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सोमवार, 21 मार्च 2016

अगर भीम भारत मे आये न होते

भीम गीत
अगर भीम भारतमे आये न होते
अछूतों का कोई सहारा न होता
न धन बल न शिक्षा न इज्जत हमारी
जरा सी भी होती थी हिन्दू धरम में
नरक से निकलने न पाते अभी हम
अगर माता भीमा का प्यारा न होता ।।
अछूतों की हालत पे पाखंडी कितने
मगर मच्छ जैसे बहाते थे आंसू ।
अपना परया न पहचानते हम
अगर ज्ञान बाबा के द्वारा न होता।।
बनाकर के संभिधान भारत का उसने
हमें सारे खोये हकों को दिलाया
गांधी का बचना भी हो जाता मुस्किल।
अगर पैक्ट बाबा के द्वारा न होता।।
अगर भीम भारत में--------

शनिवार, 12 मार्च 2016

राम से कही ज्यादा पावरफुल डॉ अम्बेडकर है।

यकीन मानिए सच कह रहा हु

राम से कही ज्यादा पावरफुल डॉ अम्बेडकर है।
राम ने
अपनी पूरी ज़िन्दगी में सिर्फ एक
महिला(सीता) को रावण से आज़ाद करवाया और आज़ाद करवाने के तुरंत बाद अग्निपरीक्षा के नाम पर उसे
भी आग में झोंक दिया,
जबकि
बाबा साहब ने बिना किसी वानर
सेना की मदद के सम्पूर्ण
भारत की महिलाओ
को आज़ादी दिलवा दी ......

शूद्र का संपत्ति रखने का आन्दोलन तो कभी भी लक्ष्मी
देवी ने चलाया ही नहीं !

शूद्र का पढने लिखने का आन्दोलन भी कभी सरस्वती
देवी ने चलाया ही नहीं !

शूद्र के अच्छे भोजन का
आन्दोलन भी कभी अन्नापूर्ण देवी ने चलाया ही नहीं !

तो फिर 33 करोड़ को नमन का क्या मतलब ?

33 करोड़ सलाम के हकदार तो बाबा साहब है !
कोई शक !!

बाबा न होते तो फिर क्या होता

" गले तुम्हारे टाई न होती ,
उसकी जगह तो हांडि होती ।
कमर तुम्हरे बैल्ट न होती ,
वहा तो झाडू लटकी होती ।
नहीं होते ये कोठी ,
बंगले ,वहां पुराना छप्पर होता ।
नही होती ये मोटर कारे ,
फटा' पुराना जुता होता ।
बाबा न होते तो फिर क्या होता ,
बोलो अपने मुख से बोलो ।
बोलो' बोलो फिर बोलो ,
बाबा भीम की जय- जय बोलो  ।
आरक्षण के बल पर मिञो!
नेता अफसर तुम बने हो ।
हाल-चाल सब बदल गऐ हैं।
सूट-बूट में बने-ठने हो।
समता का अधिकार दिलाया ,
छुआछूत का दाग मिटाया ।
उत्पीडन से मुक्त कराया ,
अरे ! बाबा ने क्या न कराया ?
जब भी मीलो परस्पर् तुम सब ,
जय भीम ही अपने मुख से बोलो ।
बोलो-बोलो . बाबै भीम की जय जय बोलो ☝☝☝☝जय भीम

"भीम" से

मोहब्बत भी "भीम" से,
     ईनायत भी "भीम" से,
काम भी "भीम" से,
     नाम भी "भीम" से,
ख्याल भी "भीम" से,
     अरमान भी "भीम" से,
ख्वाब भी "भीम" से,
     माहोल भी "भीम" से,
यादें भी "भीम" से,
     मुलाकात भी "भीम" से,
सपने भी "भीम" से,
     अपने भी "भीम" से,
यारो यु कहो की
     अपनी तो सांसे भी "भीम" से.
नमो बुद्धस्स जय भीम साथियों।

..दिल से ...जय भीम.....

सौ - युवा भीम शक्ति दिल्ली

गुरुवार, 10 मार्च 2016

सबसे ऊँचा, सबसे न्यारा जग में भीमराव का नाम,,

किसी ने पूछा बाबा साहब को कौन-2 मानता है एक कवि का जवाब-

उगते सूर्य की किरण
भीम सलाम करती है,
झर-2 बहते झरने की
लहरे भी कुछ कहती है,,

कल-कल बहती नदियां
पवन ज्यों-2 करे शोर,
भीमराव के होने से ही
आज हुई है अपनी भोर,,

पर्वत से भी ऊँचा जो है
शक्ति साहस दीखता हो,
शौर्य, पराक्रम, बुद्धि के
बल पे ही जो टिकता हो,,

जिसकी कलम का लोहा
दुनिया अब तक मान रही,
मेहनत कहते किसको है
उनको पढ़कर जान रही,,

शोध किये दुनिया ने उनपे
भीम सा दूजा कोई नही,
इतने दुःख दर्दो को सहके
आँख कभी भी रोई नही,,

धरती अम्बर सब के सब
झुक-2 करे जिसे सलाम,
सबसे ऊँचा, सबसे न्यारा
जग में भीमराव का नाम,,

