रविवार, 29 मई 2016

स्त्री तब तक 'चरित्रहीन' नहीं हो सकती. जब तक पुरुष चरित्रहीन न हो "

संन्यास लेने के बाद गौतम बुद्ध ने अनेक क्षेत्रों की यात्रा की.
एक बार वह एक गांव में गए। वहां एक स्त्री उनके
पास आई और बोली- आप तो कोई "राजकुमार" लगते हैं।
क्या मैं जान सकती हूं कि इस युवावस्था में गेरुआ वस्त्र पहनने का क्या कारण है ?
बुद्ध ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया कि...
"तीन प्रश्नों" के हल ढूंढने के लिए उन्होंने संन्यास
लिया.....
बुद्ध ने कहा__हमारा यह शरीर जो युवा व आकर्षक है,पर जल्दी ही यह "वृद्ध" होगा, फिर "बीमार" और अंत में "मृत्यु" के मुंह में चला
जाएगा।
मुझे "वृद्धावस्था","बीमारी" व "मृत्यु" के कारण का ज्ञान प्राप्त करना है...
बुद्ध के विचारो से प्रभावित होकर उस स्त्री ने उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया...
शीघ्र ही यह बात पूरे गांव में फैल गई। गांव वासी बुद्ध के पास आए व आग्रह किया कि वे इस स्त्री के घर भोजन करने न जाएं....!!!
क्योंकि वह "चरित्रहीन" है..
बुद्ध ने गांव के मुखिया से पूछा...??
क्या आप भी मानते हैं कि वह स्त्री चरित्रहीन है...??
मुखिया ने कहा कि मैं शपथ लेकर कहता हूं कि वह बुरे चरित्र वाली स्त्री है। आप उसके घर न जाएं।
बुद्ध ने मुखिया का दायां हाथ पकड़ा और उसे
ताली बजाने को कहा...
मुखिया ने कहा मैं एक हाथ से ताली नहीं बजा सकता...
"क्योंकि मेरा दूसरा हाथ आपने पकड़ा हुआ है"..!!!
बुद्ध बोले इसी प्रकार यह स्वयं चरित्रहीन कैसे हो सकती है...??
जब तक इस गांव के "पुरुष चरित्रहीन" न हों...!!!
अगर गांव के सभी पुरुष अच्छे होते तो यह औरत ऐसी न होती इसलिए इसके चरित्र के लिए यहां के पुरुष जिम्मेदार हैं....
यह सुनकर सभी "लज्जित" हो गए.....

लेकिन आजकल हमारे समाज के पुरूष "लज्जित" नही "गौर्वान्वित" महसूस करते है....
क्योकि यही हमारे "पुरूष प्रधान" समाज की
रीति एवं नीति है..॥
सकारात्मक सोचो सकारात्मक सोच से ही अपना और अपने घर
समाज देश का विकास होगा...

नमो बुद्धाय

शनिवार, 28 मई 2016

मुजे उस दिनका इंतेझार है जब जश्न सरकार नहीं, लेकीन जनता मनाये.

मराठवाडा पानीको रो रहा है...
बुंदेलखंड खानेको रो रहा है...
नशे से बर्बाद पंजाब रो रहा है...
व्यापमसे खुनसे तना मध्यप्रदेश रो रहा है..
किशान रो रहा है...
जन घनके खाली खाते रो रहै है...
मजदूर रो रहा है...
CBI देखके तोता भी रो रहा है...
नौकरीवाले PF को रो रहे है...
आरक्षणको मजबूर सवर्ण रो रहा है...
विध्यार्थी रो रहे है...
सोमालीया देखके ज्ञान रो रहा है....
लखटकीया शूट देख फटेहाल रो रहा है..
जंतर मंतर पे सैनिक रो रहे है...
स्वर्णकार रो रहे है...
आजादी रो रही है...
महेंगाइसे गृहिणी रो रही है...
फर्जी डिग्रीसे देशका सम्मान रो रहा है...
सरकारी शिक्षा रो रही है...
पडोशीसे रिश्तोपे विदेशनीति रो रही है..
लोकशाही रो रही है...
निहालचंदसे संसद रो रही है...
सरकारी आरोग्य रो रहा है...
असुरक्षासे महिला रो रही है...
छोटे उध्योगपति रो रहे है...
गंगा मैया रो रही है...
अल्पसंख्यक रो रहा है...
गाय माता रो रही है...
चिक्कीकांडसे बच्चोका निवाला रो रहा है..
दलित रोहितकी मां रो रही है...
फर्जी राष्ट्रवादसे भारतमां रो रही है....
दंगोसे त्रस्त जनता रो रही है...
बुद्धिजीवी रो रहे है...
आर्टीस्ट रो रहा है...
फिल्मकार रो रहा है...
राष्ट्रीय एवोर्ड विजेता रो रहा है...
कशमीरमें सेनाका सन्मान रो रहा है..
वैज्ञानिक रो रहा है...
इमानदार कीर्ती आजाद रो रहा है..
तेलकी मलाइ खाते देख नसीब रो रहा है..
शहिद जवानकी विधवा रो रही है...
जुठसे त्रस्त सच रो रहा है...
मिड डे मिलमें कीडे खाता बच्चा रो रहा है..
साहित्यकार रो रहा है....
इमानदार पत्रकारीता रो रही है...
लूडका सेन्सेक्स रो रहा है...
मंत्रीकी गुंडाइ से थर्राइ प्रजा रो रही है...
कश्मीरमें तिरंगा रो रहा है...
सहिष्णुता रो रही है...
घटता एक्सपोर्ट रो रहा है...
इमानदार अधिकारी रो रहा है...
आर्टीकल 370 रो रहा है...
बाबा साहेबका संविधान रो रहा है...
गुजरातका कुपोषीत बच्चा रो रहा है...
कर्जमें डूबी बेन्क रो रही है...
तोडा मरोडा इतिहास रो रहा है...
अयोध्यामें राम लल्ला रो रहा है...
RBIका गवर्नर रो रहा है...
सुप्रिम कोर्टका जज रो रहा है...
अन्नाका लोकपाल बिल रो रहा है...
विपक्षी राज्य सरकार रो रही है...
घटती नौकरीयां रो रही है...
गुजरातमें शराबीकी बीबी रो रही है...
नागरीकोका अधिकार रो रहा है...
लूडका रूपिया रो रहा है...
भाषण सूनके कान भी रो रहे है...
आम आदमीका सुख चैन रो रहा है...

सारे मालिक रो रहे है...

और चौकीदार हमारे पसीनेकी कमाइके 1000 करोड सिर्फ एक दिनमें खर्चके फूल पेज एडसे न्युज पेपर भरता है और बोलिवुडके ठुमको के साथ जश्न मना रहा है...

कीस बात का जश्न ?? पुर्ण बहुमतकी सरकार होनेके बावजुद एक भी चुनावी वादा 2 सालमें पुरे न करने का ?

मुजे उस दिनका इंतेझार है जब जश्न सरकार नहीं, लेकीन जनता मना पाये !

खैर, पहेलेके जमानेमें भी  राजा भी तो ऐसे ही राज्यकी चिंता छोडके जश्नमें डूबे रहेते थे !! तभी तो भारत देश बरबाद हुआ था !!

मेरा देश बदल रहा है...
हर कोइ रो रहा है...

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