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मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

कांग्रेस का आंकड़ों के साथ दावा, 'NDA सरकार आने के साथ बढ़ जाता है देश में आतंकवाद

नई दिल्ली।

कांग्रेस ने आंकड़े पेश करते हुए दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के आने के बाद से सीमा पार से आतंकवाद बढा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक पेज पर ट्वीट करके कहा है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में सीमा पार से संचालित आतंकवाद की घटनाएं 95 फीसदी तक कम हो गई थी। लेकिन एनडीए सरकार के पिछले 19 माह के कार्यकाल में आतंकवाद की घटना नौ प्रतिशत तक बढ गई है।

कांग्रेस ने अपने आरोपों के पीछे दलील दी है कि भाजपा सरकार आने के बाद सीमा पार से सक्रीय आतंकवादियों के हौंसले बढ जाते हैं। मोदी सरकार के आने के बाद सीमा पार से लगातार हमले हो रहे हैं। पिछले वर्ष आतंवादियों ने दो बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया। इनमें पहला हमला 27 जुलाई को गुरदासपुर में हुआ और दूसरा 5 अगस्त को ऊधमपुर में हुआ।

इस बार आतंकवादियों ने गुरदासपुर में हमारे महत्वपूर्ण ठिकाने पर हमला किया है। इन सब स्थितियों को देखते हुए लगता है कि हम 2008 से पहले की स्थिति में पहुंच गए हैं। 

पठानकोट के आतंकवादी हमले को लेकर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए पार्टी ने कहा कि इसमें कोई एक कमांड या नियंत्रण केंद्र नहीं था।

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मंगलवार, 5 जनवरी 2016

पठानकोट हमला: जब पूरी जानकारी थी तो कहां हुई चूक?