रचनाकार-मन्जीत सिंह अवतार
www.facebook.com/Drmanjeetsinghavtar

बाबा साहब के संदेश

""राजनीति में हिस्सा नहीं लेने से अयोग्य व्यक्ति शासक बन कर आप पर शासन करेंगा""
   ~बाबा साहब
""अपने वोट की कीमत समझो, हमें बिकने वाला समाज नहीं बनाना है""
   ~बाबा साहब
""मैनें रानी के पेट की नसबन्धी तुम्हे वोट का अधिकार दिलवा कर कर दी है अब आप खुद अपने वोट से राजा बन सकते हो या बना सकते हो""
      ~बाबा साहब
""मूलनिवासीओ  ! लिख दो अपनी दीवारों पर कि हमें इस देश की शासक जमात बनना है""क्योंकि शासन करने वाले अधिकार मांगने वाले नहीं देने वाले होते हैं।
     ~बाबा साहब
""मेरे समाज के बहादुर सिपाहियो में ये कारवां यहां तक बड़ी कठिनाइयों से लाया हुं जहां आज ये दिख रहा है ये निरन्तर आगे ही बढता रहना चाहिये अगर आगे नहीं बढा सको तो किसी भी सुरत में पीछे की ओर नहीं मुड़ना चाहिये"""
      ~बाबा साहब
""शिक्षा उस शेरनी का दूध है जो पियेगा वो दहाड़ेगा इसीलिए मैं तुम्हे सफल बनने का मुलमंत्र देता हुं:-""शिक्षत बनों" "संगठित रहों" "संघर्ष करों""
        ~बाबा साहब
मेरे समाज के लोगों तुम सिर्फ धार्मिक पाखण्ड को ढो रहे हो इसे छोड़ दो व भारतीय संसद में जाओ तुम्हे शासक वर्ग बनाना मेरे जीवन का अंतिम उद्देश्य है ये सपना आपको साकार करना होगा""
     ~बाबा साहब
""मैंने तुम्हें आजाद करवाने के लिये मेरा सारा जीवन समर्पित कर दिया है और अपने परिवार को भी कुर्बान कर दिया मेरी इस कुर्बानी को व्यर्थ मत जाने देना आपको आपसी मतभेद भुलाकर संगठित होना है और अपने अधिकारों के लिये संघर्ष करना होगा""
           ~बाबा साहब~

मैं भारतीय हूँ और मेरे देश का नाम भारत है...

मेरी कलम से
ना ही मैं हिन्दुस्तानी हूँ और ना ही मेरे देश का नाम हिन्दुस्तान है....
मैं भारतीय हूँ और मेरे देश का नाम भारत है....
मेरी जाति व धर्म सिर्फ मानवता या इन्सानियत है....
मैं बाबा साहब को मानने वाला हूँ और पूरा जीवन उन्ही के मार्ग पर चलने की कोशिश करूँगा....
मैं सदैव अपने भारत देश से मनुवाद, ब्राह्मणवाद, पाखण्डवाद, अंधविश्वास को समाप्त करने तथा अम्बेडकरवाद के प्रचार- प्रसार हेतु प्रयत्नशील रहूँगा....
मैं आज अकेला हूँ और मेरा समाज विघटित है परन्तु मुझे पूर्ण विश्वास है कि एक दिन मेरा समाज संघटित होगा और हम सब अपनी सामाजिक स्वतंत्रता के लिये एक मंच पर होंगे....
मुझे पूर्ण विश्वास है कि धार्मिक कुण्ठाग्रस्त ,सामाजिक वंचित समूह अर्थात भारत की 85% जनसमूह एक दिन जाग्रति होगा और वह अपनी बेडियो को एक मंच पर आकर तोड़ देगा

"बाबा" तेरे उपकारोँ को, मैँ कभी भुला ना पाऊँगा

पशु को गोद खिलाने वाले,
मुझको छूने से बचते थे।
मेरी छाया पड जाने पर,
'गोमूत्र का छीँटा' लेते थे।।

पथ पर पदचिन्ह न शेष रहेँ
झाडू बाँध निकलना होता।
धरती पर थूक न गिर जाये,
हाथ सकोरा रखना होता।।

जान हथेली पर रखकर,
मैँ गहरे कुआँ खोदता था।
चाहे प्यासा ही मर जाऊँ,
कूपजगत ना चढ सकता था

मलमूत्र इकट्ठा करके मैँ,
सिर पर ढोकर ले जाता था।
फिकी हुई बासी रोटी,
बदले मेँ उसके पाता था।।

मन्दिर मैँ खूब बनाता था,
जा सकता चौखट पार नहीँ।
मूरत गढता मैँ ठोक-ठोक,
था पूजा का अधिकार नहीँ।

अनचाहे भी यदि वेदपाठ,
कहीँ कान मेरे सुन लेते थे।
तो मुझे पकडकर कानोँ मेँ,
पिघला सीसा भर देते थे।।

गर वेदशब्द निकला मुख से
तो जीभ कटानी पड जाती।
वेद मंत्र यदि याद किया,
तो जान गँवानी पड जाती।।

था बेशक मेरा मनुजरूप,
जीवन बदतर था पशुओँ से।
खा ठोकर होकर अपमानित,
मन को धोता था अँसुओँ से।

फुले पैरियार ललई साहू,
ने मुझे झिँझोड जगाया था।
संविधान के निर्माता ने,
इक मार्ग नया दिखाया था।।

उसी मार्ग पर मजबूती से,
आगे को कदम बढाया है।
होकर के शिक्षित और सजग,
खोया निज गौरव पाया है।।

स्वाभिमान जग जाने से,
स्थिति बदलती जाती है।
मंजिल जो दूर दीखती थी,
लगरहा निकट अब आती है।

दर से जो दूर भगाते थे,
दर आकर वोट माँगते हैँ।
छाया से परे भागते थे,
वो मेरे चरण लागते हैँ।।

