींसा, समानता, भाईचारे के लीए काम करता है, उसे हथीयार की जरुरत नहीं  होती।
⚔हथियार बंद धर्म मे रहे के, अहींसा, समानता की बाते करना मानसीक गुलामी है

रविवार, 24 अप्रैल 2016

आज जानते है की कैसे हुआ भगवान श्री कृष्ण का जन्म का गप..???

श्री क्रष्ण के जन्म की अतिशोक्ति ।।। मित्रो पुराणो के अनुसार श्री क्रष्ण के जन्म की कहाने कुछ इस प्रकार है ।।। जब देवकी और वासुदेव को विवाह के बाद विदा किया जा रहा था, तो देवकी के भाई कंस ने निश्चय किया कि वर वधु को वो खुद अपने मुकाम तक छोड़ कर आयेगा और उसने रथ की कमान थाम ली ।।। जब वो रथ को लेकर थोड़ी दुर गया तो अचानक आकाशवाणी हुई जिसमे एक अज्ञात व्यक्ति ने ये कहा कि देवकी का आंठवा पुत्र ही कंस का वध करेगा।।
यह आकाशवाणी सुनकर कंस क्रोधीत हो उठा और उसने उसी समय देवकी को जान से मारने का निश्चय करता है, किन्तु वासुदेव कस को समझाते हुए कहा कि वो एसा ना करे अपनी बहन की हत्या का पाप अपने सिर ना ले, उन्हे जो भी संतान होगी वो (वासुदेव) खुद लाकर कंस को सौप देंगे ।।। कंस वासुदेव पर विश्वास करता है और उन्हे जाने देता है ।
जब वासुदेव के यहा पहला पुत्र जन्म लेता है, तो वासुदेव अपने प्रण के अनुसार बच्चे को कंस को सौपने ले जाते है, लेकिन महाराज कंस वासेदेव से कहते है कि उन्हे वासुदेव की आठवी संतान से खतरा है, अतः आप इस बच्चे को ले जाइये, ये सुनकर वासुदेव वहा से चले जाते है, उसी समय चुगलीखोर नारद मुनी वहा प्रकट होते और कंस से कहते है कि आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हो, वासुदेव के सभी बच्चो मे भगवान का अंश है। उन्ही मे से किसी के हाथो आपका विनाश होगा ।।।
नारदमुनी की बात सुनकर कंस तुरंत वासुदेव के पास जाता है, और वासुदेव तथा देवकी को करागार मे कैद कर देता है तथा उन्के पहले पुत्र की हत्या कर देता है, इसी प्रकार कंस एक के बाद एक देवकी के सात पुत्रो की हत्या कर देता है ।।।
और जब आठवे पुत्र के रुप मे भगवान का जन्म होता है, तो वासुदेव उस बच्चे को चमत्कारीक रुप से यशोदा तथा नंदलाल के यहा छोड़ आते है, जहा पर श्री क्रष्ण का पालन पोषण होता है।।।।
मित्रो वैसे तो यह एक कहानी काल्पनीक है लेकीन आपको इस पाखंड से उजागर करने के लिये,
जो लोग इसे सत्य मानते है उन लोगो से मैं कुछ सवाल पुछता चाहता हूं ।।।
1) भगवान ने कंस को आकाशवाणी से सुचीत क्यो किया की देवकी का आठवा पुत्र उनका संहार करेगा, क्या भगवान को बाकी के सात निर्दोष मासुम बच्चो की जान से कोइ मतलब नही था ?
2) श्री क्रष्ण ने आंठवे नम्बर पर हि जन्म क्यो लिया ???? अगर वो पहले ऩम्बर पर हि जन्म ले लेते तो बाकी के बच्चो की जान बच जाती ।।।
3) कंस भी अजीब मुर्ख आदमी था, सोचता था कि बहन देवकी की हत्या करेगा तो पाप लगेगा, तो उसने यह बात क्यो नही सोची की सात सात निर्दोष मासुम बच्चो की हत्या करने से तो उसे सात गुना पाप लगेगा ।।।
उस मुर्ख कंस ने यह बात क्यो नही सोची की होने वाले आठ मासुम बच्चो की हत्या करने से तो अच्छा है की देवकी को हि खत्म कर दिया जाय, ताकी ना रहेगा बांस और ना बजेगी बासुरी ।।।
4) चलो अगर कंस खुन खराबा नही करना चाहता था, तो फिर उस बेवकुफ ने देवकी और वासुदेव को बंदीग्रह मे एक साथ क्यो कैद किया, क्या उसमे इतनी अक्ल नही थी कि अगर ये दोने एक साथ रहेंगे तो बच्चे पैदा करेंगे ???
5) बाकी के उन सात बच्चो की हत्या का असली जुम्मेदार कौन, मारने वाला कंस या देरी ये जन्म लेने वाले श्री क्रष्ण य़ा फिर कंस को भड़काने वाला चुगली खोर नारदमुनी ????
6) किसी भगवान ने नारद जैसे दुष्ट पापी चुगलीखोर मुनी का संहार करने की कोशीष क्यो नही की??? या फिर मै यह कहू कि नारद सभी कालपनिक पौराणीक कथाओ का एक हास्य पात्र था ????
मैने इस पोस्ट मे कुछ भी गलत नही कहा है, सिर्फ पुराणों के अनुसार आपको उजागर करने के लिए कुछ सवाल किये है,
गालीया- गलोच और भगवानो की वकालत करने से पहले आपके काल्पनीक भवीष्य पुराणों में इसकी जाँच करें फिर यहाँ वकालत करें...
घन्यवाद....