पंजाब के पठानकोट में 2 जनवरी को एयरबेस स्टेशन में
हुए आतंकी हमले ने देश को एक बार फिर से दहशत में
डाल दिया है. इस हमले के 4 दिन बीत चुके हैं फिर
भी अभी बीएसएफ और सुरक्षा एजेंसिया इसे
नाकाम करने में विफल रहीं हैं. जबकि नए साल से
पहले ही गृह मंत्रालय की तरफ से एक इंटेलिजेंस अलर्ट
दिया गया था.
मंत्रालय ने आगाह किया था कि आतंकवादी इस
बार पंजाब को निशाना बना सकते हैं. इसके बाद अब
पंजाब पुलिस की तैयारियों और गुरदासपुर के एसपी
सलविंदर सिंह पर सवाल उठ रहे हैं, जिन्हें आतंकियों ने
कुछ देर के लिए अगवा कर लिया था.
सेना की वर्दी में आए आतंकी
घटना के बाद पूरे पंजाब में अलर्ट जारी किया गया.
यहां तक कि जम्मू पुलिस ने भी हालात पर
निगरानी रखी. जिन पांच लोगों ने एसपी को
अगवा किया था, वे भी सेना की ही वर्दी में थे.
सलविंदर सिंह और उनके दोस्त राजेश वर्मा ने बताया
था कि उनके पास भारी हथियार थे. इन्होंने एसपी
की कार छीनी और उससे 20 किलोमीटर तक गए.
फिर वहां से दूसरी इनोवा गाड़ी ली, जिसे
हिमाचल प्रदेश के एक गांव में छोड़ दिया. एसपी
सलविंदर अकालगढ़ में मिले और यहां से तीन
किलोमीटर दूर टैक्सी ड्राइवर इकागर सिंह की
लाश मिली.
एसपी को अगवा करने वालों को न खोज पाना
बड़ी नाकामी
सूत्रों की मानें तो पठानकोट एयरबेस पर आतंकी
हमले की साजिश एक साल से चल रही थी. पुलिस ने
बेस कैंप की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाने के
आरोप में 30 अगस्त, 2014 को आर्मी के जवान सुनील
कुमार को अरेस्ट भी किया था. फिर भी इस मामले
को गंभीरता से नहीं लिया गया जिस कारण इतनी
बड़ी घटना को अंजाम देने में आतंकवादी कामयाब
हुए. चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस के एक पूर्व शीर्ष
अधिकारी ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि खोज
और तलाशी अभियान हल्का था, क्योंकि सुरक्षा
बल 24 घंटे बाद भी आतंकवादियों को नहीं खोज
पाए.
आत्मघाती हमले की फिराक में थे
आतंकी सेना की वर्दी में आए थे और 2 जनवरी को
तड़के करीब 3 बजे एयरफोर्स स्टेशन की दीवार
फांदकर अंदर घुसने में कामयाब रहे. ये आतंकी दो
टुकड़ियों में एयरफोर्स स्टेशन में दाखिल हुए. एक
टुकड़ी रेजिडेंशियल एरिया की तरफ चली गई तो
दूसरी टेक्निकल एरिया की तरफ. सूत्रों के मुताबिक
ये सीमापार से आए थे. ये आतंकी आत्मघाती हमले
की फिराक में थे. लेकिन जब हमले को अंजाम देने में
नाकाम रहे तो आतंकियों ने पहले ग्रेनेड फेंके और फिर
जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी. इनमें लश्कर-ए-तैयबा
और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शामिल बताए जा रहे
हैं.
NSG कमांडो की मौत पर भी सवाल
इस ऑपरेशन के 4 दिन बीत जाने के बाद और सेना के 7
जवानों के शहीद होने के बाद बीएसएफ और खुफिया
एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.
NSG कमांडो की बम डिफ्यूज करते समय शहीद होने
की घटना ने पूरे ऑपरेशन पर सवाल खड़े कर दिए.
हालांकि डिफेंस के लोगों का कहना है कि स्पेशल
सूट पहनने के बावजूद कई बार बम डिफ्यूज करते समय
जान चली जाती है. क्योंकि स्पेशल सूट की भी एक
लिमिट होती है.
राहील शरीफ को थी पठानकोट हमले की
जानकारी!
पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बारे में एक बड़ा
खुलासा हुआ है. पता चला है कि हमले के बारे में
पाकिस्तानी सेना प्रमुख के राहील शरीफ को पहले
से जानकारी थी. भारतीय खुफिया एजेंसियों के
मुताबिक, पाकिस्तानी सेना वहां के प्रधानमंत्री
नवाज शरीफ के शांति वार्ता के प्रयासों से पूरी
तरह सहमत नहीं है.
जांच में जुटीं पाकिस्तानी एजेंसियां
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर
स्वीकार किया है कि उसे भारत की ओर से कुछ
इनपुट मिले हैं. बताया जाता है कि पाकिस्तानी
एजेंसियां भारतीय इनपुट के आधार पर जांच में जुट गई
हैं. मोदी सरकार यह देखना चाहती है कि
पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत और नए सिरे से
दोस्ती को लेकर किस कदर संजीदा है और वहां की
सरकार अपने वादे पर अमल करती है या नहीं.
PAK की प्रतिक्रिया के बाद ही वार्ता
मोदी सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत
द्वारा साझा किए गए इनपुट पर पाकिस्तान की
प्रतिक्रिया और कार्रवाई ही यह तय करेगी कि
आगे इस महीने दोनों मुल्कों के बीच विदेश सचिव
स्तर की वार्ता होगी या नहीं. सूत्र ने बताया,
'अगर पाकिस्तान इस ओर गंभीरता के साथ आगे
बढ़ता है और पठानकोट के दोषियों के खिलाफ
कार्रवाई करता है तो भारत इसे आपसी रिश्तों के
लिए सकारात्मक संकेत मानेगा.'
पंजाब में छह महीने में दूसरा बड़ा हमला
यह छह महीने में पंजाब में दूसरा बड़ा आतंकी हमला
है. इससे पहले 27 जुलाई 2015 को गुरदासपुर में आतंकी
हमला हुआ था. तब भी आतंकी पाकिस्तान के रास्ते
ही आए थे. ये दीनानगर थाने में घुस गए थे और थाने के
बगल वाली इमारत में छुपकर फायरिंग करते रहे थे. यह
मुठभेड़ 12 घंटे चली थी. इसमें गुरदासपुर एसपी शहीद
हो गए थे.
ऐसे बचा बड़ा हमला
इन आतंकियों को एयरफोर्स स्टेशन के घरेलू क्षेत्र में
ही रोक दिया गया था. ये तकनीकी क्षेत्र तक
पहुंचने में कामयाब नहीं हुए. तकनीकी क्षेत्र
एयरफोर्स स्टेशन का सबसे ज्यादा सुरक्षा वाली
जगह होती है. हमले के बाद पूरे पंजाब में हाई अलर्ट
जारी कर दिया गया. पठानकोट में नाकाबंदी कर
दी गई. एयरफोर्स स्टेशन के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई
है. वहीं, दिल्ली में वायुसेना मुख्यालय में उच्च
स्तरीय बैठक की जा रही है.
क्यों अहम है पठानकोट
पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन हमारी सीमा के पास
है. यहां हमारे बड़े हथियार रखे जाते हैं. युद्ध की
स्थिति में पूरी रणनीति को यहां से ही अंजाम
दिया जाता है. 1965 और 1971 की लड़ाई में भी इस
एयरफोर्स स्टेशन ने बड़ी भूमिका निभाई थी.
मिग-21 लड़ाकू विमानों के लिए यह बेस स्टेशन है.