वो मुझसे पढने आते हैँ,
जो मुझे न पढने देते थे।
अब पानी लेकर रहैँ खडे,
तब कुआँ न चढने देते थे।।

"बाबा" तेरे उपकारोँ को,
मैँ कभी भुला ना पाऊँगा।
"भीम" जो राह दिखायी है,
उस पर ही बढता जाऊँगा।।

जय भीम

अपनी कीमत पहचानिये

मेरी कलम से
"एक कागज का टुकड़ा
            गवर्नर के हस्ताक्षर सेज
               नोट बन जाता है,
       जिसे तोड़ने, मरोडने,
           गंदा होने एवँ जर्जर होने से भी
             उसकी कीमत कम नहीं होती...
       आप भी बाबा साहब के हस्ताक्षर है,
           जब तक आप ना चाहे
              आपकी कीमत कम नहीं
                 हो सकती,
      आप अनमोल है ,
           अपनी कीमत पहचानिये
जय भीम ,जय भारत

मंगलवार, 8 मार्च 2016

कन्हैया कुमार का भाषण एक अम्बेडकरवाद की भाषा या फिर 5 राज्यों में इलेक्शन की तैयारी

1 प्रश्न सबके लिए?

दिनाक (03.03.2016) को रात्रि 10 बजे से 11 बजे तक कन्हैया कुमार का भाषण सभी ने सुना।

भाषण को जब "एक अम्बेडकरवादी विचारक" सुना तब माज़रा कुछ और ही आया।

यह बात सही है कि यह एक जोशीला और anti-बीजेपी भाषण था। यह सही है कि यह एक एंटी-आरएसएस भाषण था। यह सही है कि भाषण बाबा साहेब के नाम और संविधान की महत्ता से लिप्त था।

मगर प्रश्न आज भी हमारा अधूरा है?
डॉ रोहित वेमुला की लड़ाई आज भी अधूरी है!
बाबा साहेब का विज़न मिशन आज भी अधूरा है!

मै कन्हैया की भाषण की तारीफ़ करता हूँ मगर साथ में मै उन सभी लोगो को चेतावनी भी देता हूँ जो "बाबा साहेब के सपनो का भारत" चाहते है। कन्हैया कुमार द्वारा दिया गया भाषण और शब्द हमारे थे मगर हम हाइजैक किये जा रहे है, हमारे लोग trap हो रहे है। अम्बेडकरवादी विचारधारा dilute हो रही है।

डॉ रोहित वेमुला की लड़ाई में अम्बेडकरवाद  की आग थी वह आग कंही न कंही हमने खो दी। आईये ज़रा नीचे की कुछ लाइनों पर गौर करे--

1) हमारी लड़ाई सुरु हुई IIT मद्रास से, हैदराबाद से (रोहित)  ... एक लड़ाई बाबा साहेब के विचारों की जिससे ब्राह्मणवाद नंगा हुआ और देश अम्बेडकरवाद के झंडे के नीचे एक हुआ, (obc/sc/st/minority) की एकता हुई और जिसका फायदा अम्बेडकरवादी पार्टियों को होता मगर ऐसा नहीं हो पाया या ऐसा नहीं करने दिया गया।

2) क्या कन्हैया कुमार के भाषण में डॉ रोहित वेमुला की लड़ाई जोकि (institutional discrimination) की थी , कंही मिला ? नहीं मिला।

3) ऐसी कई घटनाएं हुई बाबा साहेब के समय भी और कांशीराम साहेब के समय भी। मगर कोई भी बहुजन बाबा साहेब और कांशीराम साहेब को नहीं छोड़े या यूं कहे बाबा साहेब और कांशीराम साहेब ने बहुजनो को भटकने नहीं दिया।

4) अभी आपको मै बता दू कि JNU में जो कुछ भी हुआ उसका सीधा फायदा किसको होगा! अभी मई 2016 में 5 राज्यों में चुनाव होने है।

1- केरल
2- पश्चिम बंगाल
3- तमिलनाडु
4- असम
5- पोंदिचेरी

इन पांच राज्यों में अगर बहुजन बीजेपी से हटाये जायेंगे तो यह तय है कि कन्हैया कुमार के भाषण से पूरा का पूरा बहुजन (85%) मूलनिवासी कांग्रेस और कम्युनिस्ट की तरफ होगा। और जैसा कि ऊपर के 5चो राज्यों में इनकी प्रबल विचारधारा है।

तो हुआ क्या? हमें कोई फर्क नहीं पड़ता कि इनकी पार्टीयो को फायदा पहुंचे या नहीं मगर क्या ऐसा होने से हमारी विचारधारा का अधिकारों के रूप में अमल होगा। क्या 85% समाज का अपने अधिकारों का हक़दार हो पायेगा।

JNU का यह केस काफी उत्साह पूर्वक रहा जिसका सीधा फायदा 5 राज्यों में होने वाले इलेक्शन के चलते श्री येचुरी और कांग्रेस  को होगा।  और फिर हमारी मेहनत का फल कोई और खायेगा।

भारत में नक्सलवाद की बात कर क्या गरीब आदिवासियों को उनका अधिकार मिला?
क्या बंगाल में गरीबो को अधिकार मिला?
वंहा पर तो कई सालो से इनकी सरकार रही। तो जो काम UP में हुआ अम्बेडकरवाद के नाम पर तो वह काम बंगाल में क्यों नहीं हुआ? यह सोचने वाली बात है।

