गुरुवार, 26 नवंबर 2015

26/11

मुंबई हमले में कई वीर सपूतों को हमने खो दिया। इस
हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। यह हमला सिर्फ
मुंबई पर न होकर देश पर हमला था। 26-28 नवंबर तक रात
दिन चली मुठभेड़ के बाद आतंकियों को मार गिराया गया
और एक को जिंदा पकड़ लिया गया। इस एकमात्र
आतंकी अजमल कसाब को 21/11 को पुणे
की जेल में फांसी दे दी गई।

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन
भारतीय सेना में मेजर जो बाद में नेशनल
सिक्योरिटी गार्ड में स्पेशल टास्क फोर्स का हिस्सा
बने। वे नवंबर 2008 में मुंबई के हमलों में आतंकवादियों से लड़ते
हुए मारे गए। उन्होंने इस ऑपरेशन में अपने साथियों को यह
कहते हुए पीछे कर दिया था कि ऊपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा।
उन्नीकृष्णन ने न सिर्फ आतंकियों
की गोलियां अपने ऊपर लीं बल्कि अपने
एक घायल साथी को भी सुरक्षित बाहर
तक पहुंचा दिया। उनकी बहादुरी के लिए
उन्हें 26 जनवरी 2009 को अशोक चक्र से
सम्मानित किया गया।

अशोक कामटे
मुंबई हमले की रात मैट्रो सिनेमा के पास आतंकियों
को जवाब देने के लिए कामटे को वहां भेजा गया
था। आतंकियों से आमने सामने की मुठभेड़ में उन्होंने
तब तक जवाबी कार्यवाही की जब तक उनके शरीर
में जान रही। 28 नवंबर को पूरे राजकीय सम्मान के
साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

हेमंत करकरे
1982 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। उनकी
कार्यकुशलता को देखते हुए ही उन्हें मुंबई एटीएस का
प्रमुख बनाया गया था। उन्होंने नक्सलियों के
खिलाफ भी काबलियत का परिचय दिया था। वह
मुंबई हमले के दौरान 29 सितंबर 08 को मालेगांव में हुए
बम विस्फोट की गुत्थी सुलझाने में जुटे हुए थे। कामा
अस्पताल में आतंकियों के पहुंचने और लोगों को मारे
जाने की सूचना पर वह अपने जांबाज साथियों के
साथ वहां पहुंचे थे। कामा अस्पताल के बाहर पहुंचते
ही उन्हें आतंकियों के हमले का शिकार होना पड़ा।
इस मुठभेड़ में वह वीरगति को प्राप्त हुए।

अरुण जाधव
पुलिस अधिकारी अरुण जाधव आतंकियों से सीधी
चली मुठभेड़ में घायल हो गए थे। उन्होंने कामा
अस्पताल में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में
अहम भूमिका निभाई थी। घायल अवस्था में उन्हें
अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बाद में वह
ठीक हो गए।

एएसआई तुकाराम ओंबले
मुंबई हमले के दौरान ओंबले गिरगांव चौपाटी में तैनात
थे। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने मुंबई पुलिस
ज्वाइन की थी। आतंकी हमले के दौरान उनके पास
केवल एक लाठी ही थी, लेकिन वह इससे घबराए नहीं
और आतंकियों को रोककर उनका सामना किया।
उन्होंने आतंकियों की सारी गोलियां अपने सीने पर
लीं और एक आतंकी को अंत तक नहीं छोड़ा। यह
आतंकी था अजमल कसाब जिसको 2111 को फांसी
दी गई। 26 जनवरी 2009 को उन्हें अशोक चक्र से
सम्मानित किया गया।

विजय सालस्कर
सालस्कर उसी टीम का हिस्सा थे जो टीम कामा
अस्पताल में आतंकियों से मुठभेड़ करने निकली थी।
कामा अस्पताल पहुंचते ही आतंकियों ने अपनी
बंदूकों का रुख इनकी ओर कर दिया, जिसमें उनकी
मौत हो गई।

बुधवार, 25 नवंबर 2015

असहिष्णुता न होती तो????

- असहिष्णुता न होती तो दादरी घटना ना होती..
- असहिष्णुता न होती तो जसोदा बेन को डर न लगता..
- असहिष्णुता न होती तो पाकिस्तान चले जाओ की आवाज़े न आतीं
- असहिष्णुता न होती तो लव जिहाद के झूठे घटना मसले न होते ।
- असहिष्णुता न होती तो हरामज़ादे और राम जादे की बातें न होतीं
- असहिष्णुता न होती तो सांसद नेता और राज्यपाल अपने पद और गरीमा को किनारे रखकर भेदभाव वाले बयान न देते..
- असहिष्णुता न होती तो 400 से ज़्यादा साहित्यकार अपने पुरस्कार वापस न करते..
- असहिष्णुता न होती तो टीपू को देशद्रोही न कहा जाता..
- असहिष्णुता न होती तो बड़े बड़े कलाकारों को पाकिस्तान भेजने का फ़रमान न आते।
- असहिष्णुता न होती तो बाबा सूरत सिंह अब तक अनशन पर न होते..
- असहिष्णुता न होती तो पंजाब में गुरु ग्रन्थ साहिब का अपमान न होता..
- असहिष्णुता न होती तो दलितों के मूंह में गोबर न ठूंसा जाता ।
- असहिष्णुता न होती तो फरीदाबाद में मस्जिद को लेकर दंगे न होते ।
- असहिष्णुता न होती तो हरियाणा में दलितों के मासूम बच्चो को ज़िन्दा न जलाया जाता ।
- असहिष्णुता न होती तो दंगे करवाने वाले सिंघल को लोह पुरुष का दर्जा न दिया जाता।
- असहिष्णुता न होती तो देश के पहले आतंकवादी गोडसे का मंदिर न बनता..
- असहिष्णुता न होती तो महिलाओ का अपनाम सरेआम न होता..
- असहिष्णुता न होती तो सोशल मीडिया पर भक्त गालियाँ न देते..
- असहिष्णुता न होती तो वसीम अकरम त्यागी जैसे पत्रकारों के फेसबुक अकाउंट बंद न होतें..
- असहिष्णुता न होती तो साध्वी अंडर वर्ल्ड डॉन छोटा राजन को हिंदू शेर न कहती..
- असहिष्णुता न होती तो मुल्क़ ग्रह युद्ध की तरफ़ जाता हुआ न दीखता..
- असहिष्णुता न होती तो प्रवीण तोगड़िया अब तक के सभी नरसंहारों की ज़िम्मेदारी न लेता..
- असहिष्णुता न होती तो देश में कभी ऐसा न होता..

और आप कहते हैं देश में असहिष्णुता जैसा कुछ भी नही है..?

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