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मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

राष्ट्रवाद की परिभाषा क्या इनके कर्मो मे फिट बैठती है ?

देश जानना चाहता है जो लोग अपनी कट्टरपंथी सोच को राष्ट्रवाद का जामा पहनाते हैं लेकिन यह नहीं बताते कि जब कोहेनूर हीरे पर अपना दावा जताते हुए भारत उसकी वापसी की मांग करता रहा है, तो केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कोहेनूर पर से अपना दावा छोड़ क्यों रही है? कोहेनूर पर भारत का दावा 'राष्ट्रवादी' था, या उस पर से दावा छोड़ना? यह कौन सा राष्ट्रवाद है कि कश्मीर में तिरंगा फहराने वालों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं? यह कौन सा राष्ट्रवाद है जो भारत को गुलाम बनाकर चूसने वाले अंग्रेजों, जलियांवाला बाग़ में निर्दोष जनता पर गोली चलाने वाले साम्राज्यवादियों और हमारे क्रांतिकारियों को फांसी पर चढाने वाले शासकों के वंशजों के सम्मान में भोज आयोजित करता है?  स्वयं इन्हीं द्वारा परिभाषित 56 इंची राष्ट्रवाद की परिभाषा क्या इनके कर्मो मे फिट बैठती है  ?

बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

क्या भविष्यमे किसान भारतीय राष्ट्रवाद को खतरा पैदा करेंगे?

रोहित वेमुला और कन्हैय्याकुमार को न्याय मिलनाही चाहिये. लेकीन अगर किसान आत्महत्या, महंगाई, पुराना-नया काला धन जैसे महत्वपूर्ण सवालोंको दबानेके लिये भाजपाद्वारा जे एन यु कांड जानबुझके उछाला गया है तो भाजपा कि इस रणनितीका सक्षम प्रतिवाद भी जरुरी है यह बात विपक्ष ठीकसे समझ ले. विदर्भ, मराठवाडा, बुंदेलखंड, तेलंगाणा और ऐसे कई इलाकेमे किसानोंकी स्थिती बेहद गंभीर है. संसद अगर इससे बेखबर रहेगी तो अंततः नुकसान भारतीय समाज का ही होगा. सच मानो तो यह मुद्दा भी भविष्य मे राष्ट्रवाद के लिये खतरा साबित हो सकताहै. आखिर किसान कबतक आत्महत्या करेगा. उसकी दुसरी पिढी अगर हथियार उठाने पर मजबूर हो गयी तो दोष तो उन सभी सरकारोंका होगा जिन्होने धर्म-जातीके अस्मिता-अहंकारवादी नकली सवाल पैदा करके तथा उनसे उलझनेका नाटक करते हुये किसान और खेतीसे जुडे सवालोंकी अनदेखी की!!! 

सौ - सुभाष वारे

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