सोमवार, 4 जनवरी 2016

खुफिया एजेंसिया का खुलासा, PAK आर्मी चीफ राहील शरीफ को थी पठानकोट हमले की जानकारी!

पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बारे में एक बड़ा
खुलासा हुआ है. पता चला है कि हमले के बारे में
पाकिस्तानी सेना प्रमुख के राहील शरीफ को पहले
से जानकारी थी. भारतीय खुफिया एजेंसियों के
मुताबिक, पाकिस्तानी सेना वहां के प्रधानमंत्री
नवाज शरीफ के शांति वार्ता के प्रयासों से पूरी
तरह सहमत नहीं है.
हाल ही में हुई एक बैठक में पाकिस्तान के सेना प्रमुख
जनरल राहील शरीफ ने नवाज को कहा था कि वह
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के
लिए स्वतंत्र हैं लेकिन पाकिस्तानी सेना देश में
मौजूद आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कोई
कार्रवाई नहीं करेगी. ये संगठन भारत के खिलाफ
मुहिम छेड़े हुए हैं.
PAK सेना कर रही है आतंकियों का समर्थन?
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, आईएसआई दिसंबर
2014 से आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मत की ताकत
बढ़ाने में जुटी है. बीते कुछ सालों में जैश-ए-मुहम्मद के
कुछ लोग लश्कर-ए-जांघवी नाम के आतंकी संगठन से
जुड़ गए जो कि पाकिस्तान को ही निशाना बना
रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, जैश-ए-मुहम्मद को
पाकिस्तानी सेना का समर्थन मिलने का सीधा
मतलब से है कि भारत के खिलाफ आतंकवाद जारी
रखना और पाकिस्तान के अंदर हो रहे हमलों को
रोकना.
पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बना है ये संगठन?
लश्कर-ए-जांघवी एक सुन्नी बहुल और जिहादी
आतंकी संगठन है जो पाकिस्तान में सक्रिय है. इस
संगठन ने पाकिस्तान में शिया मुस्लिमों को
निशाना बनाते हुए कई बड़े हमलों को अंजाम दिया
है जिनमें साल 2013 में 200 शियाओं की हत्या का
मामला भी शामिल है. इसके अलावा 1998 में
मोमिनपुरा कब्रिस्तान में हुए हमले के अलावा 2009
में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम को निशाना बनाकर
किए गए हमले में भी इस आतंकी संगठन का नाम
सामने आया था. बीते सालों में यह संगठन
पाकिस्तान के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है.
आतंकियों को ISI से मिल रही है ट्रेनिंग?
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि सीमा पार से
आने वाले आतंकियों को आईएसआई से ट्रेनिंग मिलती
है और उन्हें 26/11 जैसे हमलों में कमांडो ऑपरेशन से
लड़ने के लिए तैयार किया जाता है.
पठानकोट हमले के बाद भारत सरकार ने अब तक
पाकिस्तान विदेश सचिव स्तर की बातचीत जारी
रखने को लेकर रुख पूरी तरह साफ नहीं किया है. यह
बैठक 15 जनवरी को इस्लामाबाद में होनी है.
दोनों देशों के बीच बातचीत पर संकट!
भारत सरकार ने रविवार को पाकिस्तान को उसकी
सीमा से हमले की साजिश रचने को लेकर कई सबूत
सौंपे हैं. भारत सरकार अब इस ओर पाकिस्तान की
प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है. सरकारी सूत्रों
से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार अब
पहले यह देखना चाहती है कि इस्लामाबाद
आतंकवादियों और उनके आकाओं के खिलाफ
कार्रवाई करने के संकल्प को प्रदर्शित करता है या
नहीं. नरेंद्र मोदी की सरकार दोनों मुल्कों के बीच
फिर से बातचीत शुरू होने के बाद इसे पड़ोसी मुल्क
की पहली बड़ी परीक्षा मान रही है.
भारत में सबूत के तौर पर सौंपे फोन रिकॉर्ड्स
गौरतलब है कि खुफिया एजेंसियों ने पठानकोट
एयरफोर्स बेस पर हमला करने वाले आतंकियों की
फोन कॉल्स को इंटरसेप्ट किया था, जिसमें
आतंकियों ने सीमा पार पाकिस्तान में अपने
परिजनों और अपने आकाओं से बात की थी.
पाकिस्तान में उनके आकाओं के मोबाइल नंबर और
उनके सीमा पार से आने के सबूत पाकिस्तान के साथ
साझा किए गए हैं. इसके साथ ही आतंकियों के
जीपीएस कॉर्डिनेट्स, कॉल लॉग्स और
ट्रांसक्रिप्टस भी पाकिस्तान को सौंपे गए हैं