✒तो सिर्फ सरकार बनाने की ओहा-पोह से जो जुमले आते है उससे हमारा कोई फायदा नहीं। यही बाबा साहेब कहते थे। कि हमारे अधिकारो की बात करने वालो पर मुझे विश्वास नहीं कि वे हमारा भला सोचेंगे। अगर ऐसा होता तो आज श्री येचुरी एंड कांग्रेस के लोग डॉ रोहित वेमुला के साथ हुए institutional discrimination की बात करते हुए आन्दोलन करते न कि 5 राज्यों का इलेक्शन देखते हुए प्लानिंग करते।

✒हमारी ही बात होती है फिर भी हमें अधिकार माहि मिलता क्योंकि हम सब भटक जाते है और बाबा का रास्ता छोड़ देते है।

✒उम्मीद करता हूँ इनकी सरकारे बनने के बाद शायद अम्बेडकरवाद की बात करे और डॉ रोहित वेमुला की लड़ाई का result दे।

✒कंही ऐसा न हो कि अन्ना हजारे के बहकाव में हमने केजरीवाल को लिया और कन्हैया के साथ श्री येचुरी और कांग्रेस को लेकर हमलोग दिल्ली और पंजाब के साथ साथ इन पान्चो राज्यों में अम्बेद्कवाद को ही ख़त्म कर दे।

याद रहे.....

डॉ रोहित वेमुला की लड़ाई अभी बाकी है...
और
बाबा साहेब का मिशन अभी बाकी है...
BE AWARE RIGHTIST & LEFTIST PEOPLE,
BE AMBEDKRITE
सौ : जय भीम ग्रुप

सोमवार, 7 मार्च 2016

भीम की औलाद हैं हम

भीम   की औलाद  हैं  हम।
इसीलिए फौलाद   हैं   हम।।

है  संघर्ष  हमारा   मूलमन्त्र,
इसीलिए  आबाद  हैं   हम।।

बाबा  साहब  हक  दे  गए,
इसीलिए  आजाद  हैं  हम।।.

संगठित  तो  नहीं  हो सके,
बहुत  बड़ी  तादाद  हैं हम।।

जय  भीम  है हर जुबां पर,
बुद्ध  का  शंखनाद  हैं हम।।

सिल्ला' के हौंसले बुलंद हैं,
अन्याय के प्रतिवाद हैं हम।।

सौ -विनोद सिल्ला

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

भारत का इतिहास हमारे छाती पर आग का दहकता गोला है

संसद में महिषासुर पर गर्मागर्म बहस हुई, आप सबने देखा सुना. लेकिन इतिहास यह है की जितने भी असुर राक्षस माने जाने वाले शासक थे वे सभी भारत के मूलनिवासी थे जिनके बारे में ब्राह्मणी इतिहास ने हमारे बीच बिगड़ा हुआ इतिहास प्रस्तुत किया है.
असुर का अर्थ है, वह जो सूरा नही पीता है, बलवान और वीर्यवान है. राक्षस का अर्थ है, रक्षक याने protector. जितने भी हिन्दू पर्व हैं सभी मूलनिवासी राजाओं के कत्ल पर मनाये गए जश्न से सम्बंधित. होली में होलिका, दशहरा में महिषासुर, दीवाली में राजा बलि की शहादत को बध का नाम दे कर हमारा इतिहास बिगाड़ा गया है ताकि हम हम अपने गौरवशाली पूर्वजो पर गर्व न कर सकें. वास्तव में सारे हिन्दू त्यौहार हमारे पूर्वजों के विदेशी आर्य ब्राह्मणों द्वारा क़त्ल के बाद हमसे से जश्न मनाये जाने की कहानी है. त्यौहार का अर्थ ही होता है "तुम्हारी हार". याने हमारी हार. यही कारण है की बाबासाहेब कहते थे..भारत का इतिहास हमारे छाती पर आग का दहकता गोला है. सच जाने, स्वाभिमानी बनें.

सौ : shaileshhadiyal28@gmail.com
9998839902
Tharad, Gujarat

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

फिर ये सबके सब संविधान और तिरंगे के प्रेमी कैसे हो गए??

बाबा साहब अंबेडकर का नाम रटने को मजबूर है BJP-RSS, जबकि मिलती नहीं है विचारधारा

मोदी सरकार अंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष में कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने 26 नवंबर 2015 को बड़े पैमाने पर संविधान दिवस मनाने का ऐलान किया था। अलग-अलग मंत्रालय लेख-भाषण प्रतियोगिता के साथ समानता-दौड़ आदि का भी आयोजन किया था। सवाल उठता है कि अचानक राष्ट्रीय स्वयंसेवक और भारतीय जनता पार्टी के भीतर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के प्रति श्रद्धा और प्रेम भाव क्यों  उमड़ा।

राष्ट्र दरअसल कल्पना का ख़ास ढंग का संगठन है। इसलिए प्रतीकों का काफ़ी महत्व होता है। जिन प्रतीकों के माध्यम से हम अपनी राष्ट्र की कल्पना को मूर्त करते हैं, उनकी जगह नए प्रतीक प्रस्तुत करके एक नई कल्पना को यथार्थ करने का प्रयास होता है। तो हम उस राजनीतिक दल के संविधान प्रेम को कैसे समझें जिसकी पितृ-संस्था, यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उस पर मात्र इसलिए अपना विश्वास जताया था जिससे उस पर गाँधी की हत्या के बाद लगा प्रतिबंध हटाया जा सके। आख़िर यही शर्त सरदार पटेल ने उसके सामने रखी थी। वरना उसका ख़्याल था कि मनुस्मृति से बेहतर संविधान क्या हो सकता है! याद रहे कि इस संगठन ने तिरंगा ध्वज को भी मानने से इनकार किया था यह कहकर कि तीन रंग अशुभ और अस्वास्थ्यकर होते हैं। इस तिरंगे के चक्र पर इस संघ और दल के एक वरिष्ठ नेता, अब मूक मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी ने यह कहकर ऐतराज़ जताया था कि यह बौद्ध धर्म का प्रतीक है। फिर ये सबके सब संविधान और तिरंगे के प्रेमी कैसे हो गए?