इतना बड़ा झूँठ लिखते समय शर्म नही आई

हनुमान स्पेशल
“हनुमान ज्ञान गुण सागर” अथार्त्: हनुमान का ज्ञान सागर से भी बड़ा था।
बताइये तो इतना बड़ा झूँठ लिखते समय शर्म नही आई तुलसीदास को और न इन अंध भक्तों को ही पढ़ने में शर्म आती है।
सोचिये ज़रा हनुमान का ज्ञान कहाँ चला गया था जब लक्ष्मण के लिए हिमालय पर्वत पर जड़ी बूटी ढूँढ रहा था?
मान लो तब हनुमान की अकल घास चरन चली गई थी।
इसलिए वो हिमालय पर्वत को ही उठालाया। जब हनुमान हिमालय पर्वत उठा सकता है तो फिर लंका जाने के लिए पुल बनाने की क्या जरुरत थी?
ये बन्दर हनुमान तो पूरी सेना को बड़ी ही आसानी से ले जा सकता था?
मान लो फिर हनुमान की अकल घास चरने चली गई थी।
अब समुन्द्र मैं कंकड़ ,पत्थर से पुल बनाने की क्या जरूरत थी?
इसमें समयकी बर्बादी हो रही थी हनुमान दो चार हिमालय पर्वत ही समुन्द्र मैं उतार देता, तो पुल जल्दी बन जाता।
उधाहरण अगर आप क्रेन चलाने बाले से कहो कि भाई हमारी छत पर एक बार मैं एक ईंट पहुंचानी है तो क्रेन बाला आपको पागल ही कहेगा,इससे या साबित होता है कि हनुमान दिमाग से कितना पैदल था।
मान लो फिर बन्दर हनुमान की अकल घास चरने गयी थी।
राम नाम लिखा पत्थर नहीं डूबता फिर राम और राम की सेना क्यों डूब रही थी?
अगर नहीं डूब रही थी तो फिर ये‘रामसेतु’ बनाने की ज़हमत राम और हनुमान ने क्यों उठाई?
क्यों क्यों इतनी समय की बेवजह बर्बादी की?
फिर ये लाइन कियों लिख दी गयी है:
‘जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीसतिहु लोक उजागर’ये लाइन कहाँ मेल खाती है हनुमान के लिए..?
बस अंध भक्तों आस्था के नाम पर अंधे बने रहो !

सोमवार, 11 अप्रैल 2016

आख़िर अपनी आत्मा को कया कहेगा

ये एक विचार है आज के दोर के tv के पाखंडी लोगो के लिए इसको अनुपम खेर जेसे चापलूस लोगो से जोड़ के ही देखेकल्पना कीजिये कि श्रीनगर एयर पोर्ट पर गांधी जी पहुँचते एनआईटी के छात्रों से मिलने और पुलिस उन्हें रोकती तो वे क्या करते ?  कायरों की तरह अगली फ़्लाइट से फ़ोटो खिंचवा कर वापिस नहीं आ जाते , वे वहीं पर अपने अधिकार के लिये धरना या भूख हड़ताल पर बैठ जाते जो कि जेल तक में जारी रहता, छूटने पर या जम्मू तक छोड़ दिये जाने की सिथति में पुन: पैदल ही श्रीनगर चल देते रास्तें में कारवाँ बढ़ता रहता और मौलिक अधिकार की लड़ाई को कोर्ट कचहरी आदि में भी तब तक लड़ते जब तक कि सरकार झुक कर उन्हें एनआईटी में सादर प्रवेश नहीं करने देती । वहॉं पहुँच कर  छात्रों को सत्याग्रह और अहिंसा की सीख देते और उनसे पूरे देश में मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिये आंदोलन चलाने को कहते । कम से कम १०% प्रतिशत छात्र उनके पूर्णकालिक सिपाही बन गये होते और गांधी का सत्याग्रह सरकार , पुलिस , सेना की संयुंक्त शक्ति पर भारी पड़ता। यह भी संभव है कि बजाय लौटने के वे पाकिस्तान बार्डर पर पहुँच कर सड़क रास्ते से नियमानुसार वीज़ा लेकर पाकिस्तान वाले कश्मीर पहुँच कर भारत पाक एका या महासंघ के लिये लड़ रहे होते।               एक सफलता से दूसरी के लिये ज़मीन बनाना और लाखों को उसमेंजोडना कोई गांधी से सीखे , उनके तरीक़े से सीखें । कैसे एक मामूली सवाल नमक का या देशी कपड़े का चरखे के ज़रिये , एक सशक्त हथियार बना दिया था ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध ।          और यहॉं देखिये स्वार्थी नचनिया जोकर हवाई अड्डे से दब्बू की तरह लौट आया ! गले में पड़ा चमक हीन पद्म भूषण का तमग़ा अब बोझ ही बन जायेगा और रात में एेसे अवसरवादियों को नींद भी नहीं आती होगी । आख़िर अपनी आत्मा को कया कहेगा ? मुझे उन छात्रों की चिंता है जो अपने हाल पर छोड़ दिये जायेंगें क्यों कि स्वत:स्फूर्त उनहोंनें झंडा तो फहरा दिया लेकिन अब उनकी कोई ख़ैर ख़बर लेने वाला नहीं होगा। छ: महीने रुक कर देख लेना क्या होगा उनका ?

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