भारत ने पाकिस्तान को दिया आतंकियों का 'सबूत', पाक करेगा जाँच

पठानकोट एयरफोर्स बेस पर हमला करने वाले
आतंकियों के फोन कॉल रेकॉर्ड, पाकिस्तान
में उनके आकाओं के मोबाइल नंबर और उनके
सीमा पार से आने के सबूत भारत ने
पाकिस्तान को भेज दिए हैं। पाकिस्तान ने
भी सबूत मिलने की तस्दीक की है।
भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने
पाकिस्तान के एनएसए नसीर खान को कुछ
सबूत दिए और उनसे कहा है कि इस मामले पर
पाकिस्तान को ठोस कार्रवाई करनी
चाहिए। भारत से जानकारी मिलने के बाद
पाकिस्तान ने एक बयान में कहा है कि उसने
काम भी करना शुरू कर दिया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में
कहा, 'पाकिस्तान सरकार भारत से लगातार
संपर्क में है और वहां से दी गई लीड्स पर
छानबीन भी कर रही है।'
बयान में यह भी कहा गया है कि एक ही
इलाके में रहते हुए और एक ही इतिहास को
साझा करने वाले दोनों देशों को बातचीत
की प्रक्रिया पर कायम रहना चाहिए। इसमें
यह भी कहा गया है कि आतंकवाद का
खात्मा करने के लिए दोनों देशों को साथ
मिलकर काम करना चाहिए।
भारत सरकार के अधिकारियों ने सोमवार
शाम को ही बताया था कि जब भी दोनों
पक्षों की बातचीत होगी, चाहे विदेश सचिव
स्तर की हो या राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
स्तर पर, आतंकियों से पाकिस्तान के तार जुड़े
होने के सभी सबूत कार्रवाई के लिए दिए
जाएंगे।

गौरतलब है कि आतंकियों ने पंजाब के पुलिस
एसपी सलविंदर सिंह की कार पर कब्जा करने
के बाद उनके, उनके दोस्त राजेश वर्मा और
सिंह के रसोइया के कम से कम चार मोबाइल
फोन छीन लिए थे और इनमें से कम से कम दो
का इस्तेमाल पाकिस्तान में उनके आकाओं से
बातचीत करने के लिए किया गया था।
घुसपैठियों ने अपने आकाओं से बात करने के
लिए दो पाकिस्तानी सिम कार्ड्स का भी
इस्तेमाल किया। उनके आकाओं के
पाकिस्तानी पंजाब के बहावलपुर में होने की
आशंका है।