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

कौन था मुसलमान???

बाबासाहेब ने जब चवदार तालाब का आंदोलन चलाया और सभा भरने के लिये बाबासाहेब को कोई हिन्दु जगह नहीं दे रहा था
तब ऐक मुसलमान ने आगे आकर अपनी जगह दी और कहा बाबासाहेब आप मेरी जगह मे अपनी सभा भर सकते हो!!!

गोलमेजी परिषद मे जब गांधी ने बाबासाहेब का विरोध किया और रात के बारा बजे गांधी ने मुसलमानो को बुलाकर कहा कि आप बाबासाहेब का विरोध करो तो मैं आपकी सभी मांगे पूरी करुंगा!!!
तब मुसलमानो ने मना कर दिया और कहा कि हम बाबासाहेब का विरोध किसी भी हाल मे नहीं करेंगे और ये बात मुसलमानो ने आकर बाबासाहेब को कह दी कि गांधी हमे आपका विरोध करने के लिये कह रहे है!!!

संविधान सभा मे जब सारे हिन्दु (गांधी, नेहरू और सरदार पटेल)ने मिलकर बाबासाहेब के लिये संविधान सभा के सारे दरवाजे और खिड़कीया भी बंध करदी थी तब पच्छिम बंगाल के मुसलमानो ने बाबासाहेब को वोट देकर चुनवाया और बाबासाहेब को संविधान सभा मे मुसलमानो ने भेजा!!!
अगर बाबासाहेब को मुसलमान वोट नहीं देते और बाबासाहेब संविधान सभा मे नहीं जाते तो आज हम कहां होते ज़रा सोचिये???

बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

डॉ.बाबासाहेब अम्बेडकर के बारे में दुनिया क्या कहती है-

अमेरिका:-"बाबासाहेब हमारे देश मे जन्मे होते तो हम उन्हें सूर्य कहते।"
-राष्ट्रपति ओबामा.

साऊथ आफ्रिका:-भारत से लेने लायक एक ही चीज़ है!वह है डॉ.अंबेडकर द्वारा लिखा संविधान।"
-नेल्सेन मंडेला

हंगरी :-"हमारी लड़ाई हम बाबासाहेब अंबेडकर की क्रांति के आधार पर लड़ रहे हैं।"

नेपाल:-"हमारा आने वाला संविधान भारतीय संविधान पर आधारित होगा।"
-PDC

पाकिस्तान:-"अगर हमारे देश में बाबासाहेब रहे होते तो हमें धार्मिक कट्टरता मिटाने में आसानी होती"(B Cel inPAK)

इंग्लैण्ड:-"अगर भारत को पूर्ण स्वतंत्रता चाहिये तो डॉ.अंबेडकर जैसे अनुभवी, निष्पक्ष राजनीतिज्ञ और समाजशास्त्री को संविधान सभा में होना ही चाहिये।"
-गवर्नर जनरल(आज़ादी से पहले)

जापान:-"डॉ.अंबेडकर ने मानवता की सच्ची लड़ाई लड़ी थी।"
(जापान में बाबासाहेब की मूर्ति लगाई जा रही है)

कोलंबिया यूनिवर्सिटी:-हमें गर्व है कि हमारी यूनिवर्सिटी में एक ऐसा छात्र पढ़ा जिसने भारत का संविधान लिखा।"
(यूनिवर्सिटी में मूर्ती स्थापना करते वक्त यूनिवसिर्टी प्रमुख)

भारत:-"मुझे अपने संविधान पर गर्व है और मेरे देश का संविधान ही यहाँ का राष्ट्रीय ग्रंथ है।"
- PM नरेंद्र मोदी

दुनिया के 100 से ज्यादा देशों ने बाबासाहेब के विचारों को अपनाया है।
पर जो सम्मान उन्हें दुनिया ने दिया वह सम्मान उन्हें अपने देश भारत ने कभी नहीं दिया क्योंकि भारत में जाति और धर्म की व्यवस्था आज भी मानवतावाद पर हावी है जो व्यक्ति के योगदान को नहीं जाति व धर्म को महत्व देती है।।
एक विश्वरत्न को जातिवादियों की छोटी मानसिकता ने जाति से जोड़कर उन्हें छोटा बता दिया!
अब हमें इस जातिवादी व्यवस्था में बदलाव् चाहिये।।

जय भीम मेरा गीत है ।

वीर हूँ मैं भीम का,
जय भीम मेरा गीत है ।
              मिट जाऊँ भीम पर,
              मुझे भीम से ही प्रीत है ।।

तोड़कर जातियों की बेड़ियां,
सोच लो हम भीम के ही मीत हैं ।
               गर यूँ दिल मिल जाएँ तो,
               जय भीम ही संगीत है ।।

समता का संविधान यहाँ,
समृद्ध हों सब भीम की ये नीत है ।
               राहें तुम रोक लो हजार,
               यहाँ अब इंसानियत की ही जीत है ।।

मिटाने को हस्ती भीम की,
गाँधी नेहरू मनुवादी आये ।
               ख़ूब किया हुड़दंग यहाँ धर्म का,
               मचा था हाहाकार और चीख है ।।

मिट गए हमको मिटाने वाले,
यहाँ युद्ध नहीं अब बुद्ध की ही रीत है ।
              वीर हूँ मैं भीम का,
              जय भीम मेरा गीत है, जय भीम मेरा गीत है ।
Copyed

शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

डॉ.भीमराव अंबेडकर कौन थे ?

