मंगलवार, 31 मई 2016

मोदी ने आते ही जादू की छड़ी घुमाई

मोदी ने आते ही जादू की छड़ी घुमाई और सिर्फ 24 महीनो में भारत
को कहा से कहा पंहुचा दिया।
सच में मोदी तो भगवान हे । क्या नही किया इन 24 महीनो में मोदी ने।
मोदी के पहले 1947 से 13 मई 2014 तक कुछ भी नही था।हम बेलगाडी से यात्रा कर रहे थे उनके आते ही सायकल काअविष्कार हुवा, स्कूटर ,मोटर सायकल ,ऑटोरिक्शा,कार, बस, जीप ,ट्रक , रेल, हवाई जहाज़ , पानी का जहाज़ आदि परिवहन साधनो का अविष्कार हुवा।
कृषि में आत्म निर्भर हुवे, सेना का निर्माण हुवा, तोप ,मिसाइल, परमाणु बम , अंतरिक्ष स्टेशन बना, चाँद पर कदम रखा, मंगल गृह पर उपग्रह पंहुचा, मेडिकल कालेज, स्कुल, एम्स हॉस्पिटल, आईआईटी,आईआईएम खुले, नेशनल हाइवे ने ,पुरे देश में रेल की पटरियां बिछ गई ,बाँध बने ,सभी घरो में बिजली पहुची,नहरे बनी,कारखाने खुले ,बिजली घर बने,थर्मल पावर स्टेशन बने ,कम्प्यूटर का आविष्कार , मोबाईल का अविष्कार,टेलीफ़ोन रेडियो, टीवी का आविष्कार, इ रिक्शा, रोड रोलर, जेसीबी ,एयरकंडिशनर, पंखे ,कूलर, वाशिंग मशीन , फ्रीज़ ,
पुलो का निर्माण घडी ,गैस चूल्हा ,मिक्सर, जनरेटर LCD,LED टीवी, कैमरा, सेल्फ़ी लेने वाला मोबाईल, हीटर, गीजर , सड़के बनी,पेट्रोल पम्प खुले,अग्नि मिसाइल बनी,टीवी चैनल खुले,जासूसी करने की तकनीक का अविष्कार हुवा,
पाकिस्तान का विभाजन कर बांग्ला देश बना,पाकिस्तान से युद्ध जीता,सब को पीने के लिए शुद्ध पानी मिला,बेंको का राष्ट्रीयकरण हुवा,रियासतो का भारत में विलय हुवा।
क्या नही हुवा इन 24 महीनो में।
कृपया आप मोदी को बुरा मत बोलो । मोदी भगवान हे।आज मोदी नही होते तो हम पाषाण युग में होते।इतनी तरक्की तो किसी भी देश ने 24 महीनो में नही की है।
झूठबोल रहा हुँ, तो मुझे सजा दीजिये परन्तु मोदी को बुरा मत बोलो।कांग्रेस ने कुछ नही किया जो किया सिर्फ और सिर्फ मोदी ने किया है मोदी पुरुष नही है.....................महापुरुष है, देवता हे ।
मोदी का मन्दिर हर घर में होना चाहिए उनकी रोज़ पूजा आरती होना चाहिए। देश के विकास के लिए पत्नी तक का त्याग किया तब जा कर इन 24 महीनो में इतनी तरक्की की है ।।

नमो नमो प्रभु

:-अज्ञात

रविवार, 29 मई 2016

स्त्री तब तक 'चरित्रहीन' नहीं हो सकती. जब तक पुरुष चरित्रहीन न हो "

संन्यास लेने के बाद गौतम बुद्ध ने अनेक क्षेत्रों की यात्रा की.
एक बार वह एक गांव में गए। वहां एक स्त्री उनके
पास आई और बोली- आप तो कोई "राजकुमार" लगते हैं।
क्या मैं जान सकती हूं कि इस युवावस्था में गेरुआ वस्त्र पहनने का क्या कारण है ?
बुद्ध ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया कि...
"तीन प्रश्नों" के हल ढूंढने के लिए उन्होंने संन्यास
लिया.....
बुद्ध ने कहा__हमारा यह शरीर जो युवा व आकर्षक है,पर जल्दी ही यह "वृद्ध" होगा, फिर "बीमार" और अंत में "मृत्यु" के मुंह में चला
जाएगा।
मुझे "वृद्धावस्था","बीमारी" व "मृत्यु" के कारण का ज्ञान प्राप्त करना है...
बुद्ध के विचारो से प्रभावित होकर उस स्त्री ने उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया...
शीघ्र ही यह बात पूरे गांव में फैल गई। गांव वासी बुद्ध के पास आए व आग्रह किया कि वे इस स्त्री के घर भोजन करने न जाएं....!!!
क्योंकि वह "चरित्रहीन" है..
बुद्ध ने गांव के मुखिया से पूछा...??
क्या आप भी मानते हैं कि वह स्त्री चरित्रहीन है...??
मुखिया ने कहा कि मैं शपथ लेकर कहता हूं कि वह बुरे चरित्र वाली स्त्री है। आप उसके घर न जाएं।
बुद्ध ने मुखिया का दायां हाथ पकड़ा और उसे
ताली बजाने को कहा...
मुखिया ने कहा मैं एक हाथ से ताली नहीं बजा सकता...
"क्योंकि मेरा दूसरा हाथ आपने पकड़ा हुआ है"..!!!
बुद्ध बोले इसी प्रकार यह स्वयं चरित्रहीन कैसे हो सकती है...??
जब तक इस गांव के "पुरुष चरित्रहीन" न हों...!!!
अगर गांव के सभी पुरुष अच्छे होते तो यह औरत ऐसी न होती इसलिए इसके चरित्र के लिए यहां के पुरुष जिम्मेदार हैं....
यह सुनकर सभी "लज्जित" हो गए.....

लेकिन आजकल हमारे समाज के पुरूष "लज्जित" नही "गौर्वान्वित" महसूस करते है....
क्योकि यही हमारे "पुरूष प्रधान" समाज की
रीति एवं नीति है..॥
सकारात्मक सोचो सकारात्मक सोच से ही अपना और अपने घर
समाज देश का विकास होगा...

नमो बुद्धाय

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