पठानकोट हमलावरों के पाकिस्तानी कनेक्शन का मिला सबूत

पठानकोट एयरबेस पर हमले के लिए जिम्मेदार
6 आतंकवादियों में से एक ने पाकिस्तान के
'एपकॉट' ब्रैंड के जूते पहन रखे थे। जांचकर्ताओं
का दावा है कि आतंकवादी पाकिस्तान से
आए थे और वे हथियारों और तमाम अन्य
उपकरणों से लैस थे। जूते का यह ब्रैंड
पाकिस्तान में काफी प्रचलित है और सीमा
के पास आसानी से मिलता है। इस कंपनी को
पहले ईस्ट पाकिस्तान क्रोम टैनरी के नाम से
जाना जाता था।
जांच टीम अब वैसी तमाम जानकारियों को
इकट्ठा करने की कोशिश कर रही है, जिसके
तहत चार आतंकवादी बॉर्डर से पठानकोट पहुंचे
और इस दौरान उन्होंने एक टैक्सी ड्राइवर की
हत्या की और गुरदासपुर के एसपी को अगवा
किया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि
जूलर राजेश वर्मा से पूछताछ में पता चला कि
सोमवार को मारे गए दो आतंकवादी चार
अन्य आतंकवादियों के पठानकोट पहुंचने से
पहले ही एयरबेस में घुस गए थे।

पढ़ें: भारत ने दिया पाकिस्तान का सबूत,
करेगा जांच

एक सीनियर अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं
किए जाने की शर्त पर बताया, 'वर्मा से
पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि
पाकिस्तान में बैठे अपने सरगना से बातचीत के
दौरान एक आतंकवादी को बताया गया कि
दो आतंकवादी पहले से ही एयरबेस में घुसे हैं और
उन्हें सिर्फ उनका साथ देने की जरूरत है।' जांच
टीम के मुताबिक, एक जनवरी को तकरीबन
सुबह 3 बजे चार संदिग्धों के एयरबेस में घुसने की
थर्मल इमेज भी सामने आई है।
एनएसजी के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें
ऐसी बैटरियां मिली हैं, जो मेड इन
पाकिस्तान जान पड़ती हैं और इंप्रोवाइज्ड
एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने के
लिए इन बैटरियों को यहां लाया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से शुरुआती पड़ताल
में पता चला है कि हर आतंकवादी के पास
तकरीबन 20-25 किलो का विस्फोटक था।
एक सीनियर सरकारी अधिकारी के
मुताबिक, एयरबेस के अंदर घुसने वाले सभी 6
आतंकवादी पूरी तरह से प्रशिक्षित थे और
उनके पास हथियारों और विस्फोटकों का
जखीरा था। उन्होंने कहा कि इन
विस्फोटकों को निष्क्रिय और खत्म करने में
एनएसजी को दिनभर लग गया। इंटेलिजेंस
सूत्रों का यह भी दावा है कि आतंकवादियों
ने पंजाब सीमा के जरिये 31 दिसंबर की रात
को घुसपैठ की थी।
एक सीनियर अधिकारी ने बताया, '31
दिसंबर को जो चार आतंकवादी आए थे, वे
सबसे पहले मसरूर बड़ा भाई गांव में रुके, जो
अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज कुछ किलोमीटर
की दूरी पर है। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-
तैयबा इस गांव में ट्रेनिंग कैंप चलाता है।' इस
हमले की जांच की जिम्मेदारी संभालने को
तैयार एनआईए ने कहा कि इस हमले में स्थानीय
लोगों के समर्थन और ड्रग नेटवर्क के तार होने
की संभावना से इनकार नहीं किया जा
सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, गृह
मंत्रालय टैक्सी ड्राइवर की हत्या, एसपी को
अगवा किए जाने का मामला और एयरबेस
हमले की जांच एनआईए को सौंपने जा रही है।

