शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

बेटे का दर्द और ईंन्सानियत

एक डॉक्टर को जैसे ही एक
urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया.
वो जितना जल्दी वहाँ आ
सकते थे आ गए.
वो तुरंत हि कपडे बदल
कर ऑपरेशन थिएटर की और बढे.
डॉक्टर को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए
जिसका इलाज होना था.
पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे,
और चिल्लाने लगे.. "आखिर इतनी देर तक कहाँ थे
आप?
क्या आपको पता नहीं है की मेरे बच्चे
की जिंदगी खतरे में है .
क्या आपकी कोई
जिम्मेदारी नहीं बनती..
आप का कोई कर्तव्य है
या नहीं ? ”
डॉक्टर ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ
कहा- “मुझे माफ़
कीजिये, मैं
हॉस्पिटल में नहीं था.
मुझे जैसे ही पता लगा,
जितनी जल्दी हो सका मैं
आ गया..
अब आप शांत हो जाइए, गुस्से से कुछ नहीं होगा”
ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया.
भला अपने बेटे की इस नाजुक हालत में वो शांत कैसे
रह सकते थे…
उन्होंने कहा- “ऐसे समय में दूसरों
को संयम रखने का कहना बहुत आसान है.
आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल रहा है..
अगर
आपका बेटा इस तरह मर रहा होता तो क्या आप
इतनी देर करते..
यदि आपका बेटा मर जाए
अभी, तो आप शांत रहेगे?
कहिये..”
डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा-
“किसी की मौत और
जिंदगी ईश्वर
के हाथ में है.
हम केवल उसे बचाने का प्रयास कर सकते है.. आप ईश्वर से
प्राथना कीजिये.. और मैं अन्दर जाकर ऑपरेशन
करता हूँ…” ये
कहकर डॉक्टर अंदर चले गए..
करीब 3 घंटो तक ऑपरेशन चला..
लड़के के पिता भी धीरज के साथ बाहर बैठे
रहे..
ऑपरेशन के बाद जैसे
ही डाक्टर बाहर निकले..
वे मुस्कुराते हुए, सीधे पिता के पास गए..
और उन्हें कहा- “ईश्वर का बहुत
ही आशीर्वाद है.
आपका बेटा अब ठीक है.. अब आपको जो
भी सवाल पूछना हो पीछे आ
रही नर्स से पूछ लीजियेगा..
ये कहकर वो जल्दी में चले गए..
उनके बेटे की जान बच
गयी इसके लिए वो बहुत खुश तो हुए..
पर जैसे ही नर्स उनके पास आई.. वे बोले.. “ये कैसे
डॉक्टर है..
इन्हें किस बात का गुरुर है.. इनके पास हमारे लिए
जरा भी समय नहीं है..”
तब नर्स ने उन्हें बताया..
कि ये वही डॉक्टर है जिसके
बेटे के साथ आपके बेटे का एक्सीडेँट हो गया था.....
उस दुर्घटना में इनके बेटे
की मृत्यु हो गयी..
और हमने जब उन्हें फोन किया गया..
तो वे उसके क्रियाकर्म कर
रहे थे…
और सब कुछ जानते हुए भी वो यहाँ आए और
आपके बेटे का इलाज
किया...
नर्स की बाते सुनकर बाप की आँखो मेँ
खामोस आँसू
बहने लगे ।
मित्रो ये होती है इन्सानियत ""
जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे मत लीजिये,
जीने का शौक भी रखिये..
शमशान ऐसे लोगो की राख से...
भरा पड़ा है..."

ईश्वर द्वारा कहीं बात गलत तो नही ?????

ईश्वरवादियो का एक मत यह हैं कि इंसानों का
भाग्य पहले से ही लिखा है।इंसानों के साथ अच्छी
बुरी जो भी घटना होती है वह भाग्य के प्रतिफल
होती हैं।
ईश्वर वादियों का दुसरा मत यह है कि यदि इंसान
गलत कार्य (पाप) करेगा तो उसे नर्क व जहन्नुम में
सजा दी जाएगी। बुरे कर्मों की सजा इंसान को
सहनी पड़ती हैं।
अब यदि ये कहा जाए कि इंसानों का भाग्य पहले से
ही लिखा है तो इंसानों पर अच्छे बुरे कर्मों का दोष
कैसे लगाया जाता सकता है ? क्योंकि इंसान तो
भाग्य के अधीन कार्य कर रहा है ।
और यदि ये कहा जाए कि इंसान अच्छे बुरे कर्म के
लिए स्वयं जिम्मेदार हैं तो उसे भाग्य कैसे कहा जा
सकता है ?
सोचने वाली बात तो यह है कि ये दोनों विरोधी
विचारधारा गीता में हैं। जब दो विरोधी
विचारधारा आमने सामने होती हैं तो दोनों में से
किसी एक का गलत होना सुनिश्चित है। चुकी ये
दोनों विचारधारा ईश्वर की वाणी गीता में हैं और
दोनों में से एक विचार का गलत होना सुनिश्चित है
। तो यहाँ विकट स्थिति यह पैदा होती हैं कि जिसे
हम ईश्वर द्वारा कहीं बात समझते हैं कहीं वो ही तो
गलत नहीं !

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