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मंगलवार, 3 मई 2016

दलित और मुसलमानों का गठजोड़ कोई नया नहीं है.

जब-जब सवर्णों ने दलितों के साथ भेदभाव किया है तब-तब मुसलमानों ने ही समर्थन दिया है, अनेकों परिस्थिति मे दलितों ने भी मुसलमानों को समर्थन दिया है.

ज्योतिबा फुले को जब सवर्णों ने दुत्कार दिया तब उस्मान शेख़ ने ज़मीन दान देकर विद्यालय खुलवाया.

सावित्रीबाई फुले के ऊपर माल-मूत्र फेंका जाता था तब ज्योतिबा फुले के साथ फ़ातिमा शेख़ खड़ी हुई और विद्यालय मे महिला शिक्षा का प्रचलन शुरू किया !.

बाबा साहब अंबेडकर को जब महाराष्ट्र से संविधान सभा मे चुनकर नहीं भेजा गया तब तत्कालीन बंगाल जोगेंद्रनाथ मंडल और बंगाल के प्रधानमंत्री फज़हूल हक़ ने 48% मुस्लिम मतदाता वाले जयसुर और कुलना क्षेत्र से चुनकर संविधान सभा मे भेजा.

उसी डॉ० अंबेडकर को 1952 के आमचुनाव मे मुंबई से एक साधारण व्यक्ति नारायण कजरोलकर से हारना पड़ता है.

कल्पना कीजिये, यदि, अंबेडकर जी बंगाल से संविधान सभा मे नहीं पहुंचे होते तब देश मे दलितों और मुसलमानों की स्थिति क्या होती?

पढ़ना शुरू करो, ईतिहास से बहुत कुछ निकलेगा !

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

कौन था मुसलमान???

बाबासाहेब ने जब चवदार तालाब का आंदोलन चलाया और सभा भरने के लिये बाबासाहेब को कोई हिन्दु जगह नहीं दे रहा था
तब ऐक मुसलमान ने आगे आकर अपनी जगह दी और कहा बाबासाहेब आप मेरी जगह मे अपनी सभा भर सकते हो!!!

गोलमेजी परिषद मे जब गांधी ने बाबासाहेब का विरोध किया और रात के बारा बजे गांधी ने मुसलमानो को बुलाकर कहा कि आप बाबासाहेब का विरोध करो तो मैं आपकी सभी मांगे पूरी करुंगा!!!
तब मुसलमानो ने मना कर दिया और कहा कि हम बाबासाहेब का विरोध किसी भी हाल मे नहीं करेंगे और ये बात मुसलमानो ने आकर बाबासाहेब को कह दी कि गांधी हमे आपका विरोध करने के लिये कह रहे है!!!

संविधान सभा मे जब सारे हिन्दु (गांधी, नेहरू और सरदार पटेल)ने मिलकर बाबासाहेब के लिये संविधान सभा के सारे दरवाजे और खिड़कीया भी बंध करदी थी तब पच्छिम बंगाल के मुसलमानो ने बाबासाहेब को वोट देकर चुनवाया और बाबासाहेब को संविधान सभा मे मुसलमानो ने भेजा!!!
अगर बाबासाहेब को मुसलमान वोट नहीं देते और बाबासाहेब संविधान सभा मे नहीं जाते तो आज हम कहां होते ज़रा सोचिये???

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2016

क्या मुसलमानों और पिछडो को अपने सत्यानाश की जानकारी है ??

भारत विभाजन के वक्त मूसलमानोंऔर पिछडो का
सत्यानाश कैसे हुआ?
.
(१) भारत से पाकिस्तान जाते समय मुसलमानों ने
अपने सात
लाख घर खाली किये थे| वह सब घर ब्राह्मण, बिनया,
क्षञिय
को सरकार ने अलॉर्ट (देना) कर दिये| लेकिन पिछडे
वर्ग के
मुसलमानों को नहीं दिया. एससी, एसटी, ओबीसी के
लोगों
की बात तो छो़डो|
(२) मुसलमान अपनी ७० लाख एक़ड जमीन छो़डकर
पाकिस्तान
चले गये वह सारी जमीन सरकारने ब्राह्मण, क्षञिय,
वैश्य को
अलॉट कर दी|
(३) पाकिस्तान से जो ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य
भारत आये थे
उनको सरकारने ६० हजार नौकरीया दी गई थी और
एससी,
एसटी, ओबीसी के लोग आये थे उनको सिर्फ २०४
नौकरीयॉं
दी|
(४) पाकिस्तान से जो ६० हजार ब्राह्मण, क्षञिय,
वैश्य लोग
आये उनको डेव्हलप ऐरिया में बसाया गया जैसे
दिल्ली, मुंबई और
विकसित शहर लेकिन जो एससी, एसटी, ओबीसी के
लोग आये
उन्हें सरकारने अनडेव्हलप ऐरिया में बसाया जैसे
जंगलो और
रेगीस्थान..
(५) मोहनदास गांधी ने ५५ करो़ड रुपये पाकिस्तान
को दिये इस
वजह से गांधी की हत्या हुई ऐसे कहने वाले लोगों ने
पाकिस्तान
से आये ब्राह्मण क्षञिय, वैश्य को भारत में बसाने के
लिए
सरकार ने ९१ करो़ड रुपये लगाऐ इसकी आज तक
चर्चा तक नहीं
हुई|
.
क्या मुसलमानों और पिछडो को अपने सत्यानाश की
जानकारी है ??

बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

दलितों और मुसलमानो को ही क्यों देशद्रोही बनाती हे ये संघी सरकार

मुसलमानों को निशाना बनाकर वो हिन्दू को एकजुट कर वोट बैंक बनाती है,
और दलितों को ये संघी जानते है की ये लतखोर हैं,
ये कितना भी लात खायेंगे,
ये हमारे दरवाजे जरुर आयेंगे,
इन बेशर्मो का स्वाभिमान मर चूका है,
तभी तो हजारों सालों से आज तक ये जातिगत प्रताड़ना सह रहे हैं,
मंदिर से लतियाकर भगाया जाता है फिर भी मंदिर जरुर आयेंगे,
गर्व से कहते हैं हम हिन्दू हैं, !!!

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