पाकिस्तान के एयरबेस पर हमले की मॉक ड्रिल करके आए थे आतंकी

भारतीय वायु सेना के पठानकोट बेस पर हमला
करने वाले छह आतंकियों ने पाकिस्तान के
रावलपिंडी में नूर खान एयरफोर्स बेस पर
इसकी ट्रेनिंग ली थी।
शीर्ष खुफिया अधिकारियों के मुताबिक इन
आतंकियों ने नूर खान एयरबेस में कम से कम चार बार मॉक
ऑपरेशन किया था। इसके अलावा पाकिस्तान के पंजाब में
बहवालपुर में भी इनकी ट्रेनिंग
हुई थी।
माना जा रहा है कि चार आतंकियों की
बहवालपुर में ट्रेनिंग हुई थी।
बाकी दो आतंकियों की नूर खान
एयरबेस में कड़ी ट्रेनिंग हुई थी।
इन्होंने हमले की सफलता सुनिश्चित करने
के लिए चार मॉक ड्रिल को भी अंजाम दिया था।
इस मॉक ड्रिल में आतंकियों ने चेकिंग पॉइंट्स को पार करने
से लेकर पूरे एयरबेस को अपने कब्जे में लेने
की ट्रेनिंग ली थी।
इसके अलावा हथियार चलाने और हाथों से लड़ने का
भी प्रशिक्षण दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक
इन्हें किसी भी हालत में
गिरफ्तार होने के बजाए खुद को उड़ा लेने के सख्त निर्देश
दिए गए थे। एक शीर्ष अधिकारी
ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा,
'आतंकियों के हमले से पता चलता है कि
उनकी सैनिकों की तरह ट्रेनिंग
हुई थी। अभी यह पता
नहीं चल सका है कि वह
पाकिस्तानी सेना या एयरफोर्स के पूर्व सदस्य
तो नहीं थे।'
बीएसएफ के पूर्व डायरेक्टर जनरल ईएन
राममोहन ने कहा है, 'मेरा मानना है कि मोदी
की पाक यात्रा से आईएसआई खुश
नहीं थी। इस हमले के जरिए
शायद दोनों पीएम को बताया गया है कि वे दोनों
देशों के रिश्ते के प्रोटोकॉल के उल्लंघन की
कोशिश न करें। हो सकता है कि पठानकोट हमला पहले
से उनकी लिस्ट में रहा हो, पर
पीएम के लाहौर दौरे के बाद इसे आगे खिसका
दिया हो।' सुरक्षा विशेषज्ञों को शक है कि पठानकोट
एयरबेस में मिले भारी हथियार छह आतंकियों
के एयरबेस में आने से पहले ही वहां
पहुंचा दिए गए हों। एक वरिष्ठ सरकारी
अधिकारी का कहना है, 'छह लोग
इतनी भारी संख्या में हथियार
नहीं ला सकते हैं। हो सकता है कि
ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही हथियार
वहां पहुंचा दिए गए हों।' आतंकियों के लाए गए हथियारों
से पता चलता है कि उन्हें मॉडिफाई भी किया
गया था। एके-47 को बदलकर मोर्टार लॉन्चर या अंडर-
बैरल ग्रेनेड लॉन्चर बनाने की कोशिश
की गई थी। हालांकि, इससे वे
हथियार प्रभावी नहीं रह गए
थे।
मुंबई हमले से छह समानताएं विशेषज्ञ इस हमले
और मुंबई हमले में काफी समानताएं देख रहे
हैं। मुंबई में भी एक आतंकी को
72 घंटों बाद खत्म किया जा सका था। पठानकोट में
भी 68 घंटे बाद तक आतंकी
मोर्चा संभाले हुए थे। दूसरी समानता यह है
कि मुंबई की तरह पठानकोट के हमलावरों ने
आने के लिए पानी के रास्ते यानी
पंजाब की नहरों-नदी का
इस्तेमाल किया हो। तीसरी समानता
यह है कि दोनों जगह के हमलावरों ने गाड़ी
हाइजैक कर ड्राइवरों को मारा और अपने गंतव्य तक
पहुंचे। चौथी समानता यह है कि दोनों
हमलावरों की पाकिस्तान में ट्रेनिंग हुई
थी। पांचवीं समानता यह है कि
दोनों हमलावर अपने साथ भारी संख्या में
हथियार लेकर आए थे। छठी समानता यह
है कि दोनों हमलों के बारे में पहले से खुफिया
जानकारी हासिल थी, पर इन्हें
रोका नहीं जा सका।