Dr. अम्बेडकर का देश के लिए विकास मे  क्या योगदान है
इसे संक्षिप्त में बतानेका प्रयास किया है. इसे ठीक से समझे. उन्होंने क्या किया ये देखिये.

भारत में पहले लड़कियों को कोई अधिकार नहीं थे. पढ़ने, नौकरी के बारे में तो छोड़िये उन्हें घर से बहार निकलने की भी पाबन्दी थी. बस घर और चूल्हा यही उनकी हद थी.

1.उन्होंने भारत में प्रथम लड़कियों को स्त्रियों को पुरुषो के बराबरी  के हक़ देने के लिए हिन्दू कोड बिल लिखा.

२.भारत में प्रथम नोकरदार गर्भवती अौरतों को वेतनी छुट्टियों का हक़ दिया.

३.लड़कियों को लड़को के बराबर समानता मिलाके दी.
लड़कियों को पढ़ने का हक़ दिलाया.

4.लड़कियों को प्रॉपर्टी में लडको के बराबर की हिस्सेदारी दी.
लड़कियों को नौकरी में भागीदारी दी.

5. गर्भावस्था में छुट्टी का अधिकार वो भी पूरे वेतन के साथ मिला के दिया.

6. एक पति के लिए एक पत्नी का अधिकार और दूसरी पत्नी के आते ही अपने पति से हिस्से का अधिकार प्राप्त करके दिया.

7. लड़कियों को आज़ादी से जीने का अधिकार दिया.

8.अपने शोषण के खिलाफ आदालत में जाने का अधिकार दिया.

9. अपनी मर्ज़ी से शादी का अधिकार दिया.

10. वोट देने का अधिकार दिया.

11. भारत में प्रथम अर्थशाश्त्र की नीव रखी.

12. भारत में प्रथम जलनीति तैयार की.

१3. भारत में प्रथम परिवार नियोजन का नारा दिया.

14. भारत के हर एक नागरिक को मतदान का हक़ दिया.

15. भारत में बालमजुरी पर रोक लगायी.

16. भारत से उच्च नीच जातिवाद की गुलामी से मुक्त किया.

17. भारत से सावकारी, वेठ्बिगारी पद्धत को बंद किया.

18.  देश की घटना लिख के सामाजिक एवम भौगोलिक विविधता वाले देश को एक बनाये रखा.

19.  देश के 85% जनता को समानता का अधिकार दिया.

20.  देश की 85% जनता को उच्च वर्ग के साथ लाके खड़ा कर दिया.

21.  दलितों पर से अलग अलग तरह के प्रतिबंद हटाये.
सभी को समान अवसर एवम सुविधा उपलब्ध करायी.

22.  सभी को अपना धर्म चुनने की आजादी दी.

23. सभी को शिक्षा का अवसर प्रदान किया.

  24.  रिजर्व ऑफ इंडिया की स्थापना उन्ही के संकल्पना में हुयी, इस बैंक की स्थापना में उनका ही महत्वपूर्ण योगदान रहा. उन्ही के लिखित ''दि प्राब्लेम ऑफ दी रुपी'' इस प्रबंध के आधार पर रिझर्व बँक ऑफ इंडिया के रूल्स और रेग्युलेशन बनाये गए..

25.  महाराष्ट्र राज्य के निर्माण मे इनका महत्व पुर्ण योगदान है

26. हीराकुण्ड बांध,भाखड़ा बांध, दामोदर बांध  और सन प्रकल्प के निर्माते भी वही थे,
कोसी नदी पे धरना बांधो बिहार में कभी बाढ़ नहीं आएगी ये बताने वाले भी वही थे.

26. उन्होंने देश के मजूर मंत्री रहते वक़्त शिष्यवृत्ति योजना बनायीं. इससे हजारो टेक्निकल विद्यार्थी विदेश में पढ़ने जाते है.

27.  मजूरों को पहले 12 घंटे काम करना पड़ता था. उसे घटाकर उन्होंने 8 घंटे कर दिया और इसके ऊपर के काम के लिए घंटे के हिसाब से अलग पैसे देने का प्रावधान किया. 

28.  ऊर्जा निर्मिति व्यवस्था के लिए उन्होंने "सेन्ट्रल टेक्निकल पॉवर बोर्ड CTPB की स्थापना की थी.

29.  उन्हीने अपनी बुद्धि और परिश्रम से सिंचन और बंधारो के लिए आयोग की स्थापना की थी. क्यों की इनपे आर्थिक भर रहता है.

30.  पानी के व्यवस्थापन के लिए, नैसर्गिक संसाधन, कोयला खान प्रकल्प के लिए उनका ही परिश्रम कारणीभूत है..

31.  खेती, उद्योग, कारखानो के विकास और पुनर्वसन के लिए RCC  reconstruction committee council की स्थापना की गयी थी वे वह सभासद थे. इसमें उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा.

32.  उन्होंने ही पहले ही बिहार और MP के दो पटना रांची और दक्षिण उत्तर ऐसे भाग करने को कहा था. ताकि इन राज्यों का विकास हो सके. 45 साल बाद छत्तीसगढ़ और झारखण्ड अलग किये गए.

