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रविवार, 21 फ़रवरी 2016

बहन होनी चाहीयें

कैसी भी हो एक बहन होनी चाहिये..........।

बड़ी हो तो माँ- बाप से बचाने वाली.

छोटी हो तो हमारे पीठ पिछे छुपने वाली....॥

बड़ी हो तो चुपचाप हमारे पाँकेट मे पैसे रखने वाली,

छोटी हो तो चुपचाप पैसे निकाल लेने वाली...॥

छोटी हो या बड़ी, छोटी-छोटी बातों पे लड़ने वाली,

एक बहन होनी चाहिये.......॥

बड़ी हो तो ,गलती पे हमारे कान खींचने वाली,

छोटी हो तो अपनी गलती पर,साँरी भईया कहने वाली...

खुद से ज्यादा हमे प्यार करने वाली एक बहन होनी चाहिये....

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

कल न हम होंगे न कोई गिला होगा !

कल न हम होंगे न कोई गिला होगा !
सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा

बढ़ कदम रुकने न पाये
     
राह काँटों से भरी हो,
या उमड़ती सी सरी हो, 
जीत की चाहत खरी हो,
काल सिर नत हो झुकाये।
                        बढ़ कदम रुकने न पाये।
पंख अपने आजमाता,
नीड़ तिनके चुन बनाता,
एक पंछी यह सिखाता,
                        भाल, साहस कब झुकाये।
                        बढ़ कदम रुकने न पाये।
ढूँढता फिरता कहाँ रे,
हाथ में तेरे सितारे,
जाग खुद जग को जगा रे,
                        आंधियाँ दिल में छुपाये।
                        बढ़ कदम रुकने न पाये।
खींच अंबर को धरा पर,
पाँवों के अपने बराबर,
तू ही चन्दा तू दिवाकर
                        राह जग को जो दिखाये।
                        बढ़ कदम रुकने न पाये।
लक्ष्य नजरों में बसे जब,
पाँव थकते फिर कहाँ कब,
चाह सब पूरी करे रब,
साथ विधना मुस्कुराये।
                        बढ़ कदम रुकने न पाये।

जय भीम नमो बुद्धाय
सबका मंगल हो
सौ : विमल

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