आतंकवादीयों को घर में घुसकर मारो : अक्षय कूमार

पठानकोट हमले के बाद आम लोगों के बाद अब फिल्‍मी सितारों का भी गुस्‍सा भड़कने लगा है. बॉलीवुड एक्‍टर भारत को पठानकोट हमले का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए. राजधानी लखनऊ में सीनियर बैडमिन्टन लीग का प्रमोशन करने पहुंचे अक्षय कुमार ने कहा, 'वक्त आ गया है जब ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए. भारत को अातंकियों को उनके घर में घुसकर मारना चाहिए.' अक्षय ने कहा कि देश में क्रिकेट के अलावा भी दूसरे खेलों को अहमियत मिलनी चाहिए और बैडमिंटन उनका पसंदीदा खेल है. उन्‍होंने बताया कि 22 जनवरी को रिलीज होने वाली उनकी फिल्म इराक वार के दौरान कुवैत में हुए अब तक के सबसे बड़े एवैकुएशन पर आधारित है. फिल्म 'एयरलिफ्ट' में दिखाया गया है कि इराक वॉर के दौरान किस तरह एक लाख से भी ज्यादा लोगों को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया गया था. अक्षय की इस प्रेस कांफ्रेंस में उनके साथ बैडमिंटन एकेडमी के अध्यक्ष अखिलेश दास और फिल्म एयरलिफ्ट में उनकी को-स्टार निमृत कौर भी मौजूद थीं

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साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना,

पठानकोट विशेष:

जब वो युद्ध में घायल हो जाता है तो अपने साथी से बोलता है :
 
“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरी माता पूछे तो, जलता दीप बुझा देना! 
इतने पर भी न समझे तो, दो आंसू तुम छलका देना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरी बहना पूछे तो, सूनी कलाई दिखला देना!
इतने पर भी न समझे तो, राखी तोड़ देखा देना !!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरी पत्नी पूछे तो, मस्तक तुम झुका लेना! 
इतने पर भी न समझे तो, मांग का सिन्दूर मिटा देना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरे पापा पूछे तो, हाथो को सहला देना! 
इतने पर भी न समझे तो, लाठी तोड़ दिखा देना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरा बेटा पूछे तो, सर उसका तुम सहला देना!
इतने पर भी ना समझे तो, सीने से उसको लगा लेना!!"

“साथी घर जाकर मत कहना, संकेतो में बतला देना; 
यदि हाल मेरा भाई पूछे तो, खाली राह दिखा देना! 
इतने पर भी ना समझे तो, सैनिक धर्म बता देना!!"



रविवार, 3 जनवरी 2016

क्या ईसको मुंहतोड ज़वाब कहते हैं

पठानकोट मे " एयरबेस " पर पाकिस्तानी आतंकवादीयो ने हमला कर दिया । 4 आतंकी मारे गये (2 जिन्दा थे)। उसके बाद दो बयान भारतीय प्रधानमंत्री " नरेंद्र मोदी ओर गृहमंत्री " राजनाथसिंह" के सामने आये जिसमे दोनो यह कहते नजर आये कि देश ऐसे हमलों का मुंहतोड जवाब देगा । मेरा प्रधानमंत्री ओर गृहमंत्री से आग्रह या सवाल है कि कृपया यह स्पष्ट करे कि मुंहतोड जवाब का क्या मतलब है  जब पाकिस्तानी आतंकी हमला करे देगे तब देने की बात करे रहे है या हमला होने से पहले सीमा पर ही जवाब देने की बात आप दोनो कह रहे हो ?  क्योकि इसे मै आपकी सरकार का " शोय॔ " नही मानता कि हमला होने पर मुंहतोड जवाब दिया जाये वह तो हमारे कमांडो का शोय॔ है जो ना कि आपकी सरकार का ..ओर मत भूलिऐ कि ऐसा जवाब तो आपसे पहले कि सरकारे भी देती आयी है लेकिन आपको इसलिए चुना गया है मोदी साहब कि आप सीमा मे घुसने के पहले ही या घुसने के साथ ही मुंहतोड जवाब उन्हें दे सके ।

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