33.  शिक्षक देश की रीढ़ की हड्डी है इसलिए उन्हें ज्यादा वेतन तनख्वाह मिले ये भी उन्हीने कहा था.

34.  देश में कोयले की बिजली नहीं चलेगी उसके बदले सौरऊर्जा का इस्तेमाल करके जल विद्युत प्रकल्प खड़े करने को कहा था.

35.  उनके बेटे ने भ्रष्टाचार किया तो खुद के पेपर में खुद के बेटे पे निंदा टिपणी करके भ्रष्टाचार विरोधी होने का सबूत दिया.

36. लड़कियों का गर्भपात न करे ये बताने वाले भी वही थे.

37.  किताबों के लिए स्पेशल घर बांधने वाले भी वही थे.

38.  देश को उपराजधानी चाहिए ये बताने वाले भी वही थे.

39.  मुझे कायदे मंत्री नहीं बनाना मुझे कृषि मंत्री बनके किसानों को न्याय मिलाके  देना है. किसानो का राज्य लाना है ये कहने वाले भी वही थे.

40.  कोकण में खोती का आंदोलन करने वाले भी वही थे.

41.  तिलक के बेटे ने आत्महत्या की थी. उस समय भविष्य में कोई आत्महत्या न करे इस्पे भावपूर्ण स्वर में लेख लिख के श्रंद्धांजलि देने वाले भी वाही थे.

42.  तीन लष्करी प्रमुख कभी एक साथ न मिले ये लोकशाही के लिए घातक है ये बताने वाले भी वही थे.

43.  वो एकमात्र ऐसे भारतीय थे जिन्हे गोलमेज परिषद में आने के लिए विशेष आमंत्रण दिया जाता.
वो एक मात्र नेता है जिन्होंने

44.  लड़कियों के हक़ के लिए उनके सम्मान के लिए अपने मंत्र पद से इस्तीफा दिया था.

45.  दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला अमेरिका देश भी उनके लिखित अर्थशास्त्र पर चलता है.

वो एक अच्छे व्होलीयोन वादक भी थे. एक शिल्पकार, चित्रकार भी थे ये बात तो बहुत से लोगों को भी पता नहीं.

46.   उन्हें टोटल आठ भाषाए आती थी.  हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, संस्कृत,  गुजरती, पारसी, जर्मन, फ्रेंच.  इसके आलावा उन्होंने पाली व्याकरण और शब्दकोष भी लिखी थी.

47.  उन्होंने संसद में पेश किए हुए विधेयक महार वेतन बिल, हिन्दू कोड बिल, जनप्रतिनिधि बिल, खोती बिल, मंत्रीओं का वेतन बिल, मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल, रोजगार विनिमय सेवा, पेंशन बिल , भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.).  इनके अलावा मानवी अधिकारों के लिए कई सत्याग्रह किये.  उसके साथ ही कई सामाजिक संघटन भी स्थापित किये,  उन्हें प्राप्त सम्मान
1) भारतरत्न
2) The Greatest Man in the World (Columbia
University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv, 

Jaibhim Dear friends
बाबासाहब अंबेडकर आठ भाषाएँ जानते थे।
1) मराठी (मातृभाषा)
2) हिन्दी
3) संस्कृत
4) गुजराती
5) अंग्रेज़ी
6) पारसी
7) जर्मन
8) फ्रेंच
डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर जी को पाली भाषा
भी आती थी। उन्होंने
पाली व्याकरण और शब्दकोष (डिक्शनरी)
भी लिखी थी जो महाराष्ट्र
सरकार ने Dr.Babasaheb Ambedkar Writing and
Speeches Vol.16 में प्रकाशित की हैं।
*** बाबासाहब अंबेडकर जी ने संसद में पेश किए हुए
विधेयक
महार वेतन बिल
हिन्दू कोड बिल
जनप्रतिनिधि बिल
खोती बिल
मंत्रीओं का वेतन बिल
मजदूरों के लिए वेतन (सैलरी) बिल
रोजगार विनिमय सेवा
पेंशन बिल
भविष्य निर्वाह निधी (पी.एफ्.)
*** बाबासाहब के सत्याग्रह (आंदोलन)
1) महाड आंदोलन 20/3/1927
2) मोहाली (धुले) आंदोलन 12/2/1939
3) अंबादेवी मंदिर आंदोलन 26/7/1927
4) पुणे कौन्सिल आंदोलन 4/6/1946
5) पर्वती आंदोलन 22/9/1929
6) नागपूर आंदोलन 3/9/1946
7) कालाराम मंदिर आंदोलन 2/3/1930
8) लखनौ आंदोलन 2/3/1947
9) मुखेडका आंदोलन 23/9/1931
*** बाबासाहब अंबेडकर द्वारा स्थापित सामाजिक संघटन
1) बहिष्कृत हितकारिणी सभा - 20 जुलै 1924
2) समता सैनिक दल - 3 मार्च 1927
राजनीतिक संघटन
1) स्वतंत्र मजदूर पार्टी - 16 अगस्त 1936
2) शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन- 19 जुलै 1942
3) रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया- 3 अक्तूबर 1957
धार्मिक संघटन
1) भारतीय बौद्ध महासभा - 4 मई 1955
शैक्षणिक संघटन
1) डिप्रेस क्लास एज्युकेशन सोसायटी- 14 जून
1928
2) पीपल्स एज्युकेशन सोसायटी- 8 जुलै
1945
3) सिद्धार्थ काॅलेज, मुंबई- 20 जून 1946
4) मिलींद काॅलेज, औरंगाबाद- 1 जून 1950
अखबार, पत्रिकाएँ
1) मूकनायक- 31 जनवरी 1920
2) बहिष्कृत भारत- 3 अप्रैल 1927
3) समता- 29 जून 1928
4) जनता- 24 नवंबर 1930
5) प्रबुद्ध भारत- 4 फरवरी 1956
*** बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने जिवन में विभिन्न
विषयों पर 527 से ज्यादा भाषण दिए।
***बाबासाहब अंबेडकर को प्राप्त सम्मान
1) भारतरत्न
2) The Greatest Man in the World (Columbia
University)
3) The Universe Maker (Oxford University)
4) The Greatest Indian (CNN IBN & History Tv
18)

*** बाबासाहब अंबेडकर जी इनकी
निजी किताबें (उनके पास थी)
1) अंग्रेजी साहित्य- 1300 किताबें
2) राजनिती- 3,000 किताबें
3) युद्धशास्त्र- 300 किताबें
4) अर्थशास्त्र- 1100 किताबें
5) इतिहास- 2,600 किताबें
6) धर्म- 2000 किताबें
7) कानून- 5,000 किताबें
8) संस्कृत- 200 किताबें
9) मराठी- 800 किताबें
10) हिन्दी- 500 किताबें
11) तत्वज्ञान (फिलाॅसाफी)- 600 किताबें
12) रिपोर्ट- 1,000
13) संदर्भ साहित्य (रेफरेंस बुक्स)- 400 किताबें
14) पत्र और भाषण- 600
15) जिवनीयाँ (बायोग्राफी)- 1200
16) एनसाक्लोपिडिया ऑफ ब्रिटेनिका- 1 से 29 खंड
17) एनसाक्लोपिडिया ऑफ सोशल सायंस- 1 से 15 खंड
18) कैथाॅलिक एनसाक्लोपिडिया- 1 से 12 खंड
19) एनसाक्लोपिडिया ऑफ एज्युकेशन
20) हिस्टोरियन्स् हिस्ट्री ऑफ दि वर्ल्ड- 1 से 25
खंड
21) दिल्ली में रखी गई किताबें- बुद्ध
धम्म, पालि साहित्य, मराठी साहित्य- 2000 किताबें
22) बाकी विषयों की 2305 किताबें
बाबासाहब जब अमेरिका से भारत लौट आए तब एक बोट दुर्घटना में
उनकी सैंकडो किताबें समंदर मे डूबी।
*** बाबासाहब अंबेडकर जी
1) महान समाजशास्त्री
2) महान अर्थशास्त्री
3) संविधान शिल्पी
4) आधुनिक भारत के मसिहा
5) इतिहास के ज्ञाता और रचियाता
6) मानवंशशास्त्र के ज्ञाता
7) तत्वज्ञानी (फिलाॅसाॅफर)
8) दलितों के और महिला अधिकारों के मसिहा
9) कानून के ज्ञाता (कानून के विशेषज्ञ)
10) मानवाधिकार के संरक्षक
11) महान लेखक
12) पत्रकार
13) संशोधक
14) पाली साहित्य के महान अभ्यासक
(अध्ययनकर्ता)
15) बौध्द साहित्य के
[2/2, 08:19] Govind Kamble: अध्ययनकर्ता
16) भारत के पहले कानून मंत्री
17) मजदूरों के मसिहा
18) महान राजनितीज्ञ
19) विज्ञानवादी सोच के समर्थक
20) संस्कृत और हिन्दू साहित्य के गहन अध्ययनकर्ता थे।

उनके  कुछ   खास  पहलु ,

1) पाणी के लिए आंदोलन करनेवाले विश्व के पहले महापुरु)

2.  लंदन विश्वविद्यालय के पुरे लाईब्ररी के किताबों की छानबीन कर उसकी जानकारी रखनेवाले एकमात्र महामानव,

3) लंदन विश्वविद्यालय के 200 छात्रों में नअबर 1 का छात्र होने का सम्मान प्राप्त होनेवाले पहले भारतीय,

4) विश्व के छह विद्वानों में से एक,

5) विश्व में सबसे अधिक पुतले बाबासाहब अंबेडकर जी के हैं।,

6) लंदन विश्वविद्यालय मे डी.एस्.सी. यह उपाधी पानेवाले पहले और आखिरी भारतीय,

7) लंदन विश्वविद्यालय का 8 साल का पाठ्यक्रम 3 सालों मे पूरा करनेवाले महामानव
उनके बारे में दुनिया क्या कहती है ये भी देख ले.
dr. अम्बेडकर के बारे मे दुनिया के विचार

1. अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामा कहते है, अगर  "वो" हमारे देश में जन्मे होते तो हम उन्हें सूर्य कहकेर  बुलाते.

2.  पाकिस्तान में एक ही  भारतीय की जयंती मनाई जाती है और वो है बाबा साहेब dr अम्बेडकर

3.  नेल्सन  मंडेला कहते है भारत के पास से सिर्फ एक ही चीज लेने लायक है और वो है भारत का संविधान

4.  वे एकमेव भारतीय है जिनके दुनियाभर में सबसे ज्यादा पुतले है.
भारत के हर इक शहर में उनका पुतला है.

नोट:-  जिस किसी भी पाठक को लगता हैं की जो बाते बाबा साहेब dr.अम्बेडकर के काम या उनकी Qualification ke बारे म कुछ भी गलत लिखा हैं तो वो पाठक कृपा करके कोई भी इतिहास की किताब पढ़ सकते है य फिर internet पर चैक कर सकते हैं।।
जय भीम जय भारत

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